राजस्थान SOG के ASP मुकेश कुमार सोनी निलंबित, उदयपुर में ₹2 करोड़ रिश्वत मामले में हुई थी गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने 6 अक्टूबर 2026 को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) मुकेश कुमार सोनी को निलंबित कर दिया। उदयपुर में 272 भूखंडों से जुड़े विवाद में आरोपियों को राहत दिलाने के एवज में ₹2 करोड़ की कथित रिश्वत मांगने के आरोप में उन्हें 27 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। यह निलंबन आदेश भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय की मंजूरी के बाद जारी किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
26 सितंबर को ACB ने कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को ₹2 करोड़ की रकम लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन, 27 सितंबर को, ASP सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि सोनी ने दो बिचौलियों के माध्यम से यह रिश्वत वसूलने की योजना बनाई थी — अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने और जब्त संपत्ति लौटाने के बदले।
यह मामला उदयपुर के 272 भूखंडों के उस विवाद से जुड़ा है, जिसमें 2022 में सूरजपोल थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि खाली और निरस्त भूखंडों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार कर स्वामित्व रिकॉर्ड में फेरबदल की गई और कथित तौर पर इन भूखंडों को बेचा गया। जांच के बाद नगर निगम ने 48 लीज डीड रद्द की थीं।
जांच में सामने आए अहम तथ्य
ACB के अनुसार, 23 सितंबर को सोनी ने रानी रोड पर होने वाली बैठक का समय तीन बार बदला — पहले सुबह 10 बजे, फिर दोपहर 1 बजे और अंत में शाम 5 बजे तय की, लेकिन वे लगभग डेढ़ घंटे की देरी से शाम 6:30 बजे पहुँचे। सज्जन सिंह शिकायतकर्ता निरंजन मोगरा के साथ महाकालेश्वर मंदिर के पास पहुँचा था। तीनों के बीच करीब चार मिनट की बातचीत हुई और ACB का दावा है कि सोनी ने रिश्वत की जानकारी मोबाइल फोन पर टाइप करके दी।
ACB ने शिकायत मिलने के बाद तीन दिनों तक डिजिटल रिकॉर्डिंग के ज़रिए रिश्वत मांग का सत्यापन किया। कथित बिचौलिए ने शिकायतकर्ता और सोनी के बीच दो WhatsApp कॉल भी कराई थीं। ACB ने इन बातचीत की डिजिटल रिकॉर्डिंग अपने पास सुरक्षित रखी है।
बरामद दस्तावेज़ और संपत्ति
जांच के दौरान ACB ने सोनी के कार्यालय से 41 भूखंडों से संबंधित फाइलें बरामद कीं, जो कथित तौर पर नगर निगम से जुड़ी थीं। कई दस्तावेजों पर UDA (अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) की मुहर और हस्ताक्षर मिले हैं; ACB अब यह जाँच रही है कि ये वास्तविक हैं या फर्जी। जांचकर्ताओं को ऐसी फाइलें भी मिलीं जिनमें भूखंड संख्याएँ बदली हुई थीं, जिससे दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ का पहलू भी जांच के दायरे में आ गया है।
इसी मूल मामले में SOG ने पूर्व ज़िला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कंकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को पहले गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान मोगरा के घर से कथित तौर पर करीब 2 किलोग्राम सोने के आभूषण और ₹11 लाख नकद बरामद किए जाने की बात सामने आई थी।
SOG अधिकारी पर आरोप का महत्व
यह मामला इसलिए विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि आरोपित अधिकारी राजस्थान पुलिस की विशेष जांच इकाई — SOG — में एएसपी रैंक पर तैनात थे। SOG की भूमिका ही गंभीर अपराधों की जांच करना है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में भ्रष्टाचार-विरोधी कार्रवाइयों पर सरकारी प्रतिबद्धता की परीक्षा हो रही है। गौरतलब है कि ACB ने बिचौलिए की गिरफ्तारी से लेकर डिजिटल सत्यापन और अधिकारी की गिरफ्तारी तक की पूरी कार्रवाई तीन दिनों के भीतर की।
आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया
ACB की टीम ने कथित बिचौलिए सज्जन सिंह को सोनी के आवास पर ले जाकर मौके का सत्यापन किया, जिसका नेतृत्व जांच अधिकारी महावीर सिंह शेखावत ने किया। ACB के अनुसार, सज्जन सिंह अक्सर सोनी के घर जाता था और वहाँ कथित रिश्वत लेन-देन पर चर्चा होती थी।
सोनी का निलंबन 27 सितंबर 2026 से प्रभावी माना गया है और विभागीय कार्रवाई औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है; UDA मुहर और हस्ताक्षर की प्रामाणिकता की जांच का नतीजा इस मामले की कड़ियों को और खोल सकता है।