1 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तुलु भाषा राष्ट्रीय मान्यता मिशन 2026-2035: PM मोदी को सौंपा गया ₹450 करोड़ का प्रस्ताव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तुलु भाषा राष्ट्रीय मान्यता मिशन 2026-2035: PM मोदी को सौंपा गया ₹450 करोड़ का प्रस्ताव

सारांश

तुलु भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दशकों पुरानी माँग अब ₹450 करोड़ के 10 वर्षीय राष्ट्रीय मिशन प्रस्ताव के रूप में PM मोदी तक पहुँची। कर्नाटक के राज्य-स्तरीय मान्यता कदम के ठीक बाद आया यह प्रस्ताव केंद्रीय संवैधानिक दर्जे की दिशा में नई राजनीतिक गति का संकेत है।

मुख्य बातें

PM मोदी को 1 अक्टूबर 2026 को 'तुलु भाषा राष्ट्रीय मान्यता और विकास मिशन 2026-2035' का प्रस्ताव सौंपा गया।
प्रस्ताव में तुलु को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और ₹450 करोड़ के बजट की मांग की गई है।
कर्नाटक राज्य नीति और योजना आयोग के सदस्य एस.
मोहनदास हेगड़े ने यह प्रस्ताव पेश किया।
2011 की जनगणना के अनुसार तुलु के मूल वक्ताओं की संख्या 18,46,849 है।
18 सितंबर 2026 को कर्नाटक कैबिनेट ने दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में तुलु को दूसरी अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था; सालाना ₹82 लाख आवंटित।
प्रस्ताव में दोहरी-लिपि सामंजस्य मॉडल सुझाया गया — कन्नड़ प्रशासन के लिए, तुलु-तिगलारी लिपि शोध और संरक्षण के लिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 1 अक्टूबर 2026 को 'तुलु भाषा राष्ट्रीय मान्यता और विकास मिशन 2026-2035' शुरू करने का एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा गया। इस प्रस्ताव में तुलु भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने, उसे डिजिटाइज़ करने और उसकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए ₹450 करोड़ के अनुमानित बजट का खाका प्रस्तुत किया गया है। प्रस्ताव में प्रधानमंत्री कार्यालय से अंतर-मंत्रालयी जांच शुरू करने के निर्देश जारी करने का अनुरोध भी किया गया है।

प्रस्ताव किसने और क्यों पेश किया

कर्नाटक राज्य नीति और योजना आयोग के सदस्य एस. मोहनदास हेगड़े ने यह प्रस्ताव तैयार कर PM मोदी को सौंपा। प्रस्ताव में 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि तुलु बोलने वाले मूल वक्ताओं की संख्या 18,46,849 है, और यह भाषा भारत के साथ-साथ विदेशों में भी प्रचलित है।

प्रस्ताव में तुलु के भाषाई इतिहास, पांडुलिपियों, शिलालेखों, मौखिक परंपराओं और तुलु-तिगलारी लिपि पर व्यवस्थित शोध की मांग की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थापित ऐतिहासिक साक्ष्यों को विवादित दावों और सांस्कृतिक परंपराओं से अलग रखा जाएगा।

तुलु नाडु के इतिहास पर विशेष शोध की मांग

प्रस्ताव में तुलु नाडु के इतिहास पर एक समर्पित शोध परियोजना की माँग की गई है। इसमें अलुपा राजवंश, बरकुर, तुलुवा राजवंश और विजयनगर साम्राज्य के बीच ऐतिहासिक संबंधों की पड़ताल करने का प्रस्ताव है।

दस्तावेज़ में एक 'दोहरी-लिपि सामंजस्य मॉडल' का भी सुझाव दिया गया है, जिसके तहत कन्नड़ समकालीन प्रशासन और सार्वजनिक शिक्षा का माध्यम बनी रहेगी, जबकि तुलु-तिगलारी लिपि का उपयोग पांडुलिपि संरक्षण, शिलालेखों और विद्वतापूर्ण शोध के लिए किया जाएगा।

कर्नाटक सरकार का हालिया कदम और संदर्भ

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब मंगलुरु में 18 सितंबर 2026 को हुई कर्नाटक कैबिनेट की बैठक में दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में प्रशासनिक कार्यों के लिए तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का निर्णय लिया जा चुका है। राज्य सरकार ने इसके अनुवाद, प्रशिक्षण और कार्यान्वयन उपायों के लिए सालाना ₹82 लाख आवंटित करने की भी घोषणा की है।

