टीएमसी की विभाजनकारी राजनीति से प्रभावित पश्चिम बंगाल की सामाजिक स्थिति: समिक भट्टाचार्य
सारांश
Key Takeaways
- टीएमसी की विभाजनकारी राजनीति पर सवाल उठाए गए हैं।
- बंगाल की जनता को अपने भविष्य का निर्णय खुद करना है।
- चुनाव प्रक्रिया में सुधार किया गया है।
कोलकाता, 25 मार्च (आईएनएस)। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व, भाजपा के प्रदेश प्रमुख और राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने एआईएमआईएम और एजेयूपी के बीच बने गठबंधन पर हमला बोला है।
भट्टाचार्य ने प्रश्न उठाया, "असदुद्दीन ओवैसी पश्चिम बंगाल में क्यों आ रहे हैं? इसका क्या कारण है? इसका सीधा उत्तर है टीएमसी और उसकी विभाजनकारी राजनीति।"
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और इसके लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता को तय करना है कि वे राम के साथ रहेंगे या बाबर के साथ। असल में, जो हुमायूं है वही टीएमसी है और टीएमसी ही हुमायूं कबीर है। यह एक 'प्लान बी' बनाया गया है।
भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि इस बार का चुनाव 'ममता बनाम जनता' के आधार पर लड़ा जा रहा है। टीएमसी अब आम जनता के खिलाफ चुनाव लड़ रही है, जबकि उनका नारा 'मां, माटी, मानुष' था।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य की जनता ने यह ठान लिया है कि इस बार किसी भी स्थिति में टीएमसी से छुटकारा पाना है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और हुमायून कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं।
राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहला चरण 23 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा, जिसमें 152 सीटों पर वोटिंग होगी। दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा, जिसमें 142 सीटों पर मतदान होगा। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
पिछली बार के मुकाबले इस बार चुनावी प्रक्रिया को आसान बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मतदान के चरणों की संख्या 8 से घटाकर सिर्फ 2 कर दी गई है।