तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन का खंडन: 'टीवीके सरकार गिराने की कोई साजिश नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने 5 नवंबर 2026 को उन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया, जिनमें दावा किया गया था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) मिलकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिल वेट्री कषगम (TVK) सरकार को अस्थिर करने की योजना बना रहे हैं। नागेंद्रन ने इन आरोपों को 'बेबुनियाद' करार देते हुए कहा कि यह सरकार की कथित प्रशासनिक कमज़ोरियों से जनता का ध्यान हटाने की रणनीति मात्र है।
आरोप कहाँ से शुरू हुए
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राज्य के ऊर्जा संसाधन और कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने दोनों विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे TVK के विधायकों को अपनी ओर खींचकर सरकार को अल्पमत में लाने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद नागेंद्रन ने सोशल मीडिया पर एक तीखी पोस्ट के ज़रिए पलटवार किया।
नागेंद्रन ने मंत्री के आरोपों की विश्वसनीयता पर सीधे सवाल खड़े करते हुए कहा कि सत्ताधारी दल ख़ुद अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए राजनीतिक हथकंडे अपना रहा है।
भाजपा के प्रमुख आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर दो ठोस प्रशासनिक विफलताओं का आरोप लगाया — बिजली खरीद की बढ़ती लागत और कारागारों से कैदियों का फरार होना। उन्होंने कहा कि ये मुद्दे आम नागरिकों को सीधे प्रभावित करते हैं और सरकार को इन पर तत्काल ध्यान देना चाहिए, न कि विपक्ष पर राजनीतिक आरोप लगाने में ऊर्जा खर्च करनी चाहिए।
नागेंद्रन ने यह भी कहा कि मंत्री इन बुनियादी समस्याओं को सुलझाने में नाकाम रहे हैं।
TVK पर विरोधाभास का आरोप
नागेंद्रन ने TVK पर विरोधाभासी राजनीतिक आचरण का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि स्वयं सत्ताधारी पार्टी ने अन्य दलों के विधायकों को अपनी ओर खींचने की कोशिश की थी — और ऐसे में उसी पार्टी का विपक्ष पर 'दल-तोड़' का आरोप लगाना असंगत है।
उन्होंने कहा, 'यह अजीब बात है कि जिस पार्टी पर खुद विपक्षी विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश का आरोप है, वही अब दावा कर रही है कि BJP और AIADMK उसकी सरकार को अस्थिर कर रहे हैं।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि तमिलनाडु की राजनीति में यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब TVK सरकार और विपक्षी गठजोड़ के बीच शासन और राजनीतिक स्थिरता को लेकर टकराव पहले से तेज़ हो रहा था। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर राजनीतिक अवसरवाद के आरोप लगा रहे हैं।
इन आरोप-प्रत्यारोपों ने विजय सरकार को मिल रहे विधायी समर्थन की स्थिरता और विपक्षी रणनीतियों पर नई बहस छेड़ दी है।
आगे क्या होगा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक बहस को 'कथित साजिशों' की ओर मोड़ने की कोशिशें TVK प्रशासन की जवाबदेही को कम नहीं कर सकतीं। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि TVK सरकार बिजली लागत और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर क्या ठोस जवाब देती है — क्योंकि अब विपक्ष ने इन्हें चुनावी मुद्दा बनाने का संकेत दे दिया है।