9 अगस्त 2026
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अमेरिकी टैरिफ पर BJD सांसद सुलता देव का केंद्र पर निशाना: 'गले मिलने से नहीं बनती विदेश नीति'

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अमेरिकी टैरिफ पर BJD सांसद सुलता देव का केंद्र पर निशाना: 'गले मिलने से नहीं बनती विदेश नीति'

सारांश

बीजेडी सांसद सुलता देव ने एक साथ पाँच मुद्दों पर केंद्र को घेरा — अमेरिकी टैरिफ, ई20 पेट्रोल, महिला आरक्षण, छात्र आंदोलन और एफसीआरए बिल। उनका सबसे तीखा बाण विदेश नीति पर था: मोदी-ट्रंप की व्यक्तिगत गर्मजोशी भारतीय किसानों और व्यापारियों के लिए टैरिफ राहत में नहीं बदली।

मुख्य बातें

BJD सांसद सुलता देव ने 8 अगस्त को केंद्र सरकार की विदेश नीति, ई20 पेट्रोल, महिला आरक्षण, छात्र आंदोलन और एफसीआरए बिल पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मोदी-ट्रंप की व्यक्तिगत मुलाकातें अमेरिकी टैरिफ से भारतीय उत्पादों को राहत दिलाने में नाकाफी रही हैं।
ई20 पेट्रोल पर उन्होंने माँग की कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के अनुरूप वाहन तकनीक भी तैयार हो; पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से स्पष्ट जवाब माँगा।
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के बावजूद 2024 चुनाव में महिलाओं को 33% टिकट न मिलने पर सवाल उठाया; परिसीमन से आरक्षण जोड़ने पर बीजेडी के विरोध की चेतावनी दी।
एफसीआरए संशोधन विधेयक पर विधेयक के प्रावधान देखे बिना अंतिम राय देने से इनकार किया।

बीजू जनता दल (BJD) की सांसद सुलता देव ने 8 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर बार-बार टैरिफ लगाना भारत के किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत गर्मजोशी किसी भी देश के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की गारंटी नहीं हो सकती।

अमेरिकी टैरिफ और विदेश नीति पर सवाल

सुलता देव ने कहा कि किसी भी देश के साथ भारत के संबंध इस आधार पर तय होने चाहिए कि उससे भारत को कितना व्यावहारिक लाभ मिल रहा है और संकट के समय वह देश भारत के साथ कितना खड़ा होता है। उनके अनुसार, भारत अमेरिकी निवेश और सामान को अपने बाज़ार में स्थान देता है, लेकिन जब भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाज़ार में पहुँचते हैं तो उन पर ऊँचा टैरिफ लगाया जाता है — यह असंतुलन चिंताजनक है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ लगाना जारी रखता है, तो भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए जवाबी कदमों पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, तेल आयात और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के संदर्भ में भी भारत को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए।

ई20 पेट्रोल और वाहन तकनीक पर चिंता

सुलता देव ने ई20 पेट्रोल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख से सहमति जताते हुए कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल की बढ़ती ब्लेंडिंग के अनुरूप वाहनों के इंजन और तकनीक भी तैयार होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लोग बड़ी मुश्किल से वाहन खरीदते हैं, और कई लोगों के लिए वाहन की ईएमआई पूरी होने तक उसकी आयु भी काफी बढ़ चुकी होती है।

उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से इस विषय पर स्पष्ट जवाब देने की माँग की और सवाल किया कि ई20 पेट्रोल पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से अधिक प्रतिक्रिया क्यों आ रही है, जबकि यह विषय सीधे पेट्रोलियम मंत्रालय से संबंधित है।

महिला आरक्षण: परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति

बीजेडी सांसद ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब संसद में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया गया था तो इसे तत्काल लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि महिला आरक्षण कानून पारित हो चुका था, तो 2024 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर टिकट क्यों नहीं दिए गए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा जाता है और इससे क्षेत्रीय दलों या राज्यों की मौजूदा सीटों पर असर पड़ता है, तो बीजेडी इसका विरोध करेगी। ओडिशा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि परिसीमन से राज्य के प्रतिनिधित्व और सीटों की संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

