कोलकाता: KMC पार्षद बिस्वजीत मंडल महिला उत्पीड़न मामले में गिरफ्तार, TMC के चार पार्षद जाल में
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड नंबर 114 के तृणमूल पार्षद बिस्वजीत मंडल को 2024 में रीजेंट पार्क इलाके में एक महिला से कथित उत्पीड़न और मारपीट के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही पिछले कुछ हफ्तों में भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में हिरासत में लिए गए KMC के तृणमूल कांग्रेस पार्षदों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मंडल को रीजेंट पार्क में 2024 में दर्ज एक मामले के सिलसिले में हिरासत में लिया गया है, जिसमें एक महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट और उत्पीड़न की घटना हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर लंबी जाँच के बाद यह कदम उठाया गया।
एक के बाद एक गिरफ्तारियाँ
इससे पहले मंगलवार रात पुलिस ने वार्ड नंबर 106 के पार्षद अरिजीत दास ठाकुर को गिरफ्तार किया था। उन पर स्थानीय प्रमोटरों और कारोबारियों को धमकाकर जबरन वसूली का आरोप है। शिकायत में कहा गया कि वह लंबे समय से इलाके में निर्माण और व्यापार से जुड़े मामलों में दखल देकर पैसे वसूलने की कोशिश कर रहे थे।
शुरुआती जाँच में आरोपों की पुष्टि के बाद गरफा पुलिस थाने ने पहले पार्षद को पूछताछ के लिए बुलाया और लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।
सचिन सिंह की गिरफ्तारी और विरोध
मंगलवार दोपहर वार्ड नंबर 36 के तृणमूल पार्षद सचिन सिंह को भी जबरन वसूली के आरोप में पकड़ा गया। लालबाजार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) के सूत्रों के अनुसार, नारकेलडांगा पुलिस थाने की टीम जब उन्हें गिरफ्तार करने पहुँची, तो उनके घर के बाहर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सचिन विरोधियों को धमकाने और पीटने में भी शामिल रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, सचिन पर 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद हुई चुनावी हिंसा में शामिल होने के आरोप पहले से दर्ज हैं। उन्होंने उसी वर्ष पहली बार तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर KMC चुनाव जीता था।
पहले भी पकड़े गए सुदीप पोले
23 मई को ठाकुरपुकुर पुलिस ने KMC के वार्ड नंबर 123 के तृणमूल पार्षद और बोरो नंबर 16 के चेयरमैन सुदीप पोले को भी जबरन वसूली के एक मामले में गिरफ्तार किया था। यह कड़ी अब चार पार्षदों तक फैल चुकी है।
क्या होगा आगे
यह गिरफ्तारियाँ ऐसे समय में आ रही हैं जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पहले से ही नगर निकाय स्तर पर अपने जनप्रतिनिधियों के आचरण को लेकर सवालों के घेरे में है। आने वाले दिनों में पुलिस की पूछताछ और अदालती कार्यवाही से यह तय होगा कि मामला कितनी दूर तक जाता है।