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जीडीपी के आँकड़े आम आदमी की थाली नहीं भरते — चीनी, पेट्रोल, एलपीजी महंगे: राजेश राम

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जीडीपी के आँकड़े आम आदमी की थाली नहीं भरते — चीनी, पेट्रोल, एलपीजी महंगे: राजेश राम

सारांश

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने वित्त रहित शिक्षकों के वेतन पर आंदोलन की चेतावनी के साथ-साथ जीडीपी के आँकड़ों को आम आदमी की असल तकलीफ से काटा हुआ बताया — जब चीनी, एलपीजी और पेट्रोल-डीजल महंगे हों, तो विकास दर का दावा किसके लिए?

मुख्य बातें

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने वित्त रहित शिक्षकों के वेतन और अनुदान की माँग पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।
वित्त रहित शिक्षक व्यवस्था 1982 में मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के कार्यकाल में शुरू हुई थी; अब वेतन-अनुदान बंद होने से यह व्यवस्था कमज़ोर हो रही है।
राजेश राम ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए एलपीजी सिलेंडर महंगा होने को महंगाई का ठोस उदाहरण बताया।
जीडीपी वृद्धि के सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीनी, पेट्रोल-डीजल, गैस महंगे रहने पर आँकड़ों का लाभ आम जनता तक नहीं पहुँचता।
नोटबंदी और जीएसटी का हवाला देते हुए कहा कि इन नीतियों से छोटे कारोबारी और असंगठित क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए।

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने 1 सितंबर को केंद्र और राज्य सरकार पर दोहरे मोर्चे पर हमला बोला — एक तरफ बिहार के वित्त रहित शिक्षकों के वेतन और अनुदान के मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी दी, तो दूसरी तरफ जीडीपी वृद्धि के आँकड़ों को आम जनता की आर्थिक बदहाली का पर्दा बताया। उन्होंने कहा कि जब चीनी, एलपीजी, पेट्रोल-डीजल जैसी बुनियादी ज़रूरतें आम आदमी की पहुँच से बाहर हों, तो विकास दर के दावे खोखले लगते हैं।

वित्त रहित शिक्षकों पर आंदोलन की तैयारी

राजेश राम ने कहा कि 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के नेतृत्व में वित्त रहित शिक्षकों की व्यवस्था इसलिए लाई गई थी क्योंकि उस दौर में कॉलेजों और विद्यालयों की भारी कमी थी और शिक्षा को दूरदराज तक पहुँचाना ज़रूरी था। उन्होंने कहा, 'आज सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, लेकिन वित्त रहित शिक्षकों के वेतन और अनुदान पर चर्चा नहीं होती।' कांग्रेस ने माँग की है कि इन शिक्षकों का बकाया वेतन और अनुदान तत्काल जारी किया जाए, अन्यथा पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी।

महंगाई पर केंद्र सरकार को घेरा

राजेश राम ने उज्ज्वला योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन तो मिले, लेकिन एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के चलते अब उन्हीं परिवारों के लिए सिलेंडर भरवाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि गैस, चीनी और प्याज जैसी नित्य-उपयोगी वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने आम आदमी की रसोई पर सीधा असर डाला है। बिहार से रोज़गार की तलाश में बाहर जाने वाले प्रवासी मज़दूरों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में आय और रोज़गार के पर्याप्त अवसर न होने से आर्थिक दबाव और गहरा हो रहा है।

जीडीपी आँकड़ों पर सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जीडीपी वृद्धि संबंधी बयानों पर राजेश राम ने कहा कि केवल आँकड़ों के बढ़ने से आम जनता की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं मानी जा सकती। उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी के फ़ैसलों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि इन नीतियों के बाद छोटे कारोबारियों और असंगठित क्षेत्र पर बोझ बढ़ा। उनके अनुसार, 'उत्पादन और निवेश बढ़ाने के बजाय कीमतों और करों के बढ़ने से आर्थिक वृद्धि के आँकड़े मज़बूत दिखाई देना वास्तविक आर्थिक मज़बूती का प्रमाण नहीं है।'

विपक्ष की भूमिका और राहुल गांधी के मुद्दे

राजेश राम ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी जिन मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं, उनमें से कई बाद में गंभीर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बने। उन्होंने कहा कि विपक्ष का संवैधानिक दायित्व सरकार से जवाब माँगना है और सरकार को बयानबाज़ी के बजाय संसद में इन सवालों का ठोस उत्तर देना चाहिए।

आर्थिक विकास का असली पैमाना

राजेश राम ने कहा कि आर्थिक विकास का वास्तविक मापदंड यह होना चाहिए कि आम नागरिक की आय बढ़े, रोज़गार के अवसर सुलभ हों और ज़रूरी वस्तुएँ उसकी क्रय-शक्ति के भीतर रहें। कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा आर्थिक नीतियाँ इन बुनियादी प्राथमिकताओं पर खरी नहीं उतरतीं। यह देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का जवाब नीतिगत बदलाव से देती है या केवल आँकड़ों से।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसके आँकड़े आज भी विवादित हैं — और यही विवाद विपक्ष को राजनीतिक ज़मीन देता है। सरकार को महंगाई नियंत्रण पर नीतिगत जवाब देना होगा, केवल विकास दर के आँकड़े पर्याप्त नहीं होंगे।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में वित्त रहित शिक्षक कौन होते हैं और उनकी समस्या क्या है?
वित्त रहित शिक्षक वे शिक्षक हैं जो सरकारी अनुदान के बिना निजी या अर्ध-सरकारी संस्थाओं में पढ़ाते हैं। 1982 में यह व्यवस्था शिक्षा के विस्तार के लिए शुरू हुई थी, लेकिन अब इनके वेतन और अनुदान का भुगतान अनियमित हो गया है, जिससे यह व्यवस्था संकट में है।
राजेश राम ने जीडीपी वृद्धि पर क्या सवाल उठाए?
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम का कहना है कि जब चीनी, एलपीजी, पेट्रोल-डीजल जैसी बुनियादी वस्तुएँ महंगी हों, तो जीडीपी के बढ़ते आँकड़ों का लाभ आम आदमी तक नहीं पहुँचता। उनके अनुसार उत्पादन और निवेश की बजाय कीमतों और करों में वृद्धि से बनी विकास दर वास्तविक आर्थिक मज़बूती नहीं दर्शाती।
कांग्रेस बिहार में किस मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी कर रही है?
बिहार कांग्रेस वित्त रहित शिक्षकों के बकाया वेतन और अनुदान के भुगतान की माँग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी में है। राजेश राम ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया तो पार्टी सड़क पर उतरेगी।
उज्ज्वला योजना पर राजेश राम ने क्या कहा?
राजेश राम ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन तो मिले, लेकिन एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के कारण अब उन्हीं परिवारों के लिए सिलेंडर भरवाना मुश्किल हो गया है, जिससे योजना का व्यावहारिक लाभ सीमित हो गया है।
नोटबंदी और जीएसटी को लेकर कांग्रेस का क्या रुख है?
राजेश राम ने आरोप लगाया कि नोटबंदी और जीएसटी के फ़ैसलों के बाद छोटे कारोबारियों और असंगठित क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ा। उनके अनुसार इन नीतियों के दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभावों का सरकार ने पर्याप्त आकलन नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
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