1984 दंगों के दोषियों संग खड़े रहे केजरीवाल, अब सवाल पूछ रहे हैं: तरुण चुघ का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद तरुण चुघ ने 1 सितंबर को अमृतसर में आम आदमी पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद कड़ा पलटवार किया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर 1984 के सिख-विरोधी दंगों के आरोपियों के साथ राजनीतिक गठजोड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि जो दल उन नेताओं के साथ सत्ता में बैठा, वह आज BJP से सवाल पूछने की स्थिति में नहीं है। चुघ ने GDP वृद्धि दर और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के मुद्दों पर भी कांग्रेस को घेरा।
केजरीवाल पर 1984 का सवाल
भाजपा सांसद तरुण चुघ ने एक तस्वीर दिखाते हुए कहा, केजरीवाल ने 2013 में उन कांग्रेस नेताओं के साथ सरकार बनाई जो 1984 के सिख नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराए जाते हैं। उन्होंने कहा, 'वही कांग्रेस जिसने सिखों के गले में टायर डालकर उन्हें जलाया, 52 शहरों को श्मशान बना दिया — उसके साथ केजरीवाल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन किया।' चुघ ने यह भी पूछा कि केजरीवाल के दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद 1984 के दंगों की फाइलें क्यों नहीं खोली गईं।
SIT और न्याय का दावा
चुघ ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद 1984 के सिख दंगों की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) गठित किया गया। उनके अनुसार इसके बाद दोषियों को सजा मिलनी शुरू हुई। गौरतलब है कि इस मामले में सज्जन कुमार को न्यायालय ने दोषी ठहराया था और वे आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
GDP वृद्धि पर BJP का दावा
भारत की 7.8% GDP वृद्धि दर पर चुघ ने कहा कि यह आँकड़ा देश की बढ़ती आर्थिक ताकत का प्रमाण है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष की 6.9% की वृद्धि दर को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि इन आँकड़ों के बावजूद रोज़गार सृजन और आय असमानता पर सवाल बने हुए हैं।
SC/ST मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा
चुघ ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खिलाफ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि इससे कांग्रेस का 'दलित-विरोधी' चेहरा उजागर हुआ है। उन्होंने तरन तारन चुनाव में पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह के बारे में की गई कथित जातिगत टिप्पणी का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी खुद पार्टी के भीतर SC कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव का आरोप लगा चुके हैं।
आगे क्या
यह विवाद पंजाब की राजनीति में 1984 के दंगों के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है, जो आगामी चुनावी चक्र में BJP और AAP-कांग्रेस गठबंधन के बीच एक प्रमुख राजनीतिक हथियार बनता दिख रहा है। दोनों पक्षों की ओर से बयानबाज़ी तेज़ होने की संभावना है।