12 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रामचंद्र दास बोले — बंगाल में बदल रहा माहौल, 'सोनार बांग्ला' का सपना होगा साकार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रामचंद्र दास बोले — बंगाल में बदल रहा माहौल, 'सोनार बांग्ला' का सपना होगा साकार

सारांश

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने कोलकाता में कहा कि बंगाल में माहौल बदल रहा है — केसरिया झंडे दिख रहे हैं, पलायन और धार्मिक उत्पीड़न के पुराने दर्द को पीछे छोड़ते हुए 'सोनार बांग्ला' का सपना फिर जी उठा है। कोलकाता में भव्य यज्ञ की भी योजना है।

मुख्य बातें

रामचंद्र दास ने 12 अगस्त 2026 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की धार्मिक और सामाजिक स्थिति पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि इस बार कोलकाता की सड़कों पर केसरिया झंडे दिखे — माहौल पहले से बेहतर लगा।
ममता बनर्जी सरकार पर हिंदुओं के कथित उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सुवेंदु अधिकारी की सेवा-भावना की सराहना की।
रोज़गार की तलाश में राज्य से पलायन को बड़ी समस्या बताया; मध्यम वर्ग के लिए काम की माँग की।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के जन्मदिवस पर कोलकाता में भव्य यज्ञ और धार्मिक आयोजन की योजना।
अयोध्या राम मंदिर ( 500 वर्षों बाद निर्मित) की तर्ज पर बंगाल में सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना का आह्वान।

कोलकाता में दो दिवसीय प्रवास के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने 12 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल की धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि कोलकाता की सड़कों पर इस बार उन्हें एक नया और बदला हुआ माहौल दिखा, जो उनके पिछले अनुभवों से भिन्न है।

बंगाल की भूमि और आध्यात्मिक विरासत

रामचंद्र दास ने मां काली की पवित्र भूमि को नमन करते हुए कहा कि बंगाल सदैव न्याय, भक्ति और ज्ञान की धरती रही है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी धरती के सपूत ने विश्वभर में भ्रमण कर हिंदू धर्म और भारत की गौरवशाली परंपराओं का परचम लहराया था। उनके अनुसार, बंगाल की यह आध्यात्मिक पहचान आज भी अक्षुण्ण है।

पहले और अब — बदलते अनुभव

रामचंद्र दास ने बताया कि पहले जब वे बंगाल आते थे तो उन्हें ऐसा अनुभव होता था, मानो वे अपने ही घर के उस हिस्से में आ गए हों जहाँ लोग परेशानियों और प्रताड़ना से घिरे हों। उन्होंने दावा किया कि हिंदू समुदाय को त्योहारों, उत्सवों और धार्मिक आयोजनों के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। किंतु इस बार कोलकाता की सड़कों पर उन्हें अलग दृश्य देखने को मिला — शहर के कई हिस्सों में केसरिया झंडे दिखाई दे रहे हैं, जिसे वे एक नए सामाजिक संदेश के रूप में देख रहे हैं।

पूर्व सरकार पर आरोप और सुवेंदु अधिकारी का संदर्भ

रामचंद्र दास ने ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौरान हिंदुओं ने कथित तौर पर यातनाएं झेली हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने ऐसी सरकार को हटाने और सुवेंदु अधिकारी को सत्ता में लाने का संकल्प लिया है। उनके अनुसार, सुवेंदु अधिकारी जिस लगन के साथ बंगाल की सेवा कर रहे हैं, उससे एक बार फिर 'सोनार बांग्ला' का सपना साकार होने की उम्मीद जागी है। गौरतलब है कि ये आरोप उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण पर आधारित हैं।

रोज़गार और पलायन का संकट

रामचंद्र दास ने रोज़गार और पलायन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से राज्य के लोगों की अनदेखी के कारण अनेक युवाओं को काम की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ा है। उनका मानना है कि राज्य के मध्यम वर्ग के लिए भी रोज़गार के अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने बंगाल को देश की मुख्यधारा से जोड़ने और सनातन संस्कृति एवं परंपराओं को मज़बूत करने की ज़रूरत पर बल दिया, ताकि बंगाल के हिंदू स्वतंत्र और खुशहाल तरीके से अपनी संस्कृति — जिसमें भगवती और मां काली की पूजा भी शामिल है — का पालन कर सकें।

कोलकाता में भव्य धार्मिक आयोजन की योजना

रामचंद्र दास ने आगामी धार्मिक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि वे प्रयागराज महाकुंभ, उज्जैन कुंभ, नासिक कुंभ और हरिद्वार कुंभ जैसे विशाल आयोजनों के साक्षी रहे हैं। अब कोलकाता की धरती पर भी एक भव्य यज्ञ के माध्यम से बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारी है। यह आयोजन उनके गुरुदेव जगद्गुरु रामभद्राचार्य के जन्मदिवस के अवसर पर होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में 500 वर्षों के बाद राम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी भावना के साथ बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित करने का संदेश दिया जाएगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों को एकत्रित किया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएँ तेज़ हो रही हैं। रामचंद्र दास के इस दौरे और उनके बयानों को धार्मिक-सांस्कृतिक जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और भी प्रासंगिक हो जाता है। पलायन और रोज़गार के मुद्दे वास्तविक हैं और आँकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं, किंतु इन्हें केवल एक समुदाय की पीड़ा के रूप में प्रस्तुत करना एक चुनावी फ्रेमिंग है जिसे पाठक को पहचानना चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस धार्मिक-राजनीतिक गठजोड़ की पड़ताल से बचती है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामचंद्र दास कौन हैं और बंगाल से उनका क्या संबंध है?
रामचंद्र दास जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी हैं और हिंदू धार्मिक जगत में एक प्रमुख आवाज़ हैं। वे समय-समय पर पश्चिम बंगाल का दौरा करते रहे हैं और राज्य की धार्मिक-सामाजिक स्थिति पर अपने विचार रखते हैं।
'सोनार बांग्ला' से क्या अभिप्राय है?
'सोनार बांग्ला' यानी 'सोने जैसा बंगाल' — यह एक सांस्कृतिक और राजनीतिक परिकल्पना है जिसमें बंगाल को समृद्ध, न्यायपूर्ण और सांस्कृतिक रूप से जीवंत राज्य के रूप में देखने की कामना की जाती है। रामचंद्र दास इसे सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना से जोड़ते हैं।
रामचंद्र दास ने कोलकाता में क्या बदलाव महसूस किया?
उन्होंने कहा कि इस बार कोलकाता की सड़कों पर केसरिया झंडे दिखे और माहौल पहले की तुलना में बेहतर लगा। उनके अनुसार यह एक नए सामाजिक बदलाव का संकेत है।
कोलकाता में किस धार्मिक आयोजन की योजना है?
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के जन्मदिवस के अवसर पर कोलकाता में एक भव्य यज्ञ और धार्मिक आयोजन की योजना है। इसमें बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों को एकत्रित किया जाएगा और बंगाल में धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना को मज़बूत करने का संदेश दिया जाएगा।
रामचंद्र दास ने बंगाल में पलायन के मुद्दे पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि लंबे समय से राज्य के लोगों की अनदेखी के कारण अनेक युवाओं को रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ा है। उन्होंने मध्यम वर्ग के लिए भी रोज़गार के अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले