सपा नेता उदयवीर सिंह का आरोप: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला BJP के इशारे पर काम करते हैं
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता उदयवीर सिंह ने मंगलवार, 9 जून को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निर्देशों पर काम करते हैं और उनमें संवैधानिक निष्पक्षता का अभाव है। यह बयान ऐसे समय आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कथित बागी सांसदों के एक समूह के लोकसभा स्पीकर से मिलने की खबरें सामने आई हैं।
उदयवीर सिंह के आरोप
उदयवीर सिंह ने कहा, 'वह भाजपा के स्पीकर हैं। स्पीकर को निष्पक्षता में कोई भरोसा नहीं है। सब जानते हैं कि वह मिले संकेतों के आधार पर काम करते हैं। इन्होंने संवैधानिक नियमों का भी पालन नहीं किया है।' सपा नेता ने यहाँ तक कहा कि 'इतिहास उन्हें सबसे खराब स्पीकरों में गिनेगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इसीलिए विपक्ष को स्पीकर से किसी निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद नहीं है।
तृणमूल में संसदीय फूट की आहट
तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि लोकसभा के लगभग 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का निर्णय लिया है और इस बारे में लोकसभा स्पीकर को सूचित कर दिया है। यह कदम पार्टी की संसदीय इकाई में पहली बड़ी दरार के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस के पास इस समय लोकसभा में 28 सांसद हैं। बशीरहाट से सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद एक सीट रिक्त है। पार्टी की स्थापना के बाद यह पहली बार है जब संसदीय स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हुई है।
पश्चिम बंगाल से शुरू हुई उथल-पुथल
यह संकट पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के अंदरूनी कलह से जुड़ा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के 80 में से कथित तौर पर 58 विधायकों ने वरिष्ठ नेता सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के पार्टी आलाकमान के फैसले को नकार दिया और इसके बजाय विधायक ऋतब्रत बनर्जी को इस पद के लिए चुना।
ममता की 'इंडिया' बैठक और बागियों का NDA रुख
विरोधाभासी रूप से, जिस दिन बागी सांसदों ने NDA को समर्थन देने की बात कही, उसी दिन पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी नई दिल्ली में 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में BJP-विरोधी रणनीति बनाने में जुटी थीं। यह घटनाक्रम तृणमूल की आंतरिक दरार को और उजागर करता है।
आगे क्या होगा
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि TMC के बागी सांसद औपचारिक रूप से NDA का दामन थाम लेते हैं, तो यह लोकसभा में विपक्षी संख्याबल को और कमज़ोर कर सकता है। लोकसभा स्पीकर की भूमिका और उनकी कथित निष्पक्षता पर विपक्ष का यह हमला आने वाले संसद सत्र में तीखी बहस का आधार बन सकता है।