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त्रिपुरा की 80% पंचायतें राष्ट्रीय अग्रणी, CM माणिक साहा बोले — गांवों के बिना विकसित भारत 2047 असंभव

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त्रिपुरा की 80% पंचायतें राष्ट्रीय अग्रणी, CM माणिक साहा बोले — गांवों के बिना विकसित भारत 2047 असंभव

सारांश

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा का संदेश साफ है — जब राज्य की 75% आबादी गांवों में रहती हो, तो विकास की शुरुआत वहीं से होनी चाहिए। 80% पंचायतों की राष्ट्रीय पहचान एक उपलब्धि है, लेकिन असली कसौटी यह है कि यह मान्यता ज़मीनी जीवन स्तर में कितना बदलाव ला पाती है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अगरतला के ग्राम स्वराज भवन में राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार 2026-27 समारोह का उद्घाटन किया।
राज्य की लगभग 80% पंचायतें विभिन्न प्रदर्शन मापदंडों में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी रही हैं।
त्रिपुरा का 75% भौगोलिक क्षेत्र ग्रामीण है और 75% आबादी गांवों व पंचायत क्षेत्रों में निवास करती है।
साहा ने कहा — गांवों के विकास के बिना 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
पंचायत प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए विभिन्न श्रेणियों में 51 पुरस्कार प्रदान किए गए।
पिछली सरकारों पर आरोप — ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा कर शहरी विकास पर अधिक ध्यान दिया गया।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 18 जुलाई 2025 को अगरतला के एडी नगर स्थित ग्राम स्वराज भवन में आयोजित राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार 2026-27 समारोह का उद्घाटन करते हुए स्पष्ट किया कि गांवों का समग्र विकास किए बिना 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही विकास का सच्चा मापदंड है और समाज के सभी वर्गों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

त्रिपुरा की पंचायतें — राष्ट्रीय मंच पर अग्रणी

साहा ने बताया कि राज्य की लगभग 80 प्रतिशत पंचायतें विभिन्न प्रदर्शन मापदंडों में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी रही हैं। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय पंचायती राज विभाग के निरंतर प्रयासों को दिया और कहा कि त्रिपुरा को पंचायत क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय मान्यता भी प्राप्त हुई है। उनके अनुसार, 'पंचायत विभाग सही दिशा में काम कर रहा है और लोगों को पंचायती राज संस्थाओं पर अपार विश्वास और भरोसा है।'

ग्रामीण जनसंख्या और भौगोलिक महत्व

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि त्रिपुरा का लगभग 75 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र ग्रामीण है और राज्य की करीब 75 प्रतिशत आबादी गांवों तथा पंचायत क्षेत्रों में निवास करती है। इस संदर्भ में उन्होंने ग्रामीण विकास को राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का भी उल्लेख किया जिसमें पंचायतों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर बल दिया गया है।

पिछली सरकारों पर आरोप — शहरी पक्षपात

साहा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा करते हुए शहरी विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया था। उन्होंने कहा कि 'विकास का असली इंजन गांवों में ही निहित है' और ग्रामीण विकास केवल सरकार व जनता के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में पंचायती राज संस्थाओं को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता देने की माँग तेज हो रही है।

51 पुरस्कारों से पंचायत उत्कृष्टता को सम्मान

इस अवसर पर पंचायत प्रशासन में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए विभिन्न श्रेणियों में 51 पुरस्कार प्रदान किए गए। गौरतलब है कि यह आयोजन राज्य सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करने और पंचायतों को विकास की धुरी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री साहा ने स्पष्ट किया कि पंचायतों को मजबूत करना राज्य और देश दोनों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि त्रिपुरा जैसे छोटे लेकिन उच्च ग्रामीण घनत्व वाले राज्यों में पंचायती राज की सफलता अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है — बशर्ते राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता को ज़मीनी परिणामों में बदला जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'प्रदर्शन मापदंड' की परिभाषा और उनकी स्वतंत्र जाँच का अभाव इस दावे को कमज़ोर करता है। असली सवाल यह है कि इन पुरस्कारों का ज़मीनी जीवन स्तर — आय, स्वास्थ्य, शिक्षा — पर कितना मापनीय असर पड़ा है। पिछली सरकारों पर 'शहरी पक्षपात' का आरोप राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, परंतु यह ध्यान देने योग्य है कि ग्रामीण-शहरी असंतुलन एक राष्ट्रीय समस्या है जो किसी एक दल या सरकार की देन नहीं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पंचायत पुरस्कारों से नहीं, बल्कि सत्यापन-योग्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों से मापा जाना चाहिए।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार 2026-27 समारोह कहाँ और कब आयोजित हुआ?
यह समारोह अगरतला के एडी नगर स्थित ग्राम स्वराज भवन में आयोजित हुआ, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री माणिक साहा ने किया। इस अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में 51 पंचायत पुरस्कार प्रदान किए गए।
त्रिपुरा की कितनी पंचायतें राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी हैं?
मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार, त्रिपुरा की लगभग 80 प्रतिशत पंचायतें विभिन्न प्रदर्शन मापदंडों में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी रही हैं। उन्होंने इसे जमीनी स्तर पर शासन में राज्य की बढ़ती प्रमुखता का प्रमाण बताया।
CM साहा ने विकसित भारत 2047 के लिए गांवों को क्यों जरूरी बताया?
साहा ने तर्क दिया कि त्रिपुरा की लगभग 75% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और 75% भौगोलिक क्षेत्र भी ग्रामीण है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बार-बार कहा है कि गांवों के विकास के बिना 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
त्रिपुरा की पंचायतों को राष्ट्रीय स्तर पर किस बात के लिए मान्यता मिली है?
त्रिपुरा को पंचायत क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री साहा ने इसका श्रेय पंचायती राज विभाग के निरंतर प्रयासों को दिया और कहा कि पंचायती राज संस्थाओं पर जनता का अपार विश्वास है।
पिछली सरकारों के बारे में CM साहा ने क्या कहा?
साहा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा करते हुए शहरी विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया था। उन्होंने कहा कि विकास का असली इंजन गांवों में निहित है और ग्रामीण विकास सरकार व जनता के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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