स्लिनेक्स-26: भारत-श्रीलंका नौसेनाओं ने विशाखापत्तनम में पूरा किया 13वाँ संयुक्त समुद्री अभ्यास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना और श्रीलंकाई नौसेना ने 23 सितंबर 2026 को स्लिनेक्स-26 के 13वें संस्करण का समापन विशाखापत्तनम में किया, जो 17 सितंबर से आरंभ हुआ पाँच दिवसीय द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास था। इस अभ्यास में दोनों देशों के युद्धपोतों ने समन्वित समुद्री युद्धाभ्यास, हवाई अभियान, रात्रिकालीन रसद आपूर्ति और विशेष बलों की संयुक्त कार्रवाइयों का अभ्यास किया। भारतीय नौसेना के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल और संयुक्त अभियान क्षमता को सुदृढ़ करना था।
अभ्यास का संरचित क्रम
स्लिनेक्स-26 दो चरणों में आयोजित किया गया। पहला चरण बंदरगाह पर आधारित था, जिसमें दोनों नौसेनाओं के अधिकारियों और नौसैनिकों के बीच पेशेवर संवाद, एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा और खेल गतिविधियाँ शामिल थीं। इस चरण ने दोनों पक्षों को आपसी परिचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर दिया।
दूसरा और मुख्य चरण समुद्री अभियानों पर केंद्रित था। इसमें दोनों नौसेनाओं ने एक साथ समन्वित युद्धाभ्यास किए, जिसमें हवाई और समुद्री संसाधनों के बीच तालमेल तथा रात्रिकालीन परिस्थितियों में रसद आपूर्ति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। गौरतलब है कि रात्रिकालीन समुद्री रसद अभियान वास्तविक संकट परिदृश्यों में अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
विशेष बलों की भूमिका
अभ्यास में दोनों देशों के विशेष नौसैनिक बलों ने भी प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने जहाज पर चढ़ने, तलाशी लेने और कब्जे में लेने की संयुक्त कार्रवाइयाँ कीं। इसके साथ ही हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे तेज़ी से नीचे उतरने की तकनीक — जिसे 'फास्ट-रोप' कहा जाता है — का भी अभ्यास किया गया। इन अभ्यासों से समुद्री अपराध रोधी और आतंकवाद विरोधी संयुक्त अभियानों की क्षमता को परखा गया।
रणनीतिक महत्व
स्लिनेक्स-26 भारत के 'महासागर' विजन और 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारी को प्रगाढ़ करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा, गहरे समुद्र में संसाधन अधिकार और क्षेत्रीय शक्तियों की सक्रियता को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। नियमित द्विपक्षीय अभ्यास भारत और श्रीलंका के बीच परस्पर विश्वास और अंतर-संचालनीयता (इंटरऑपरेबिलिटी) बनाने का आधार हैं।
यह अभ्यास दोनों देशों के रक्षा संबंधों की निरंतरता को भी दर्शाता है। गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग पिछले कुछ वर्षों में और अधिक संस्थागत रूप ले चुका है, जिसमें प्रशिक्षण, उपकरण साझाकरण और संयुक्त गश्त शामिल हैं।
आगे की दिशा
दोनों नौसेनाओं ने अभ्यास के दौरान समुद्री अभियानों की बेहतर कार्यप्रणालियों पर विस्तृत संवाद किया और अपने-अपने अनुभव साझा किए। भारतीय नौसेना के अनुसार, इस तरह के नियमित अभ्यास दोनों देशों की सामूहिक समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मज़बूती देते हैं। स्लिनेक्स श्रृंखला के 14वें संस्करण की प्रतीक्षा अब दोनों नौसेनाओं के बीच और गहरे सहयोग की उम्मीद के साथ की जाएगी।