तमिलनाडु में बकाया फसल ऋण वसूली पर रोक जारी, सीएम विजय ने किसानों को शिकायत का रास्ता बताया
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 3 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर स्पष्ट किया कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को दिए गए बकाया फसल ऋण की वसूली पर अस्थायी रोक पूर्ववत लागू है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में यह स्पष्टीकरण उन शिकायतों के बाद जारी किया गया, जिनमें किसानों ने बताया कि उन्हें फोन कर बकाया ऋण चुकाने के लिए कहा जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
सरकार के अनुसार, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार ने एक सर्कुलर के ज़रिए क्षेत्रीय रजिस्ट्रारों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशकों को इस रोक की जानकारी पहले ही दी जा चुकी है। इसके बावजूद कुछ समितियों द्वारा किसानों से ऋण वसूली के प्रयास की शिकायतें मिलीं, जिसके बाद सरकार ने यह पुनः अनुस्मारक जारी किया।
सभी सहकारी समितियों को इस सर्कुलर का अनिवार्य रूप से पालन करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि ऋण वसूली पर लगाई गई रोक का उल्लंघन न हो।
किसानों के लिए शिकायत प्रक्रिया
यदि कोई किसान किसी सहकारी समिति द्वारा फोन या किसी अन्य माध्यम से बकाया फसल ऋण चुकाने के लिए संपर्क किया जाता है, तो वह सहकारिता विभाग के आधिकारिक शिकायत निवारण व्हाट्सऐप नंबर 9884000845 पर शिकायत दर्ज करा सकता है।
सरकार ने कहा है कि शिकायत दर्ज कराते समय संबंधित सहकारी समिति, घटना की तिथि और संपर्क के माध्यम की जानकारी देना आवश्यक है, ताकि मामले की पहचान कर उचित कार्रवाई की जा सके।
सरकार की निगरानी और जवाबदेही
तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस बात की सक्रिय निगरानी कर रही है कि सहकारी समितियाँ ऋण वसूली रोक का पालन कर रही हैं या नहीं। गौरतलब है कि यह रोक केवल सहकारी समितियों के माध्यम से दिए गए बकाया फसल ऋण पर लागू है।
यह ऐसे समय में आया है जब कृषि क्षेत्र में ऋण बोझ को लेकर देशभर में चर्चा जारी है और किसान संगठन ऋण माफी की माँग करते रहे हैं। तमिलनाडु सरकार का यह कदम किसानों को तत्काल राहत देने की दिशा में एक प्रशासनिक उपाय माना जा रहा है।
आम जनता पर असर
इस रोक का सीधा लाभ उन किसानों को मिलेगा जिन्होंने सहकारी समितियों से फसल ऋण लिया है और जो वर्तमान में बकाया चुकाने में असमर्थ हैं। ऋण वसूली पर रोक से उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का अवसर मिलेगा।
आलोचकों का कहना है कि ऐसी रोक दीर्घकालिक समाधान नहीं है और सहकारी समितियों की वित्तीय सेहत पर इसका असर पड़ सकता है। हालाँकि सरकार ने इस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है।
क्या होगा आगे
सरकार ने यह नहीं बताया कि यह अस्थायी रोक कब तक जारी रहेगी। किसान संगठनों की नज़र इस पर बनी रहेगी कि क्या यह रोक स्थायी राहत में तब्दील होती है या सीमित समय के बाद वसूली फिर शुरू होती है।