त्रिपुरा की 80% पंचायतें राष्ट्रीय अग्रणी, CM माणिक साहा बोले — गांवों के बिना विकसित भारत 2047 असंभव
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 18 जुलाई 2025 को अगरतला के एडी नगर स्थित ग्राम स्वराज भवन में आयोजित राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार 2026-27 समारोह का उद्घाटन करते हुए स्पष्ट किया कि गांवों का समग्र विकास किए बिना 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही विकास का सच्चा मापदंड है और समाज के सभी वर्गों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
त्रिपुरा की पंचायतें — राष्ट्रीय मंच पर अग्रणी
साहा ने बताया कि राज्य की लगभग 80 प्रतिशत पंचायतें विभिन्न प्रदर्शन मापदंडों में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी रही हैं। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय पंचायती राज विभाग के निरंतर प्रयासों को दिया और कहा कि त्रिपुरा को पंचायत क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय मान्यता भी प्राप्त हुई है। उनके अनुसार, 'पंचायत विभाग सही दिशा में काम कर रहा है और लोगों को पंचायती राज संस्थाओं पर अपार विश्वास और भरोसा है।'
ग्रामीण जनसंख्या और भौगोलिक महत्व
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि त्रिपुरा का लगभग 75 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र ग्रामीण है और राज्य की करीब 75 प्रतिशत आबादी गांवों तथा पंचायत क्षेत्रों में निवास करती है। इस संदर्भ में उन्होंने ग्रामीण विकास को राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का भी उल्लेख किया जिसमें पंचायतों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर बल दिया गया है।
पिछली सरकारों पर आरोप — शहरी पक्षपात
साहा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा करते हुए शहरी विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया था। उन्होंने कहा कि 'विकास का असली इंजन गांवों में ही निहित है' और ग्रामीण विकास केवल सरकार व जनता के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में पंचायती राज संस्थाओं को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता देने की माँग तेज हो रही है।
51 पुरस्कारों से पंचायत उत्कृष्टता को सम्मान
इस अवसर पर पंचायत प्रशासन में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए विभिन्न श्रेणियों में 51 पुरस्कार प्रदान किए गए। गौरतलब है कि यह आयोजन राज्य सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करने और पंचायतों को विकास की धुरी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री साहा ने स्पष्ट किया कि पंचायतों को मजबूत करना राज्य और देश दोनों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि त्रिपुरा जैसे छोटे लेकिन उच्च ग्रामीण घनत्व वाले राज्यों में पंचायती राज की सफलता अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है — बशर्ते राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता को ज़मीनी परिणामों में बदला जाए।