टीएमसी में अंदरूनी कलह चरम पर: भाजपा प्रवक्ता कीया घोष का बड़ा हमला, अभिषेक-कल्याण विवाद पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता कीया घोष ने 31 मई को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी में सत्ता की होड़ और आंतरिक संघर्ष अपने चरम पर पहुँच गया है। उन्होंने हालिया घटनाओं को टीएमसी की हताशा और गहरे आंतरिक मतभेदों का प्रमाण बताया।
अभिषेक और कल्याण बनर्जी विवाद
कीया घोष ने कहा, 'इस बात को लेकर जबरदस्त होड़ मची है कि कौन ज्यादा ड्रामा कर सकता है। हमने शनिवार को देखा कि टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें एक अंडे से चोट लगी है। आज हमने देखा कि टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें 'चोर-चोर' के नारों से चोट पहुँची है।'
उन्होंने यह भी कहा, 'कल्याण बनर्जी की हताशा समझी जा सकती है। वह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। हालांकि, ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अपना नंबर दो चुना, जबकि कल्याण बनर्जी को वैसी कोई जगह नहीं मिली।' यह बयान टीएमसी में परिवारवाद और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा के आरोपों को और हवा देता है।
पाँच गिरफ्तारियों पर टीएमसी के आरोप खारिज
एक अन्य मामले में घोष ने 12 घंटे के भीतर पाँच लोगों की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए टीएमसी के आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, 'जो लोग यह दावा कर रहे थे कि यह भाजपा द्वारा रची गई साजिश थी, उन्हें यह नोट कर लेना चाहिए कि गिरफ्तार किए गए पाँचों आरोपी पूर्व विधायक लवली मैत्रा के ही सहयोगी थे। असलियत यह है कि उनकी अपनी ही पार्टी के भीतर गहरे आंतरिक मतभेद हैं और यह घटना उन्हीं संघर्षों का नतीजा है।'
अरूप बिस्वास पर एफआईआर और 'जैसा बोओगे' वाला बयान
पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर घोष ने कहा, 'जैसा बोओगे, वैसा काटोगे। हमने देखा कि कैसे लाखों युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ किया गया, और अब पासा पलट गया है। अरूप बिस्वास ने ऐसा बर्ताव किया, मानो लोग मेसी को देखने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें देखने के लिए टिकट खरीदे हों।' यह बयान उस विवाद की ओर इशारा करता है जिसमें खेल आयोजन की टिकट-बिक्री और प्रबंधन पर सवाल उठाए गए थे।
भाजपा का समग्र आरोप: परिवारवाद और सत्ता की लड़ाई
घोष ने निष्कर्ष निकाला कि टीएमसी नेताओं के बयानों और हालिया घटनाओं से स्पष्ट है कि पार्टी सत्ता के लिए आंतरिक लड़ाई में उलझी हुई है। भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी द्वारा अभिषेक बनर्जी को तरजीह दिए जाने से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी बढ़ी है, जो अब खुलकर सामने आ रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं।
आगे क्या
टीएमसी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिषेक बनर्जी और पुराने गुट के बीच की यह खींचतान आने वाले महीनों में पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकती है।