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जन्माष्टमी पर सुदर्शन पटनायक ने पुरी बीच पर बनाई 8 फीट ऊँची बाल गोपाल की रेत कलाकृति, 101 माखन हांडियों से सजाई

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जन्माष्टमी पर सुदर्शन पटनायक ने पुरी बीच पर बनाई 8 फीट ऊँची बाल गोपाल की रेत कलाकृति, 101 माखन हांडियों से सजाई

सारांश

जन्माष्टमी पर पुरी बीच एक बार फिर कला और आस्था का संगम बना — पद्म श्री सुदर्शन पटनायक ने 8 फीट ऊँची बाल गोपाल की रेत कलाकृति और 101 माखन हांडियों के साथ भक्ति का अनूठा संदेश दिया। यह रचना उनके छात्रों के सहयोग से तैयार हुई और बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया।

मुख्य बातें

पद्म श्री सुदर्शन पटनायक ने 4 सितंबर को पुरी बीच पर जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की रेत कलाकृति बनाई।
कलाकृति की ऊँचाई 8 फीट है और इसमें 'हैप्पी जन्माष्टमी' का संदेश उकेरा गया है।
कलाकृति के चारों ओर 101 माखन हांडियाँ सजाई गई हैं जो भक्ति का प्रतीक हैं।
यह कलाकृति सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों के सहयोग से तैयार हुई।
पटनायक 65 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचर प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

पद्म श्री से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ओडिशा के पुरी बीच पर बाल गोपाल की एक भव्य रेत कलाकृति तैयार की। 8 फीट ऊँची इस सैंड स्कल्पचर में 'हैप्पी जन्माष्टमी' का संदेश उकेरा गया है और भगवान कृष्ण के बाल रूप को दिव्य एवं शांत भाव में जीवंत किया गया है।

कलाकृति की विशेषताएँ

इस रेत कलाकृति में बाल गोपाल को उनकी प्रिय बाँसुरी, माखन की एक बड़ी हांडी और पास में विश्राम करती एक शांत गाय के साथ दर्शाया गया है — जो गोकुल में कृष्ण के चंचल बचपन की मनोरम स्मृतियाँ जगाती है। कलाकृति की विशिष्टता यह है कि इसके चारों ओर 101 छोटी माखन हांडियाँ सजाई गई हैं, जो भक्ति और बाल गोपाल की आनंदमयी चेतना का प्रतीक मानी जाती हैं।

छात्रों का सहयोग

यह कलाकृति सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों के सक्रिय सहयोग से तैयार की गई। पुरी बीच पर इस अनूठी रचना ने बड़ी संख्या में पर्यटकों और स्थानीय श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। यह आयोजन कला और आस्था के संगम का एक दुर्लभ उदाहरण बनकर उभरा।

पटनायक का संदेश

पटनायक ने इस अवसर पर कहा, "जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर रेत से भगवान कृष्ण की आकृति बनाई है। इसके साथ 101 माखन की हंडियों को भी दर्शाया है। भगवान श्रीकृष्ण सभी को शांति, खुशी, अच्छी सेहत और समृद्धि का आशीर्वाद दें। बाल गोपाल की दिव्य उपस्थिति हमारे जीवन को प्यार, करुणा, सकारात्मकता और सद्भाव से भर दे।"

सुदर्शन पटनायक की उपलब्धियाँ

पद्म श्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक अब तक 65 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचर चैंपियनशिप और फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे अपनी कला को केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं रखते — जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैश्विक शांति जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए भी रेत को अपना माध्यम बनाते हैं। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने में उनका योगदान अतुलनीय है।

गौरतलब है कि पटनायक प्रत्येक प्रमुख पर्व-त्योहार पर पुरी बीच को अपने संदेशों का कैनवास बनाते आए हैं, और इस बार जन्माष्टमी पर उनकी यह कृति भक्ति, कला और सामाजिक चेतना का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्वयं भगवान जगन्नाथ की नगरी है, में जन्माष्टमी पर कृष्ण की रेत कलाकृति का सांस्कृतिक महत्व दोहरा है। यह ध्यान देने योग्य है कि पटनायक की कलाकृतियाँ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सॉफ्ट पावर का काम करती हैं, जो किसी सरकारी अभियान से कहीं अधिक प्रभावी और प्रामाणिक हैं।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुदर्शन पटनायक ने जन्माष्टमी पर क्या बनाया?
सुदर्शन पटनायक ने 4 सितंबर को पुरी बीच पर 8 फीट ऊँची बाल गोपाल की रेत कलाकृति बनाई, जिसे 101 माखन हांडियों से सजाया गया। इसमें 'हैप्पी जन्माष्टमी' का संदेश भी उकेरा गया है।
सुदर्शन पटनायक कौन हैं?
सुदर्शन पटनायक ओडिशा के पुरी से ताल्लुक रखने वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट हैं, जिन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया है। वे 65 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचर चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
101 माखन हांडियों का क्या महत्व है?
101 माखन हांडियाँ भक्ति और बाल गोपाल की आनंदमयी भावना का प्रतीक हैं। यह संख्या हिंदू परंपरा में शुभ मानी जाती है और भगवान कृष्ण के माखन-प्रेम की लोककथाओं से जुड़ी है।
यह कलाकृति किसने मिलकर बनाई?
यह कलाकृति सुदर्शन पटनायक ने सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों के सहयोग से तैयार की। पुरी बीच पर इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु उमड़े।
सुदर्शन पटनायक अपनी कला का उपयोग किन मुद्दों के लिए करते हैं?
पटनायक अपनी रेत कलाकृतियों के ज़रिये जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैश्विक शांति जैसे सामाजिक व पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता फैलाते हैं। साथ ही वे भारत की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने के लिए भी सैंड आर्ट का उपयोग करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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