रक्षाबंधन पर सुप्रिया सुले का दिवंगत भाई अजित पवार को भावुक संदेश: 'आपकी कमी का खालीपन कभी नहीं भरेगा'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर अपने दिवंगत भाई और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई एक पोस्ट में कहा कि भाई के जाने के बाद जो खालीपन आया है, उसे जीवन में कभी नहीं भरा जा सकता।
एक्स पर भावुक पोस्ट
सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अजित पवार के साथ बचपन की यादें साझा करते हुए लिखा कि उनके अचानक चले जाने को स्वीकार कर पाना आज भी कठिन है। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, 'प्यारे दादा, आज रक्षाबंधन है लेकिन इस बार आप हमारे साथ नहीं हैं और यह एहसास मेरे दिल को बहुत बेचैन कर रहा है। सात महीने पहले की वह भयानक सुबह और आपका अचानक चले जाना, आज भी मुझे इस बात पर यकीन नहीं होता।'
यह पोस्ट उस समय आई जब पूरा देश भाई-बहन के पवित्र बंधन का उत्सव मना रहा था और सुले का यह संदेश लाखों लोगों के दिलों को छू गया।
बचपन की यादों का जिक्र
सुले ने याद किया कि किस तरह दोनों भाई-बहन साथ बड़े हुए — उनकी आपसी नोकझोंक, एक-दूसरे के लिए गहरा प्यार और गर्व के साझा पल। उन्होंने लिखा, 'बचपन से साथ बड़े होना, हमारी लड़ाइयां, एक-दूसरे के लिए प्यार और एक-दूसरे पर गर्व — यही हमारे रिश्ते की नींव थी। अब भी ऐसा लगता है कि आप अचानक कहीं से आ जाएंगे, मुझे राखी बंधवाएंगे, अपनी बहनों के साथ बातें करेंगे और हंसेंगे-बोलेंगे और फिर से परिवार का हिस्सा बन जाएंगे।'
गौरतलब है कि अजित पवार का निधन लगभग सात महीने पहले हुआ था और यह पहला रक्षाबंधन था जब सुले उनके बिना यह त्योहार मना रही थीं।
अजित पवार की कमी और अधूरापन
सुले ने अपनी पोस्ट में कहा, 'आपकी कमी से जो खालीपन आया है, उसे कभी भरा नहीं जा सकता। आप जहां भी हों, आपका प्यार और आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ बना रहे।' उनके इस संदेश में वह पीड़ा स्पष्ट थी जो एक बहन को अपने भाई की अनुपस्थिति में महसूस होती है।
यह ऐसे समय में आया है जब सुले राजनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय हैं और अपने पिता शरदचंद्र पवार के नेतृत्व में पार्टी को मज़बूत करने में जुटी हैं।
रक्षाबंधन का महत्व
रक्षाबंधन हिंदू पंचांग के श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला पर्व है, जो भाई-बहन के स्नेह और सुरक्षा के बंधन का प्रतीक है। 'रक्षा' अर्थात सुरक्षा और 'बंधन' अर्थात संबंध — इन दो शब्दों से बना यह पर्व सगे भाई-बहनों के साथ-साथ चचेरे-ममेरे भाई-बहनों और परिवार के अन्य करीबी रिश्तों में भी उतनी ही आत्मीयता से मनाया जाता है।
सुले की यह भावुक पोस्ट इस बात की याद दिलाती है कि त्योहार केवल उत्सव नहीं होते — वे उन लोगों की याद भी दिलाते हैं जो अब हमारे साथ नहीं हैं, और जिनकी अनुपस्थिति हर खुशी के मौके पर और गहरी महसूस होती है।