सीवान फायरिंग: बच्चों को पिस्तौल से गोली मारी गई, युवाओं की आवाज दबा रही सरकार — इमरान प्रतापगढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने 2 अगस्त 2026 को सीवान फायरिंग मामले की जाँच के बाद गंभीर आरोप लगाए — उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर तीन बच्चों को पिस्तौल से गोली मारी गई और सरकार युवाओं के विरोध की आवाज को बलपूर्वक दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम के हिस्से के रूप में सीवान पहुँचे प्रतापगढ़ी ने घायल बच्चों से मुलाकात के बाद यह बयान दिया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रतापगढ़ी ने बताया कि एके-47 की फायरिंग की चर्चा तो व्यापक रूप से हुई, लेकिन जो गोलियाँ सीधे बच्चों को लगीं, वे पिस्तौल से चलाई गई थीं। उनके अनुसार, एक बच्चे के पैर में गोली लगी, जबकि दो अन्य बच्चों की गर्दन और गले में गोली लगी — जिसे उन्होंने 'अत्यंत गंभीर' करार दिया।
प्रतापगढ़ी ने कहा, "एके-47 चली, जिसका शोर पूरी दुनिया में सुनाई पड़ रहा है, लेकिन वहाँ पर तीन बच्चों को गोली लगी, और वे गोलियाँ एके-47 से नहीं, बल्कि पिस्तौल से चलाई गई थीं। एक बच्चे के पैर में गोली लगी, जबकि दो अन्य बच्चों की गर्दन और गले में गोली लगी, जो बहुत गंभीर मामला है।"
फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट
कांग्रेस की टीम में सासाराम के सांसद मनोज राम, विक्रांत भूरिया और विनोद जाखड़ भी शामिल थे। प्रतापगढ़ी के अनुसार, घायल बच्चों का दर्द सुनकर यह स्पष्ट हुआ कि "इस आंदोलन को बहुत बेरहमी से कुचलने की कोशिश की गई।" उन्होंने कहा कि टीम सभी तथ्य राहुल गांधी के सामने रखेगी और उम्मीद जताई कि गांधी जल्द पीड़ितों से मिलेंगे तथा संसद में यह मुद्दा उठाया जाएगा।
सरकार पर आरोप
प्रतापगढ़ी ने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत — युवाओं — को एके-47, पैलेट गन, पिस्तौल, आँसू गैस और लाठी से कुचलने की कोशिश हो रही है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के विचारों का हवाला देते हुए कहा, "युवाओं को शिक्षा और रोज़गार की जगह गोलियाँ दी जा रही हैं।"
उन्होंने यह भी कहा, "लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाने के लिए हथियारों का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में युवा रोज़गार और परीक्षा पारदर्शिता को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज़ हुए हैं।
आगे क्या होगा
कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट राहुल गांधी को सौंपी जाएगी। प्रतापगढ़ी ने संकेत दिया कि यह मामला संसद में उठाया जाएगा और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी व राजनीतिक दोनों मोर्चों पर दबाव बनाया जाएगा।