सपा नेता सोनम बगवाड़ी बोलीं — अखिलेश का बयान 9 सेकंड में काटकर पेश किया, माफी का सवाल नहीं
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) की उत्तराखंड प्रभारी सोनम बगवाड़ी ने 25 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में स्पष्ट किया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के 'घुसपैठिया' संबंधी बयान को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नौ सेकंड की क्लिप काटकर संदर्भ से अलग तरीके से प्रचारित किया है। उन्होंने दो-टूक कहा कि माफी मांगने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
बगवाड़ी का पूरा स्पष्टीकरण
बगवाड़ी के अनुसार, अखिलेश यादव का वह बयान वास्तव में उन प्रवासी मजदूरों के संदर्भ में था जो रोजी-रोटी की तलाश में उत्तर प्रदेश से दूसरे राज्यों में जाते हैं। उनका कहना था कि ऐसे मजदूरों को भी 'घुसपैठिया' कहकर संबोधित किया जाता है और उनके साथ अनुचित व्यवहार होता है।
उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय अध्यक्ष कहना चाह रहे थे कि इनको भी घुसपैठिया कहकर संबोधित किया जाता है। बार-बार भाजपा या मुख्यमंत्री घुसपैठिए जैसे शब्द कहते हैं।' बगवाड़ी ने यह भी जोड़ा कि अखिलेश ने तर्क के रूप में यह सवाल उठाया था कि यदि किसी व्यक्ति को उसके मूल राज्य के आधार पर घुसपैठिया कहा जा सकता है, तो क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री — जो स्वयं उत्तराखंड से आते हैं — को भी घुसपैठिया कहा जाएगा?
भाजपा पर 'घुसपैठिया' शब्द के दुरुपयोग का आरोप
बगवाड़ी ने आरोप लगाया कि BJP हर चुनाव से पहले 'घुसपैठिया' शब्द को हथियार की तरह इस्तेमाल करती है, जबकि इस शब्द की कोई स्पष्ट कानूनी या व्यावहारिक परिभाषा सामने नहीं रखी जाती। उन्होंने कहा कि पिछले 12-14 वर्षों में, जब से केंद्र में भाजपा सरकार है, कुल मिलाकर केवल 4,000 घुसपैठियों को ही देश से बाहर भेजा गया है — यह आँकड़ा खुद उनके दावों की पोल खोलता है।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब उत्तराखंड में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है और सपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन की स्थिति भी संवेदनशील दौर में है।
कांग्रेस नेता हरीश रावत की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने अखिलेश यादव के बयान पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इसमें गठबंधन का कोई सवाल नहीं है, लेकिन बयान में 'उत्तराखंड' शब्द आने से उत्तराखंडियों की भावनाएँ आहत हुई हैं।
रावत ने स्मरण कराया कि उत्तराखंड के लाखों बेटों ने उत्तर प्रदेश की राजकीय सेवाओं में योगदान दिया और करीब डेढ़-दो लाख लोगों ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि चुना। उन्होंने कहा, 'जहां कोई रह गया, वह वहां का नागरिक है। उसको घुसपैठिया कैसे कहा जा सकता है?' रावत ने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव स्वयं इस बयान को सुधारेंगे।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव के एक भाषण की कथित तौर पर नौ सेकंड की क्लिप वायरल हुई, जिसमें 'घुसपैठिया' शब्द के संदर्भ में उत्तराखंड का उल्लेख था। भाजपा ने इस क्लिप के आधार पर अखिलेश से सार्वजनिक माफी की मांग की। सपा ने इस माँग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूरा बयान सुनने पर संदर्भ स्वतः स्पष्ट हो जाता है।
आगे क्या होगा
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद उत्तराखंड में विपक्षी एकता के लिए एक परीक्षा बन गया है। हरीश रावत की टिप्पणी संकेत देती है कि कांग्रेस गठबंधन को खतरे में नहीं डालना चाहती, लेकिन उत्तराखंड की अस्मिता के सवाल पर चुप रहना भी उसके लिए मुश्किल है। अब सभी की नजरें इस पर हैं कि अखिलेश यादव स्वयं इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।