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विकसित भारत 2047: CM माणिक साहा बोले — गांवों के बिना विकास अधूरा, त्रिपुरा की 80% पंचायतें राष्ट्रीय अग्रणी

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विकसित भारत 2047: CM माणिक साहा बोले — गांवों के बिना विकास अधूरा, त्रिपुरा की 80% पंचायतें राष्ट्रीय अग्रणी

सारांश

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अगरतला में पंचायत पुरस्कार समारोह में दो-टूक कहा — गांवों के बिना विकसित भारत 2047 की कल्पना बेमानी है। राज्य की 80% पंचायतें राष्ट्रीय मापदंडों पर अग्रणी हैं और 51 पुरस्कारों से उत्कृष्ट पंचायत प्रशासन को सम्मानित किया गया।

मुख्य बातें

CM माणिक साहा ने 17 जुलाई 2026 को अगरतला में राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार समारोह का उद्घाटन किया।
त्रिपुरा की लगभग 80% पंचायतें राष्ट्रीय प्रदर्शन मापदंडों पर अग्रणी स्थान पर हैं।
राज्य का 75% भौगोलिक क्षेत्र और 75% आबादी ग्रामीण — इसलिए ग्रामीण विकास सर्वोच्च प्राथमिकता।
समारोह में विभिन्न श्रेणियों में 51 पुरस्कार पंचायत प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रदान किए गए।
साहा ने PM नरेंद्र मोदी के हवाले से कहा — विकसित भारत 2047 का लक्ष्य गांवों के विकास के बिना संभव नहीं।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने 17 जुलाई 2026 को अगरतला के एडी नगर स्थित ग्राम स्वराज भवन में आयोजित राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार 2026-27 समारोह का उद्घाटन करते हुए स्पष्ट कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तब तक अधूरा रहेगा, जब तक गांवों और पंचायतों को विकास की मुख्यधारा से नहीं जोड़ा जाता। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि लोगों के जीवन में वास्तविक और मापनीय सकारात्मक बदलाव ही विकास का सच्चा पैमाना है।

त्रिपुरा की पंचायतें: राष्ट्रीय मंच पर अग्रणी

साहा ने बताया कि राज्य की लगभग 80 प्रतिशत पंचायतें विभिन्न राष्ट्रीय प्रदर्शन मापदंडों पर अग्रणी स्थान बनाए हुए हैं। उन्होंने इसका श्रेय पंचायती राज विभाग के निरंतर प्रयासों को दिया और कहा कि पंचायत प्रशासन में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए इस समारोह में विभिन्न श्रेणियों में 51 पुरस्कार प्रदान किए गए। उन्होंने कहा, 'पंचायत विभाग सही दिशा में काम कर रहा है और लोगों को पंचायती राज संस्थाओं पर अपार विश्वास और भरोसा है।'

ग्रामीण त्रिपुरा: आँकड़ों में तस्वीर

मुख्यमंत्री ने बताया कि त्रिपुरा का लगभग 75 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र ग्रामीण है और राज्य की करीब 75 प्रतिशत आबादी गांवों तथा पंचायत क्षेत्रों में निवास करती है। इस जनसांख्यिकीय वास्तविकता को देखते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल एक नीतिगत विकल्प नहीं, बल्कि राज्य की प्रगति की अनिवार्य शर्त है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी पंचायतों को डिजिटल और वित्तीय रूप से सशक्त बनाने पर ज़ोर दे रही है।

PM मोदी के विज़न से जोड़ा ग्रामीण विकास

साहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए कहा कि मोदी ने बार-बार पंचायतों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने दोहराया कि जैसा प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा है — 'गांवों के विकास के बिना 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।' गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब देशभर में ग्राम पंचायतों की जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता पर नए सिरे से बहस छिड़ी हुई है।

पिछली सरकारों पर निशाना

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा कर शहरी विकास को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, 'विकास का असली इंजन गांवों में ही निहित है।' आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान चुनावी संदर्भ में ग्रामीण मतदाताओं को साधने की कोशिश भी हो सकते हैं, हालांकि राज्य की पंचायत उपलब्धियाँ आँकड़ों में दर्ज हैं।

आगे की राह

साहा ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण विकास केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सरकार और जनता के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। समाज के सभी वर्गों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए निरंतर और समन्वित कदम उठाने की ज़रूरत पर उन्होंने बल दिया। इस पुरस्कार समारोह को राज्य में पंचायती राज संस्थाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ तीन-चौथाई आबादी ग्रामीण है, पंचायत प्रदर्शन सीधे चुनावी ज़मीन से जुड़ा है। 80% पंचायतों का राष्ट्रीय अग्रणी होना प्रभावशाली आँकड़ा है, लेकिन इसे स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन से परखा जाना ज़रूरी है। विकसित भारत 2047 के नारे को ज़मीनी हकीकत में बदलने की असली परीक्षा यह है कि क्या इन पुरस्कार विजेता पंचायतों में रोज़गार, स्वास्थ्य और शिक्षा के मापनीय परिणाम बेहतर हुए हैं — केवल प्रशासनिक अनुपालन नहीं।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM माणिक साहा ने विकसित भारत 2047 के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार गांवों के विकास के बिना 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने पंचायतों को मज़बूत करना राज्य और देश दोनों के विकास के लिए अनिवार्य बताया।
त्रिपुरा की कितनी पंचायतें राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी हैं?
CM साहा के अनुसार त्रिपुरा की लगभग 80 प्रतिशत पंचायतें विभिन्न राष्ट्रीय प्रदर्शन मापदंडों पर अग्रणी स्थान पर हैं। यह जमीनी स्तर पर शासन में राज्य की बढ़ती प्रमुखता को दर्शाता है।
राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार 2026-27 समारोह में क्या हुआ?
17 जुलाई 2026 को अगरतला के एडी नगर स्थित ग्राम स्वराज भवन में आयोजित इस समारोह में पंचायत प्रशासन में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए विभिन्न श्रेणियों में 51 पुरस्कार प्रदान किए गए। CM माणिक साहा ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
त्रिपुरा में ग्रामीण विकास इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
त्रिपुरा का लगभग 75 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र ग्रामीण है और राज्य की करीब 75 प्रतिशत आबादी गांवों व पंचायत क्षेत्रों में रहती है। इस जनसांख्यिकीय संरचना के कारण ग्रामीण विकास राज्य की समग्र प्रगति की बुनियादी शर्त है।
पिछली सरकारों पर CM साहा ने क्या आरोप लगाए?
CM साहा ने कहा कि पिछली सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा करते हुए शहरी विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि विकास का असली इंजन गांवों में ही निहित है और ग्रामीण विकास सरकार व जनता के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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