सुभाषिनी अली ने महिला आरक्षण विधेयक पर भाजपा की मंशा को किया उजागर, महिलाओं से होगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में अस्वीकृत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर सीपीआई (एम) की नेता सुभाषिनी अली ने भाजपा की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाएं इसे कभी भी माफ नहीं करेंगी, क्योंकि भाजपा ने इस कानून के साथ बार-बार खिलवाड़ किया है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में सुभाषिनी अली ने कहा कि सीपीआई (एम) एक ऐसी पार्टी रही है जो जब भी यह विधेयक सदन में पेश होता, अपने सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी करती थी। किसी अन्य पार्टी ने ऐसा नहीं किया। सभी ने इसके विरोध में बहाने बनाए हैं। यही कारण है कि यह विधेयक वर्षों से लटका हुआ है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने धोखा दिया। इस विधेयक को 2023 में पास करने के बाद, उन्होंने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया, जिससे इसका वास्तविक प्रभाव टल गया। भाजपा सरकार ने फिर से धोखाधड़ी करने की कोशिश की, बिना चर्चा के परिसीमन को लागू करना चाहा। इससे कुछ राज्यों को नुकसान और कुछ को लाभ होता, लेकिन यह सब बिना राज्यों से संवाद किए करना चाहती थी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जनगणना के आधार पर परिसीमन नहीं होता, बल्कि इसके कई अन्य मापदंड होते हैं, जो दरकिनार किए गए हैं। भाजपा यह चाहती थी कि जहां सीटें बढ़ेंगी, वहां उनका बड़ा जनाधार है और जहां घटेंगी, वहां उनके वोट कम होंगे। इस प्रकार, वे धोखाधड़ी करके अपनी सत्ता को स्थायी बनाना चाहती थीं।
सुभाषिनी अली ने कहा कि विधेयक का पास न होना एक अच्छी बात थी, क्योंकि यह संविधान के खिलाफ था और इसके नकारात्मक परिणाम लोगों को लंबे समय तक झेलने पड़ते। विधेयक गिरने के बाद, 2023 में पास हुए विधेयक का नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसका मतलब है कि यह कानून है। यदि नोटिफिकेशन नहीं किया गया होता, तो विधेयक समाप्त हो जाता और उनका असली चेहरा लोगों के सामने आ जाता।
उन्होंने मांग की कि अब यह कानून बन चुका है, इसे तुरंत लागू किया जाए, बिना किसी अन्य शर्त के। किसी ने विधेयक का विरोध नहीं किया, बल्कि सवाल उठाया कि 2023 में जो विधेयक पारित हुआ, उसे लागू क्यों नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सच में 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है, तो देती क्यों नहीं? क्यों इसे नई शर्तों से जोड़ा जा रहा है?
उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन के बाद जब एससी/एसटी सीटें बढ़ती हैं, तो भाजपा का जो प्रस्ताव है, वह बिना जनगणना के परिसीमन लागू करने का है, जिससे उनकी सीटें भी नहीं बढ़ेंगी। यह महिला विरोधी और वर्ण व्यवस्था को बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जब देश में कहीं बलात्कार की घटना होती है, तो भाजपा बचाने के लिए आगे आती है या बलात्कारी उनकी पार्टी से जुड़े होते हैं। यह एक महिला विरोधी पार्टी और सरकार है, जो महिला हितैषी का मुखौटा पहनकर वोट ले रही है।
उन्होंने सदन के विशेष सत्र की समयावधि पर भी सवाल उठाया और कहा कि चुनाव के बीच उन्होंने संसद सत्र बुलाकर इतना बड़ा फैसला लागू करने की कोशिश की। इसका जवाब देश की महिलाएं देंगी। पूरी दुनिया में यही हो रहा है कि जो लोग महिलाओं का सबसे अधिक हनन करते हैं, वही लोग हितैषी बनने की कोशिश भी कर रहे हैं।
सुभाषिनी अली ने सीएम योगी पर भी सवाल उठाया और कहा कि उन्हें जवाब देना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बलात्कार क्यों होते हैं। वहां महिलाओं पर हिंसा का सबसे अधिक मामला है।