स्वदेशी दीपावली: संदीप बंसल की अपील — मिट्टी के दीये, भारत निर्मित उत्पाद और मंगलमान अभियान
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने 6 नवंबर 2026 को लखनऊ में देशवासियों से आह्वान किया कि इस बार दीपावली को 'स्वदेशी दीपावली' के रूप में मनाएं — मिट्टी के दीये, मिट्टी की मूर्तियाँ और भारत में बनी लाइटों को प्राथमिकता देते हुए। साथ ही उन्होंने पूजित मूर्तियों के सम्मानजनक विसर्जन के लिए चलाए जा रहे 'मंगलमान अभियान' को इस पहल से जोड़ने की जानकारी दी।
स्वदेशी दीपावली का संदेश
बंसल ने कहा कि दीपावली भारत का सबसे बड़ा त्योहार है और इसे मनाते समय भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, घरों में सजावट के लिए लगाई जाने वाली लाइटें भी स्वदेशी होनी चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि त्योहार पर इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं ऐसी हों जिनसे यह अनुभव हो कि हम अपना भारतीय पर्व मना रहे हैं। यह अपील ऐसे समय में आई है जब चीनी सजावटी सामान और लाइटें घरेलू बाज़ार में बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं।
मंगलमान अभियान और इसका उद्देश्य
बंसल ने बताया कि मंगलमान अभियान का मूल उद्देश्य समाज में सकारात्मकता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को बढ़ावा देना है। अभियान का संदेश देते हुए उन्होंने कहा, 'हर दिन मंगल हो, हर मंगल बड़ा मंगल हो और बड़े मंगल से राष्ट्र मंगल हो।' अभियान पहले से ही बड़े मंगल पर आयोजित होने वाले भंडारों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। अब इसी सोच का विस्तार 'स्वदेशी दीपावली' पहल के रूप में किया गया है।
पूजित मूर्तियों के विसर्जन की समस्या और समाधान
बंसल ने एक गंभीर सामाजिक समस्या की ओर ध्यान दिलाया — घरों में पूरे साल पूजी जाने वाली देवी-देवताओं की मूर्तियों को अक्सर त्योहार के बाद सड़क किनारे, कूड़े में या नदियों में फेंक दिया जाता है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है और पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। इस समस्या के समाधान के लिए मंगलमान अभियान ने एक विशेष ऐप तैयार किया है जिसका नाम मंगलमान डॉट इन है। इस ऐप के ज़रिए लखनऊ सहित देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले लोग नज़दीकी मूर्ति एकत्रीकरण केंद्रों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
एकत्रीकरण केंद्र और नगर निगम का सहयोग
बंसल ने बताया कि लोग इन केंद्रों पर अपनी पूजित मूर्तियाँ जमा कर सकते हैं और एकत्रित मूर्तियों के सम्मानजनक विसर्जन की जिम्मेदारी मंगलमान अभियान उठाएगा। इसमें नगर निगम का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम का सहयोग उपलब्ध न होने की स्थिति में भी अभियान अपने स्तर पर यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि ये एकत्रीकरण केंद्र केवल दीपावली तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे 12 महीने सक्रिय रहेंगे।
लखनऊ बने देश का रोल मॉडल
बंसल ने कहा कि लखनऊ इस पहल के ज़रिए पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि अधिक से अधिक नागरिक अभियान से जुड़ें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि पूजित मूर्तियों को नदियों में न डालें और न ही सड़कों पर फेंकें, क्योंकि इससे नदियों का प्रदूषण बढ़ता है और बाद में सफाई की जिम्मेदारी भी समाज पर ही आती है। आने वाले दिनों में अभियान की व्यापकता और नागरिकों की भागीदारी ही इस पहल की सफलता का पैमाना होगी।