नीट हर मोर्चे पर विफल, इसे खत्म करो — एमके स्टालिन का केंद्र पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 23 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए मांग की कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को तत्काल समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा जिन उद्देश्यों के लिए लागू की गई थी, उनमें से किसी पर भी खरी नहीं उतरी — न शैक्षणिक दबाव कम हुआ, न व्यावसायीकरण रुका, न गुणवत्ता सुधरी। यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर के छात्र नीट में कथित अनियमितताओं के विरोध में सड़कों पर हैं।
एक्स पर स्टालिन का आरोप: कोचिंग माफिया को मिला फायदा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए स्टालिन ने कहा कि नीट ने पढ़ाई का केंद्र सरकारी स्कूलों से हटाकर निजी कोचिंग संस्थानों की ओर कर दिया है। उनके अनुसार, इससे मेडिकल प्रवेश की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक व मानसिक बोझ बढ़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीट की खामियाँ केवल प्रक्रियागत नहीं, बल्कि इसकी पूरी व्यवस्था में गहरी जड़ें जमाए हुई हैं।
जंतर-मंतर आंदोलन और तमिलनाडु की पुरानी चेतावनी
स्टालिन ने एक दिन पहले नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने शुरुआत से ही आगाह किया था कि नीट बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और मेडिकल शिक्षा में असमान अवसरों को बढ़ावा देगा। गौरतलब है कि हाल के घटनाक्रमों ने राज्य की उन वर्षों पुरानी चिंताओं को सही साबित किया है।
स्टालिन ने केंद्र को सीधे शब्दों में चेतावनी दी: 'छात्रों का जारी विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार के लिए चेतावनी है। अब समय आ गया है कि केंद्र राज्यों पर भरोसा करे और नीट को समाप्त करे।'
सामाजिक न्याय पर DMK का रुख
DMK अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी ने शुरू से ही नीट का विरोध किया है, क्योंकि यह परीक्षा सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमज़ोर करती है। उनके अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के छात्र इस व्यवस्था में सबसे अधिक नुकसान उठाते हैं। स्टालिन ने कहा कि सामाजिक न्याय में अग्रणी भूमिका निभाने वाला तमिलनाडु आज भी नीट को पूरी तरह खत्म करने की माँग पर अडिग है।
केंद्र से नई व्यवस्था की माँग
स्टालिन ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह देशभर के छात्रों की बढ़ती चिंताओं को गंभीरता से ले और मेडिकल प्रवेश के लिए एक अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और समान अवसर सुनिश्चित करने वाली नई व्यवस्था लागू करे। उनका कहना था कि केवल प्रक्रियागत बदलावों से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा — नीट को पूरी तरह समाप्त करना ही एकमात्र विकल्प है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव और तेज होने की संभावना है।