केएमसी तृणमूल पार्षद स्वप्न समद्दार गिरफ्तार, हत्या की कोशिश व छेड़छाड़ के आरोप; KMC में अब 10 पार्षद हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद स्वप्न समद्दार को पुलिस ने बुधवार, 10 जून 2026 को फूलबागान इलाके से गिरफ्तार किया। उन पर हत्या की कोशिश, छेड़छाड़ और अन्य गंभीर आरोप हैं, जो 2 मई 2022 की एक कथित घटना से जुड़े हैं। इस गिरफ्तारी के साथ ही केएमसी में गिरफ्तार तृणमूल पार्षदों की कुल संख्या 10 हो गई है।
मामले का पृष्ठभूमि और एफआईआर
पुलिस के अनुसार, उत्तरी कोलकाता के नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन में मंगलवार को एक महिला शिकायतकर्ता ने स्वप्न समद्दार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
एफआईआर में शामिल आरोपों में हत्या की कोशिश, छेड़छाड़, गैर-कानूनी रूप से बंधक बनाना, काम में बाधा डालना, जान-बूझकर चोट पहुँचाना, संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, चोरी और आपराधिक धमकी देना शामिल हैं।
चुनाव-बाद हिंसा से जुड़ा आरोप
आरोप है कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद हुई चुनाव-बाद हिंसा में स्वप्न समद्दार की कथित तौर पर संलिप्तता थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उस समय तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में होने के कारण समद्दार के प्रभाव की वजह से शिकायत दर्ज कराना संभव नहीं हो पाया था। अब परिस्थितियाँ बदलने पर शिकायतकर्ता पुलिस स्टेशन पहुँची।
स्वप्न समद्दार केएमसी वार्ड नंबर 56 के पार्षद हैं और बेलियाघाटा आईडी अस्पताल की मरीज कल्याण समिति से भी जुड़े रहे हैं।
केएमसी पार्षदों की गिरफ्तारियों का सिलसिला
पिछले कुछ दिनों में कोलकाता नगर निगम के तृणमूल पार्षदों की गिरफ्तारियों का एक के बाद एक सिलसिला जारी है। बप्पादित्य दासगुप्ता को शनिवार की रात पटुली से रंगदारी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
रविवार की सुबह मध्य कोलकाता के जोरासांको स्थित उनके आवास से पार्षद मोहम्मद जसीमउद्दीन को हिरासत में लिया गया। उन पर 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम' (POCSO), 2012 के तहत नाबालिग के साथ छेड़छाड़ का मामला दर्ज है। इसके अलावा, केएमसी वार्ड नंबर 63 की पार्षद सुष्मिता भट्टाचार्य और उनके पति को मंगलवार को रंगदारी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार पार्षदों की बढ़ती संख्या कोलकाता पुलिस की व्यापक कार्रवाई का संकेत देती है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव-बाद हिंसा के पुराने मामलों को फिर से खोला जा रहा है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।