तुषार गांधी की हिरासत पर शिवसेना (यूबीटी) का हंगामा, आदित्य ठाकरे बोले — रिहाई तक थाना नहीं छोड़ेंगे
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई पुलिस ने 10 अक्टूबर को महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को उस समय हिरासत में लिया, जब वह अगस्त क्रांति मैदान की ओर जा रहे थे। इस घटना के तुरंत बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और संजय राउत समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता डीएन नगर पुलिस स्टेशन पहुँच गए और तुषार गांधी की तत्काल रिहाई की माँग की।
थाने पर जमावड़ा और आदित्य ठाकरे की चेतावनी
आदित्य ठाकरे ने पुलिस स्टेशन के बाहर स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक तुषार गांधी को रिहा नहीं किया जाता, शिवसेना (यूबीटी) का कोई भी नेता थाने से नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पूरे मुंबई से शिव सैनिक पुलिस स्टेशन के बाहर एकत्रित होंगे। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि थाने के बाहर शिव सैनिकों की भीड़ जमा हो गई और वे रिहाई की माँग कर रहे थे।
संजय राउत का एक्स पर आरोप — 'अज्ञात स्थान पर ले गई पुलिस'
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि तुषार गांधी को डीएन नगर पुलिस स्टेशन में रखा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे और आदित्य ठाकरे उनसे मिलने पहुँचे तो पुलिस उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले गई। राउत ने सवाल उठाया — 'इतनी गोपनीयता क्यों?' — और माँग की कि तुषार गांधी को तत्काल पेश किया जाए।
व्यापक संदर्भ — सीजेपी का प्रदर्शन और ध्रुव राठी की हिरासत
तुषार गांधी की हिरासत उस दिन हुई जब सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रशासन ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, फिर भी सीजेपी तैयारियों में जुटी थी, जिसके मद्देनज़र दिल्ली में कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए। इसी क्रम में यूट्यूबर ध्रुव राठी को शनिवार सुबह गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया — वह दिल्ली में इसी प्रदर्शन में शामिल होने आए थे।
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल रोक लगाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग को लेकर लगातार विरोध जता रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और व्यापक असर
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर विपक्षी दलों का आक्रोश पहले से ही उफान पर था। तुषार गांधी और ध्रुव राठी जैसे著名 नागरिकों की हिरासत ने इस विवाद को और तीखा कर दिया है। शिवसेना (यूबीटी) का थाने के बाहर धरना इस बात का संकेत है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से केंद्र में रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
आगे क्या
तुषार गांधी की हिरासत और उनके कथित तौर पर अज्ञात स्थान पर ले जाए जाने की खबर ने विपक्षी दलों को एकजुट करने का काम किया है। शिवसेना (यूबीटी) नेताओं के थाने पर डटे रहने के ऐलान के बाद यह देखना अहम होगा कि पुलिस किस आधार पर हिरासत की पुष्टि करती है और तुषार गांधी को कब और किन शर्तों पर रिहा किया जाता है। यह घटना आगामी दिनों में चुनाव आयोग और सरकार के विरुद्ध विपक्षी आंदोलन की दिशा तय कर सकती है।