अखिलेश यादव का योगी सरकार पर प्रहार: ब्रिक्स समिट, गुंडा एक्ट और UP की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 13 सितंबर 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ब्रिक्स समिट 2026, गुंडा एक्ट के कथित दुरुपयोग और उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से देश की छवि नहीं बनती, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और राज्य सरकारों के सहयोग से ही 'विकसित भारत' का सपना साकार हो सकता है।
ब्रिक्स समिट पर अखिलेश का रुख
ब्रिक्स समिट 2026 पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, 'इस तरह के आयोजन हमें कई मोर्चों पर दूसरे देशों के साथ सहयोग करने का मौका देते हैं, लेकिन 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए राज्य सरकारों का भी योगदान और समर्थन जरूरी है।' उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार से सवाल पूछने पर कार्रवाई की जाती है, जो लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है।
अखिलेश ने कहा, 'अगर आप 'विकसित भारत' का सपना देख रहे हैं, तो लोकतंत्र में कम से कम सवाल पूछने की आज़ादी तो होनी ही चाहिए। सिर्फ आयोजन करने, कुछ चीज़ों को छिपाने या उन्हें दबाकर रखने से आपकी सही तस्वीर सामने नहीं आती।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत ब्रिक्स के मंच पर अपनी वैश्विक नेतृत्व की भूमिका को रेखांकित कर रहा है।
कृषि नीति पर सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने खेती-किसानी के मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, 'आप ब्रिक्स का हिस्सा हैं। खेती-किसानी में आपने कितनी तरक्की की है? हम कन्नौज से आते हैं और आप आलू का भी सही दाम नहीं दिला पा रहे हैं।' उन्होंने सरकार से 'रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर' के संदर्भ में किसानों को मिलने वाले उचित मूल्य और खाद की उपलब्धता पर स्पष्ट जवाब माँगा।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है, और किसानों द्वारा उचित मूल्य न मिलने की शिकायत पुरानी है। अखिलेश के इस हमले को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है।
गुंडा एक्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा गुंडा एक्ट के दुरुपयोग पर की गई टिप्पणी का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने कहा, 'जब तक ये मुख्यमंत्री और ये सरकार सत्ता में हैं, तब तक कानून का राज नहीं होगा। वे मनमानी कर रहे हैं और पुलिस को खुली छूट दे रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि जब खुद हाई कोर्ट यह कहे कि गुंडा एक्ट का गलत इस्तेमाल हुआ, तो इससे सरकार की कार्यशैली उजागर हो जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि राज्य में पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों और आम नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणी ने विपक्ष को एक न्यायिक आधार प्रदान किया है।
विपक्ष की रणनीति और आगे की राह
अखिलेश यादव की यह प्रेस वार्ता केवल एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक हमले का हिस्सा प्रतीत होती है जो राष्ट्रीय मुद्दों — जैसे ब्रिक्स — को स्थानीय शासन की विफलताओं से जोड़ती है। समाजवादी पार्टी (SP) के नेता ने केंद्र की उपलब्धियों को राज्य सरकार की कमियों के आईने में दिखाने की कोशिश की।
आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश में इन मुद्दों पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है। योगी सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।