सोनिया गांधी वोटर लिस्ट विवाद: राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई 4 जुलाई तक टली
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के विरुद्ध दाखिल रिवीजन पिटीशन पर 16 मई 2025 को निर्धारित सुनवाई टल गई। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया था। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 4 जुलाई निर्धारित की है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की, जबकि वर्ष 1980 की नई दिल्ली मतदाता सूची में उनका नाम पहले से दर्ज था। याचिकाकर्ता का सवाल है कि जब नागरिकता 1983 में मिली, तो 1980 की वोटर लिस्ट में नाम किस कानूनी आधार पर शामिल किया गया।
इसके अतिरिक्त याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1982 में सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची से हटाया गया था। शिकायतकर्ता ने यह जानना चाहा है कि नाम हटाने के पीछे कौन-सी प्रक्रिया या दस्तावेज़ अपनाए गए थे, और क्या नाम दर्ज कराने में किसी फर्जी दस्तावेज़ का उपयोग हुआ था।
ताज़ा सुनवाई में क्या हुआ
पिछली सुनवाई में अदालत ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने चुनाव आयोग से प्राप्त कुछ दस्तावेज़ों को न्यायालय के रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति माँगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग फिलहाल ट्रायल शुरू कराने की नहीं, बल्कि पुलिस जाँच कराने की है। उनका कहना था कि मामले में कई ऐसे प्रश्न हैं जिनकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।
कानूनी और राजनीतिक महत्व
यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब भारत में नागरिकता और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस चल रही है। गौरतलब है कि यह रिवीजन पिटीशन एक निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई है, और मामले की सुनवाई अभी प्रारंभिक चरण में है।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह की याचिकाएँ राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती हैं, जबकि याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी जाँच होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
अदालत अब 4 जुलाई को इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगी। उस तारीख को दोनों पक्षों की लिखित दलीलों और चुनाव आयोग के दस्तावेज़ों के आधार पर न्यायालय अगला निर्देश दे सकती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत पुलिस जाँच की माँग पर क्या रुख अपनाती है।