सुखपाल खैरा की माँग: पंजाब विधानसभा सत्र बढ़े, छह बिलों पर हो सार्थक बहस
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने 9 अगस्त 2026 को पंजाब सरकार और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से आग्रह किया कि विधानसभा सत्र को कम से कम कुछ और दिनों के लिए बढ़ाया जाए, ताकि सत्र के अंतिम कामकाजी दिन सोमवार को प्रस्तावित छह विधेयकों की विधिवत जाँच और गहन बहस हो सके। खैरा ने चेतावनी दी कि इन बिलों को जल्दबाजी में पास करना संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।
कौन से बिल हैं एजेंडे में
आधिकारिक विधायी कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार को सदन में छह विधेयक पेश किए जाने हैं। इनमें तीन अलग-अलग डिजिटल यूनिवर्सिटी बिल, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से जुड़ा विधेयक, आउटसोर्स कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्ट नियुक्ति से संबंधित बिल, तथा कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा विधेयक शामिल हैं। खैरा ने सवाल उठाया कि इन महत्वपूर्ण मामलों को पहले सदन में क्यों नहीं लाया गया, जिससे पर्याप्त चर्चा संभव हो पाती।
खैरा की मुख्य आपत्तियाँ
खैरा ने कहा, 'पंजाब पर दूरगामी असर डालने वाले छह नए कानूनों की ठीक से जाँच, उन पर बहस और उन्हें पास कैसे किया जा सकता है, वो भी विधानसभा सत्र के आखिरी कामकाजी दिन? यह सार्थक संसदीय लोकतंत्र नहीं है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को विधायकों को बिलों का अध्ययन करने, हितधारकों से परामर्श लेने और संशोधन पेश करने का पर्याप्त समय देना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'विधानसभा कैबिनेट के लिए रबर स्टैम्प नहीं है। विधायिका का उद्देश्य कानून की हर धारा की जाँच करना, उसके गुण-दोष पर बहस करना और पंजाब के लोगों के हितों की रक्षा करना है।'
AAP सरकार पर निशाना
आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को आड़े हाथों लेते हुए खैरा ने कहा कि कानून कोई अस्थायी राजनीतिक घोषणाएँ नहीं होतीं। उनके अनुसार, 'एक बार लागू होने के बाद, वे आने वाले वर्षों तक पंजाब के संस्थानों, अर्थव्यवस्था, कर्मचारियों, छात्रों, व्यवसायों और नागरिकों को प्रभावित करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब पहले ही खराब तरीके से सोचे-समझे और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के कारण भारी नुकसान उठा चुका है।
विधानसभा अध्यक्ष से अपील
खैरा ने विधानसभा अध्यक्ष संधवां से अपील की कि वे विधायिका की गरिमा और सर्वोच्चता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि सरकार के विधायी एजेंडे को पूरा करने की जल्दी में महत्वपूर्ण बिलों को बिना पर्याप्त चर्चा के पारित नहीं होने देना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही AAP सरकार की विधायी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाता रहा है।
आगे की स्थिति
यदि सत्र नहीं बढ़ाया जाता, तो ये छह विधेयक सोमवार को ही पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। खैरा ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में मानती है कि ये बिल पंजाब के हित में हैं, तो उसे सत्र बढ़ाने और पूर्ण बहस की अनुमति देने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।