त्रिपुरा का जीएसडीपी छह वर्षों में दोगुना, 468 MoU से ₹1.32 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य: सीएम माणिक साहा
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने 15 अगस्त 2026 को अगरतला के असम राइफल्स मैदान में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए घोषणा की कि राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) पिछले छह वर्षों में दोगुना हो गया है और लगभग 40 लाख लोगों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित किए गए हैं। उन्होंने राज्यवासियों से एक विकसित, शांतिपूर्ण, समावेशी और आत्मनिर्भर त्रिपुरा के निर्माण के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री साहा ने स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों और राष्ट्र निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद राज्य की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026 में 468 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जो प्रमुख क्षेत्रों में लगभग ₹1.32 लाख करोड़ के संभावित निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और केंद्र सरकार की 'पूर्वोदय' नीति के तहत इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रशासनिक सुधार और राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री साहा ने दावा किया कि त्रिपुरा देश का एकमात्र राज्य है जहाँ राज्य प्रशासन के उच्चतम स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक ई-ऑफिस को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। गौरतलब है कि अनुपालन में कमी और विनियमन में ढील देने के अभियान में राज्य लगातार दो वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर रहा है।
राज्य को पीएम-जनमान और धरती आबा जनभागीदारी अभियान के कार्यान्वयन के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार के तहत सेपाहिजाला जिले को देश की सर्वश्रेष्ठ जिला पंचायत और उनाकोटी की कंचनबारी ग्राम पंचायत को सर्वश्रेष्ठ स्वस्थ पंचायत का पुरस्कार मिला है।
कृषि और किसानों पर असर
कृषि क्षेत्र में साहा ने बताया कि 26,800 से अधिक किसानों ने जैविक खेती अपनाई है। लगभग 23 लाख किसानों को पीएम-किसान योजना के तहत प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता मिली है, जबकि 56,600 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ₹438 करोड़ का ऋण प्रदान किया गया है।
पशुपालन और मत्स्य पालन क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने 21,000 से अधिक पशुओं और 11 लाख मछली पालकों एवं मछली श्रमिकों के लिए बीमा कवरेज सुनिश्चित किया है। डुम्बुर जलाशय और सीतादरा झील में बड़े पैमाने पर पिंजरे में मछली पालन भी शुरू किया गया है।
पर्यटन और आगे की राह
माताबारी पर्यटन सर्किट के तहत प्रमुख स्थलों की अवसंरचना का विस्तार किया जा रहा है, जो राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन क्षमता को भुनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में ₹1.32 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश का वास्तविक रूपांतरण ही यह तय करेगा कि जीएसडीपी की यह रफ्तार टिकाऊ है या नहीं।