'छात्रों की गूंज' और जंतर-मंतर प्रदर्शन

सुलता देव ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आंदोलनों में बड़ी संख्या में अभिभावक, दिव्यांग व्यक्ति और आम नागरिक भी छात्रों के समर्थन में सामने आए। उनके अनुसार, छात्र आंदोलन का मुद्दा अब एक व्यापक सामाजिक मुद्दा बन चुका है।

एफसीआरए संशोधन विधेयक पर सतर्क रुख

एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक पर सुलता देव ने कहा कि विधेयक के प्रावधान और क्लॉज़ सामने आने से पहले कोई अंतिम राय देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एफसीआरए के तहत कई एनजीओ विदेशी अनुदान प्राप्त करते हैं और उनमें से कई समाज के लिए सकारात्मक काम करती हैं — नए विधेयक में इन नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं, यह देखने के बाद ही अपना स्पष्ट रुख तय किया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दल सरकार की नीतियों पर सक्रिय रूप से सवाल उठा रहे हैं। सुलता देव की टिप्पणियाँ क्षेत्रीय दलों की उस बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती हैं, जिसमें वे विदेश नीति से लेकर घरेलू आर्थिक मुद्दों तक केंद्र से जवाबदेही माँग रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक ठोस नीतिगत प्रश्न है — क्या भारत की 'व्यक्तित्व-केंद्रित कूटनीति' व्यापार वार्ताओं में ठोस परिणाम दे पा रही है? अमेरिका के साथ व्यापार घाटे और टैरिफ असंतुलन के आँकड़े इस चिंता को वैध बनाते हैं। ई20 मुद्दे पर उनकी बात तकनीकी रूप से भी सही है — पुराने वाहनों पर उच्च इथेनॉल मिश्रण के प्रभाव को लेकर ऑटो उद्योग में भी असहमति रही है। महिला आरक्षण पर परिसीमन की शर्त को लेकर उनकी आपत्ति दक्षिण और पूर्वी राज्यों की उस व्यापक चिंता का हिस्सा है जो 2026 की परिसीमन प्रक्रिया को लेकर गहरी होती जा रही है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुलता देव ने अमेरिकी टैरिफ पर केंद्र सरकार की क्या आलोचना की?
सुलता देव ने कहा कि भारत अमेरिकी निवेश और सामान को अपने बाज़ार में जगह देता है, लेकिन भारतीय उत्पादों पर अमेरिका ऊँचा टैरिफ लगाता है — यह असंतुलन भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि मोदी-ट्रंप की व्यक्तिगत गर्मजोशी इस समस्या का हल नहीं है और भारत को जवाबी कदमों पर विचार करना चाहिए।
ई20 पेट्रोल पर BJD सांसद की क्या माँग है?
सुलता देव ने माँग की कि इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने से पहले वाहनों के इंजन और तकनीक उसके अनुरूप तैयार होने चाहिए। उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से इस विषय पर स्पष्ट जवाब माँगा और कहा कि मध्यम वर्ग के पुराने वाहन मालिकों की चिंताओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण पर बीजेडी का क्या रुख है?
बीजेडी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध करती है। सुलता देव ने कहा कि यदि परिसीमन से ओडिशा जैसे राज्यों की सीटों पर असर पड़ता है तो बीजेडी इसका विरोध करेगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित होने के बावजूद 2024 चुनाव में महिलाओं को 33% टिकट क्यों नहीं दिए गए।
एफसीआरए संशोधन विधेयक पर सुलता देव का क्या कहना है?
सुलता देव ने कहा कि विधेयक के प्रावधान और क्लॉज़ देखे बिना कोई अंतिम राय देना उचित नहीं होगा। उन्होंने माना कि एफसीआरए के तहत कई एनजीओ समाज के लिए सकारात्मक काम करती हैं और नए बदलावों का मूल्यांकन विधेयक की पूरी जानकारी मिलने के बाद ही किया जाएगा।
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम और जंतर-मंतर प्रदर्शन पर उनका क्या नज़रिया है?
सुलता देव ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों में अभिभावक, दिव्यांग व्यक्ति और आम नागरिक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जो दर्शाता है कि यह मुद्दा अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा बल्कि व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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