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तेजस्वी यादव ने 'रिशु श्री महाघोटाले' पर NDA सरकार से पूछे 20 सवाल, IAS गिरफ्तारी न होने पर उठाए सवाल

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तेजस्वी यादव ने 'रिशु श्री महाघोटाले' पर NDA सरकार से पूछे 20 सवाल, IAS गिरफ्तारी न होने पर उठाए सवाल

सारांश

तेजस्वी यादव ने 'रिशु श्री महाघोटाले' पर बिहार NDA सरकार से 20 तीखे सवाल दागे — 2 IAS की गिरफ्तारी क्यों नहीं, 99 संपत्तियाँ कहाँ से आईं, और FIR में देरी क्यों हुई। विपक्ष का आरोप है कि जांच चुनिंदा है और बड़े नाम बचाए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

तेजस्वी प्रसाद यादव ने 29 जून को कथित 'रिशु श्री महाघोटाले' पर बिहार NDA सरकार से 20 सवाल पूछे।
आरोप: जांच एजेंसियों के चैट से संकेत मिलता है कि आरोपी को वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था।
छापेमारी में आरोपी के पास 99 संपत्तियों के दस्तावेज, करोड़ों की नकदी और आभूषण मिले।
टेंडर के बदले 2 से 3.5% कमीशन लिए जाने का दावा; दो IAS निलंबित, पर गिरफ्तारी नहीं।
तेजस्वी ने गुजरात की कंपनियों की भूमिका और FIR में देरी की निष्पक्ष जांच की मांग की।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने 29 जून को कथित 'रिशु श्री महाघोटाले' को लेकर राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर तीखा हमला बोला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने सरकार से 20 सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में बड़े अधिकारियों और सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्य आरोप और सवाल

यादव ने सोमवार को जारी बयान में सवाल उठाया कि एक मामूली ठेकेदार कई सरकारी विभागों के टेंडरों को वर्षों तक अपनी मर्जी से कैसे प्रभावित करता रहा और इस दौरान सरकारी निगरानी तंत्र क्या करता रहा। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियों के सामने आए चैट सही हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि आरोपी को वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। उनके अनुसार, यह सामने आना चाहिए कि वह किसके इशारे पर अधिकारियों को निर्देश देता था।

IAS निलंबन पर सवाल, गिरफ्तारी नहीं

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जांच में केवल छोटे अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि कथित तौर पर बड़े अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों को बचाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि दो IAS अधिकारियों के निलंबन के बावजूद उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई और चार्जशीट में उनके नाम क्यों शामिल नहीं किए गए। उन्होंने दावा किया कि जांच में सरकारी विभागों में बिल पास कराने और टेंडर दिलाने के बदले 2 से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की बात सामने आई है।

सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' दावे पर प्रहार

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि टेंडर माफिया ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू होने के बावजूद पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रहे थे, तो यह सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के दावे पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी मांग की कि आरोपी और उससे जुड़ी कंपनियों को मिले सभी सरकारी टेंडरों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए। गौरतलब है कि उन्होंने कथित लाभार्थी कंपनियों में गुजरात की कंपनियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।

छापेमारी में मिली संपत्ति और FIR में देरी पर सवाल

तेजस्वी यादव ने बताया कि छापेमारी में आरोपी के पास से 99 संपत्तियों के दस्तावेज, करोड़ों रुपये की नकदी और आभूषण मिलने की बात सामने आई है। उन्होंने पूछा कि एक ठेकेदार के पास इतनी बड़ी संपत्ति कैसे पहुंची। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में लंबा समय लगा — और सवाल उठाया कि क्या इस देरी का उद्देश्य सबूत मिटाना और प्रभावशाली लोगों को बचाना था।

मांग: निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई

तेजस्वी यादव ने मांग की कि कथित महाघोटाले में शामिल सभी जिम्मेदार अधिकारियों, राजनीतिक संरक्षण देने वालों और संबंधित विभागों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या विपक्ष इन आरोपों को विधानसभा में ठोस दस्तावेजों के साथ उठाएगा या यह सिर्फ प्रेस-बयान की राजनीति तक सीमित रहेगा। दो IAS अधिकारियों का निलंबन और चार्जशीट से नाम का गायब होना — यह विरोधाभास जांच की निष्पक्षता पर वास्तविक सवाल खड़ा करता है, जिसे सरकार को सार्वजनिक रूप से संबोधित करना होगा। गुजरात की कंपनियों का उल्लेख मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक रंग देने की कोशिश है, जो बिहार चुनाव की पृष्ठभूमि में विपक्ष की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा लगती है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'रिशु श्री महाघोटाला' क्या है?
कथित 'रिशु श्री महाघोटाला' बिहार में एक ठेकेदार से जुड़ा कथित भ्रष्टाचार का मामला है, जिसमें आरोप है कि आरोपी ने कई सरकारी विभागों के टेंडर प्रभावित किए और बिल पास कराने के बदले 2 से 3.5% कमीशन लिया। छापेमारी में आरोपी के पास 99 संपत्तियों के दस्तावेज और करोड़ों की नकदी मिलने की बात सामने आई है।
तेजस्वी यादव ने सरकार से कौन-से प्रमुख सवाल पूछे हैं?
तेजस्वी यादव ने 20 सवालों में मुख्य रूप से पूछा कि निलंबित दो IAS अधिकारियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, चार्जशीट में उनके नाम क्यों नहीं हैं, FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई, और गुजरात की कंपनियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही। उन्होंने स्वतंत्र न्यायिक जांच की भी मांग की है।
क्या बिहार सरकार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिहार की NDA सरकार की ओर से इन 20 सवालों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार ने पहले 'जीरो टॉलरेंस' का दावा किया है, जिस पर तेजस्वी यादव ने सीधे सवाल उठाए हैं।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
अब तक दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया गया है और जांच एजेंसियों ने छापेमारी में 99 संपत्तियों के दस्तावेज, नकदी और आभूषण जब्त किए हैं। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि निलंबित IAS अधिकारियों को न गिरफ्तार किया गया है और न ही उनके नाम चार्जशीट में शामिल हैं।
तेजस्वी यादव ने गुजरात की कंपनियों का उल्लेख क्यों किया?
तेजस्वी यादव ने मांग की है कि कथित लाभार्थी कंपनियों में गुजरात की कंपनियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह मामले को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में रखने की कोशिश है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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