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स्वरा भास्कर की 'जौहर' टिप्पणी पर अयोध्या के संत समाज में तीव्र आक्रोश, FIR की माँग

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स्वरा भास्कर की 'जौहर' टिप्पणी पर अयोध्या के संत समाज में तीव्र आक्रोश, FIR की माँग

सारांश

स्वरा भास्कर ने 'पद्मावत' के जौहर दृश्य को 'कायरता' बताया — और अयोध्या के संत समाज ने इसे सनातन परंपरा पर सीधा हमला माना। महंतों ने FIR की माँग की और ऐतिहासिक वीरांगनाओं के बलिदान का हवाला देकर बयान को 'निंदनीय' करार दिया।

मुख्य बातें

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने फिल्म 'पद्मावत' के 'जौहर' दृश्य को 'समस्याग्रस्त' और 'कायरता' बताया।
अयोध्या के संत समाज ने बयान को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' करार देते हुए तीव्र विरोध जताया।
योगानंद गिरि महाराज ने स्वरा भास्कर के विरुद्ध FIR दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की माँग की।
आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने 1528 की राजकुमारी जयराज कुंवारी और 10 हज़ार सैनिकों के युद्ध का ऐतिहासिक संदर्भ दिया।
स्वरा भास्कर की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर द्वारा 2018 में रिलीज़ फिल्म 'पद्मावत' के 'जौहर' दृश्य को 'समस्याग्रस्त' और 'कायरता' बताए जाने के बाद अयोध्या के संत समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है। 4 सितंबर को सामने आई इस प्रतिक्रिया में संतों ने स्वरा भास्कर के बयान को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' करार देते हुए उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की है।

संत समाज की प्रतिक्रिया

आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने कहा, 'जिनका कोई चरित्र, आचरण या मर्यादा नहीं है, उनके बारे में क्या कहा जाए? जो लोग महिलाओं की गरिमा या भारतीय नारीत्व के मूल्यों को नहीं समझते, वे जौहर को नहीं समझ सकते।' उन्होंने यह भी कहा कि जिन वीरांगनाओं ने तलवारें उठाईं और अपने प्राण न्योछावर किए, उनके बलिदान को समझने की क्षमता ऐसे लोगों में नहीं है।

वरुण दास जी महाराज ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 1528 में जब बाबर के सेनापति मीर बाकी ने रामजन्मभूमि का विध्वंस किया, तब हस्वर (हंसवर) की राजकुमारी जयराज कुंवारी ने 10 हज़ार सैनिकों के साथ युद्ध किया और महिला सेना का नेतृत्व करते हुए मीर बाकी के सीने में खंजर भोंका था। उनके अनुसार, उस काल के आक्रमणकारियों की क्रूरता से भली-भाँति परिचित होने के कारण रानी ने अपना शरीर अग्नि को समर्पित कर दिया था।

महंत राजू दास का बयान

महंत राजू दास जी महाराज ने कहा, 'जौहर हमारी संस्कृति, महिलाओं की गरिमा और हमारी माताओं-बहनों की पवित्रता का प्रतीक है। यह उन महिलाओं के आत्मचिंतन और बलिदान को दर्शाता है, जो दुर्गा, लक्ष्मी और काली के रूप में जन्म लेती हैं।' उन्होंने चेतावनी दी कि सनातन धर्म के विरुद्ध बार-बार की जाने वाली अपमानजनक टिप्पणियाँ बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और ऐसे लोगों को समाज में स्थान नहीं मिलना चाहिए।

अन्य संतों की राय

साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि उन वीर महिलाओं की तपस्या और बलिदान पर सवाल उठाना 'सूरज पर थूकने जैसा' है। उन्होंने स्वरा भास्कर के बयान को समाज के प्रति 'पिछड़ी सोच' का परिचायक बताया।

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अष्टकौशल महंत डॉ. योगानंद गिरि महाराज ने कहा, 'इंसान की सोच और उसके शब्द ही उसकी पहचान बताते हैं।' उन्होंने स्वरा भास्कर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर तत्काल कार्रवाई की माँग की।

जौहर परंपरा का ऐतिहासिक संदर्भ

डॉ. योगानंद गिरि महाराज ने स्पष्ट किया कि सनातन परंपरा में जौहर और सती प्रथा का उद्भव उस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में हुआ, जब आक्रमणकारियों की क्रूरता की कोई सीमा नहीं थी। उनके अनुसार, पतिव्रत धर्म को धारण करने वाली महिलाओं के लिए यह परंपरा सम्मान और आत्मरक्षा का एक रूप थी।

आगे क्या

संत समाज के इस आक्रोश के बाद मामले में राजनीतिक हलचल भी तेज़ हो गई है। कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। स्वरा भास्कर की ओर से अभी तक इस प्रतिक्रिया पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बार-बार दोहराई जाने वाली सांस्कृतिक खाई को उजागर करती हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बहस को महज़ 'बॉलीवुड बनाम धर्म' तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि ऐतिहासिक परंपराओं की आलोचना और उनका सम्मान — दोनों एक साथ कैसे संभव हों। FIR की माँग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच की उस रेखा को चुनौती देती है, जिस पर भारतीय समाज अभी भी सहमति नहीं बना पाया है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वरा भास्कर ने 'जौहर' के बारे में क्या कहा था?
स्वरा भास्कर ने एक हालिया इवेंट में 2018 में रिलीज़ फिल्म 'पद्मावत' में दिखाए गए 'जौहर' के दृश्य को 'समस्याग्रस्त' और 'कायरता' बताया था। इसी बयान पर अयोध्या के संत समाज में तीव्र विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।
अयोध्या के संत समाज ने क्या माँग की है?
संत समाज ने स्वरा भास्कर के विरुद्ध FIR दर्ज करने और तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग की है। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के महंत डॉ. योगानंद गिरि महाराज ने कहा कि ऐसी टिप्पणी करने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए।
जौहर परंपरा क्या है और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है?
जौहर मध्यकालीन भारत में राजपूत महिलाओं द्वारा शत्रु के हाथों अपमान से बचने के लिए सामूहिक अग्नि-समर्पण की परंपरा थी। संतों के अनुसार, यह उस काल की क्रूर परिस्थितियों में महिलाओं की गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा का एक रूप था।
क्या स्वरा भास्कर ने संतों की प्रतिक्रिया पर कोई जवाब दिया है?
4 सितंबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वरा भास्कर की ओर से अयोध्या के संत समाज की प्रतिक्रिया पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
'पद्मावत' फिल्म का जौहर दृश्य पहले भी विवादों में रहा है?
हाँ, 2018 में रिलीज़ फिल्म 'पद्मावत' अपनी रिलीज़ से पहले ही जौहर और राजपूत चित्रण को लेकर व्यापक विवाद का केंद्र रही थी। कई राजपूत संगठनों ने उस समय भी फिल्म के कुछ दृश्यों पर आपत्ति जताई थी।
राष्ट्र प्रेस
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