डीएमके ने टीवीके को बताया 'भाजपा का गुलाम', ए. राजा और सेकर बाबू पर केस के बाद तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) पर तीखा हमला बोला और उस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मोहरा बनकर काम करने का आरोप लगाया। यह विवाद तब और गहरा गया जब लोकसभा सांसद ए. राजा और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री पी.के. सेकर बाबू के खिलाफ मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के प्रति कथित 'अपमानजनक टिप्पणी' के आरोप में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। डीएमके ने इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए सीधे टीवीके नेतृत्व पर निशाना साधा।
मुख्य घटनाक्रम
विवाद की जड़ यह है कि डीएमके नेताओं ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री विजय और कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार पर डीएमके नेताओं तथा आपातकाल में जेल जाने वाले लोगों के बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में वरिष्ठ डीएमके नेताओं पी.के. सेकर बाबू और आर.एस. भारती ने तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान मुख्यमंत्री की कड़ी आलोचना की।
हालाँकि, सांसद राजा की कुछ टिप्पणियों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया। कई TVK पदाधिकारियों और मंत्रियों ने उनकी टिप्पणियों को व्यक्तिगत, अपमानजनक और एक वरिष्ठ सांसद के लिए अशोभनीय बताते हुए उनकी निंदा की। बाद में राजा ने विरोध के सामने झुकते हुए अपनी टिप्पणियाँ वापस ले लीं।
डीएमके की प्रतिक्रिया
डीएमके के प्रवक्ता टी.के.एस. इलांगोवन ने कहा, 'राजनीति में लोग दूसरों की आलोचना करते हैं। वे इस आलोचना के खिलाफ केस दर्ज कर रहे हैं।' उन्होंने आगे तर्क दिया कि जब डीएमके के विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु में हुए अपराधों का जिक्र किया और मुख्यमंत्री से कार्रवाई का हिसाब माँगा, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इलांगोवन ने आरोप लगाया, 'उनका मकसद अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं है। उनका मकसद सिर्फ राजनीतिक नेताओं, खासकर डीएमके नेताओं को गिरफ्तार करना है, क्योंकि उनके 'बॉस' ने उन्हें डीएमके के खिलाफ बोलने और उसके खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया है।'
उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी का संदर्भ
डीएमके प्रवक्ता की यह टिप्पणी 4 अगस्त की उस घटना के संदर्भ में थी, जब उदयनिधि स्टालिन को महिलाओं के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें उसी दिन बाद में रिहा कर दिया गया। डीएमके का कहना है कि यह गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित थी।
इलांगोवन ने सीधे कहा, 'यह TVK है। वे BJP के गुलाम हैं, क्योंकि BJP डीएमके-विरोधी है, इसलिए वे वही करना चाहते हैं जो BJP कहती है।'
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब तमिलनाडु की राजनीति में TVK और DMK के बीच प्रतिद्वंद्विता तेज़ होती जा रही है। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक टिप्पणियों पर आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रवृत्ति विपक्षी आवाज़ों को दबाने का साधन बन सकती है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में राजनीतिक दलों के बीच मुकदमेबाज़ी की यह प्रवृत्ति नई नहीं है, लेकिन इसकी बारंबारता बढ़ना राजनीतिक तापमान के चढ़ने का संकेत देती है।
क्या होगा आगे
फिलहाल सांसद ए. राजा और पी.के. सेकर बाबू के खिलाफ दर्ज मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी है। डीएमके ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। दोनों दलों के बीच यह टकराव आने वाले हफ्तों में तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बने रहने की संभावना है।