7.8% जीडीपी ग्रोथ पर टीएस सिंह देव का सवाल: 'सरकार ने डेटा दिखाने की कला सीखी, हकीकत वक्त बताएगा'
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने 1 सितंबर को भारत की 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अपनी सुविधा के अनुसार आँकड़े प्रस्तुत करने में दक्षता हासिल कर ली है, और इन आँकड़ों की असली परख तो समय के साथ ही होगी। इसके साथ ही उन्होंने चीनी और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता व्यक्त की।
जीडीपी आँकड़ों पर सवाल
सिंह देव ने कहा, 'इस सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से डेटा पेश करने की कला में भी महारत हासिल कर ली है। क्या यह सच में वैसा ही है जैसा दिखाया गया है, या कहानी का कोई और पहलू भी है? यह तो वक्त ही बताएगा।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि विकास दर वास्तव में 7.8 फीसदी है, तो यह सकारात्मक संकेत है — लेकिन अर्थशास्त्री इसका स्वतंत्र विश्लेषण करेंगे, तभी वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
महंगाई और आम उपभोक्ता पर असर
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने महंगाई के मोर्चे पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि चीनी की कीमत ₹75 प्रति किलो से ऊपर जा चुकी है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे और खाना पकाने के लिए गैस इस्तेमाल करने वाले तमाम प्रतिष्ठानों की लागत बढ़ेगी, जिसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्होंने इसे 'चिंता की बात' बताया।
भाजपा पर सीधा निशाना
सिंह देव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वे देश के मेहनती नागरिकों की उपलब्धियों का श्रेय खुद लेने की कोशिश करते हैं। उनका कहना था कि भाजपा नेतृत्व यह जताने में लगा रहता है कि मानो देश की प्रगति सिर्फ उनकी बदौलत हो रही है, जबकि करोड़ों भारतीयों की मेहनत को नज़रअंदाज़ किया जाता है।
व्यापक विपक्षी चिंता
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आर्थिक बयानों का संदर्भ देते हुए सिंह देव ने कहा कि यह चिंता केवल राहुल गांधी तक सीमित नहीं है — कई अर्थशास्त्री और विश्लेषक भी मानते हैं कि सरकारी जीडीपी के आँकड़े ज़मीनी आर्थिक हकीकत से मेल नहीं खाते। यह ऐसे समय में आया है जब महंगाई दर और बेरोज़गारी को लेकर आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
आगे क्या
स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों द्वारा 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के आँकड़ों का विस्तृत विश्लेषण अपेक्षित है। कमर्शियल एलपीजी और चीनी की कीमतों में वृद्धि को लेकर विपक्ष सरकार पर दबाव बनाए रखने की स्थिति में है। आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा संसदीय और सार्वजनिक बहस का केंद्र बन सकता है।