हुगली में TMC के पूर्व नेता देबराज पाल गिरफ्तार, हत्या और जबरन वसूली के मामले में पुलिस ने दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के मोगरा से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व नेता देबराज पाल उर्फ देबू को 31 अक्टूबर 2026 की रात बालागढ़ पुलिस स्टेशन ने हत्या और जबरन वसूली समेत कई गंभीर आरोपों में फिर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से एक सिंगल शॉट पिस्टल भी बरामद की गई है।
गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम
बालागढ़ पुलिस ने शुक्रवार रात त्रिवेणी कलिताला स्थित एसटीकेके रोड से देबू को हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें चिकित्सीय परीक्षण के लिए जीरत श्यामप्रसाद मुखर्जी ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया और बाद में चिनसुराह अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, देबू के खिलाफ हत्या और जबरन वसूली के अतिरिक्त अवैध रूप से हथियार रखने का ताज़ा मामला भी मोगरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। मौजूदा गिरफ्तारी इन्हीं मामलों के मद्देनजर की गई है।
देबू की पृष्ठभूमि और राजनीतिक सफर
त्रिवेणी कलिताला, मोगरा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के निवासी देबराज पाल कभी बंशबेरिया नगर TMC इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान वे अनेक विवादों में उलझे रहे। वे पहले भी एक हत्या के मामले में जेल जा चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जेल की सज़ा काटने के बाद देबू ने कुछ समय के लिए TMC से दूरी बना ली थी, लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों के बाद से वे पार्टी के चुनावी अभियानों में फिर सक्रिय हो गए थे। कलिताला में एसटीकेके रोड के पास उनका एक होटल भी है।
राज्य में TMC नेताओं पर कार्रवाई का व्यापक संदर्भ
यह गिरफ्तारी उस व्यापक कार्रवाई की पृष्ठभूमि में हुई है, जो राज्य विधानसभा चुनाव के बाद से TMC के नेताओं, पूर्व मंत्रियों और पार्षदों के खिलाफ जारी है। आरोप जबरन वसूली, मारपीट, छेड़छाड़ और धमकी देने जैसे हैं। गौरतलब है कि इनमें से कई नेताओं को जब पुलिस ले जा रही थी, तब गुस्साए स्थानीय लोगों ने उन पर अंडे फेंके और 'चोर-चोर' के नारे लगाए।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। राज्य की कानून-व्यवस्था और सत्तारूढ़ दलों के नेताओं की जवाबदेही को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है।
आगे क्या होगा
पुलिस हिरासत में रहते हुए देबराज पाल से पूछताछ की जाएगी। हत्या और जबरन वसूली के पुराने मामलों के साथ-साथ अवैध हथियार मामले में अदालत की आगामी सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं। इस गिरफ्तारी से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक आपराधीकरण की बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है।