गौरतलब है कि तुलु भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग दशकों से उठती रही है, और यह प्रस्ताव उस दीर्घकालिक आंदोलन को एक नई नीतिगत दिशा देने का प्रयास है।

तीन नीतिगत रास्ते और बजट रूपरेखा

प्रस्ताव में तीन नीतिगत विकल्प सुझाए गए हैं — संवैधानिक मान्यता, शास्त्रीय भाषा का दर्जा पाने के लिए पात्रता की जांच, और 10 वर्षीय राष्ट्रीय मिशन का संचालन। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए ₹450 करोड़ के अनुमानित बजट का प्रस्ताव है।

इसमें भाषा प्रौद्योगिकी, पांडुलिपि संरक्षण, शिलालेख अध्ययन और शिक्षा से जुड़ी मौजूदा केंद्रीय योजनाओं के साथ तालमेल बिठाने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि समानांतर खर्च से बचा जा सके।

आगे क्या होगा

प्रस्ताव में प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया गया है कि वह संबंधित मंत्रालयों को इसकी अंतर-मंत्रालयी जांच के लिए उचित निर्देश जारी करे। यदि केंद्र इस प्रस्ताव पर अनुकूल प्रतिक्रिया देता है, तो तुलु भाषा का दर्जा संवैधानिक स्तर तक पहुँचने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नतीजे सिफ़र रहे हैं। कर्नाटक सरकार का हालिया राज्य-स्तरीय कदम स्वागतयोग्य है, किंतु प्रशासनिक दर्जा और संवैधानिक मान्यता में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है। ₹450 करोड़ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट एक ठोस संख्या है, पर असली परीक्षा यह होगी कि PMO इस प्रस्ताव को अंतर-मंत्रालयी प्रक्रिया में आगे बढ़ाता है या यह भी भाषाई दावों की उस लंबी कतार में शामिल हो जाता है जो फ़ाइलों में दफ़न हो जाती हैं। तुलु के 18 लाख से अधिक वक्ताओं के लिए, यह केवल भाषाई पहचान का सवाल नहीं — यह सांस्कृतिक अस्तित्व की राजनीति भी है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलु भाषा राष्ट्रीय मान्यता और विकास मिशन 2026-2035 क्या है?
यह एक 10 वर्षीय प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन है जिसे 1 अक्टूबर 2026 को PM मोदी को सौंपा गया। इसमें तुलु को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने, शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने की पात्रता जांच और ₹450 करोड़ के बजट से भाषा संरक्षण, डिजिटाइज़ेशन और शिक्षा की योजना बनाई गई है।
तुलु को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग क्यों की जा रही है?
आठवीं अनुसूची में शामिल होने से किसी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलती है, जिससे सरकारी कामकाज, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में उसका उपयोग सुनिश्चित होता है। 2011 की जनगणना के अनुसार तुलु के 18,46,849 मूल वक्ता हैं और इस भाषा की समृद्ध लिखित व मौखिक परंपरा है, जिसके आधार पर इसकी पात्रता का तर्क दिया जाता है।
कर्नाटक सरकार ने तुलु के लिए हाल में क्या किया है?
18 सितंबर 2026 को मंगलुरु में हुई कर्नाटक कैबिनेट बैठक में दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में प्रशासनिक कार्यों के लिए तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया। इसके कार्यान्वयन के लिए सालाना ₹82 लाख आवंटित किए गए हैं।
'दोहरी-लिपि सामंजस्य मॉडल' क्या है?
प्रस्ताव में सुझाए गए इस मॉडल के तहत कन्नड़ लिपि समकालीन प्रशासन और सार्वजनिक शिक्षा का माध्यम बनी रहेगी, जबकि तुलु-तिगलारी लिपि का उपयोग पांडुलिपि संरक्षण, शिलालेखों और विद्वतापूर्ण शोध तक सीमित रहेगा। यह दोनों भाषाओं और लिपियों के बीच टकराव से बचने का प्रयास है।
इस प्रस्ताव पर आगे क्या प्रक्रिया होगी?
प्रस्ताव में प्रधानमंत्री कार्यालय से संबंधित मंत्रालयों को अंतर-मंत्रालयी जांच शुरू करने के निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है। यदि PMO इसे आगे बढ़ाता है, तो विभिन्न मंत्रालय प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे और तुलु की संवैधानिक मान्यता की प्रक्रिया आरंभ हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले