टीएस सिंह देव का केंद्र पर निशाना: डीजल कालाबाजारी, FDI गिरावट और रोजगार पर सच बताए सरकार
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने 12 जून को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और ईंधन संकट को लेकर सरकार को जनता से खुलकर सच बोलना चाहिए। उन्होंने नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मतदाताओं को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।
डीजल पर पाबंदी और कालाबाजारी का आरोप
सरकार द्वारा डीजल वितरण पर लगाई गई सीमाओं पर सिंह देव ने कहा, "जब कोटा सिस्टम लागू किया जाता है, तो कालाबाजारी शुरू हो जाती है — यह तो तय है।" उन्होंने दावा किया कि कई लोगों ने उन्हें बताया है कि डीजल मिलना बेहद मुश्किल हो रहा है और यह सरकारी कीमत से ₹10 अधिक पर बेचा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला पर पहले से ही दबाव है।
नीति आयोग बैठक और आर्थिक स्थिति पर सवाल
नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वैश्विक संकट के दौर में भारत प्रगति की ओर अग्रसर है। इस पर सिंह देव ने कहा कि जिन मतदाताओं के बहुमत से सरकार सत्ता में आई है, उन्हें यह कहकर "ढाढस" नहीं देना चाहिए कि सब कुछ ठीक चल रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर के जाने-माने अर्थशास्त्री भारत की आर्थिक स्थिति के कमज़ोर होने की चेतावनी दे रहे हैं।
FDI और नए रोजगार पर चिंता
कांग्रेस नेता ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में कमी और नए उद्योगों में पूंजी निवेश न होने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जब तक कोई नई गतिविधि नहीं होगी, कोई नया काम नहीं मिलेगा।" आलोचकों का कहना है कि देश में गैस की दिक्कत, पेट्रोल-डीजल की कमी और रोजगार की कमी एक साथ सामने आ रहे हैं, जो अर्थव्यवस्था की कमज़ोर होती नींव के संकेत हैं।
हैदराबाद इन्वेस्टर्स समिट और छत्तीसगढ़ बिजली बकाया
हैदराबाद में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के शामिल होने पर सिंह देव ने कहा कि निवेश एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि छत्तीसगढ़ से तेलंगाना को बिजली सप्लाई की जाती है और ₹10,000–20,000 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। गौरतलब है कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय भी यही चिंताएँ जताई गई थीं।
आगे क्या
सिंह देव के इन बयानों से स्पष्ट है कि कांग्रेस केंद्र सरकार को आर्थिक मोर्चे पर घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। छत्तीसगढ़ में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस के लिए ये मुद्दे आगामी राजनीतिक बहसों का केंद्र बन सकते हैं।