उद्धव-राज ठाकरे गठबंधन पर नसीम सिद्दीकी का संशय: 'साथ अच्छा, पर टिकेगा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 4 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे का एक साथ आना सकारात्मक कदम होगा, लेकिन उन्हें इस गठबंधन की दीर्घायु पर गहरा संदेह है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि दोनों नेता पहले भी साथ आ चुके हैं, और वह साथ अधिक समय तक टिका नहीं था।
ठाकरे गठबंधन पर सिद्दीकी का आकलन
सिद्दीकी ने कहा, 'अगर वे साथ आते हैं तो यह बहुत अच्छी बात होगी। वे पहले भी साथ थे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह गठबंधन बहुत लंबे समय तक चलेगा।' गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच वैचारिक और राजनीतिक दूरियाँ दशकों पुरानी हैं — दोनों एक ही परिवार से निकले, किंतु अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर चले। ऐसे में किसी संभावित पुनर्मिलन की खबरें महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा करती हैं।
मुंबई विपक्षी प्रदर्शन और इंडी गठबंधन
सिद्दीकी ने मुंबई में हाल ही में हुए विपक्षी प्रदर्शन को इंडी गठबंधन की एकजुटता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि एनसीपी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे समेत हजारों कार्यकर्ताओं ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की रणनीति पर निशाना
सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्वतंत्र चुनावी रणनीति को लेकर कड़ी आलोचना की। उनके अनुसार कांग्रेस का यह प्रयोग सफल नहीं होगा और पार्टी को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का नेतृत्व स्वीकार करते हुए उनके साथ तालमेल बनाकर चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'वरना कांग्रेस की जो थोड़ी-बहुत मौजूदगी बची है, वह भी खत्म हो जाएगी और इससे सिर्फ अखिलेश कमजोर होंगे।'
चुनाव आयोग और आरएसएस पर सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनआक्रोश का उल्लेख करते हुए सिद्दीकी ने चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को 'एक पार्टी को फायदा पहुँचाने के लिए' इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे संविधान को नुकसान पहुँच रहा है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर यह आरोप भी लगाया कि संगठन हर मुद्दे को धर्म से जोड़ने की कोशिश करता है और देश में कोई समस्या होने पर पीछे हट जाता है। आलोचकों का कहना है कि ये बयान विपक्षी दलों की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं जो 2026 की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच तेज हो रही है।
आगे की राह
महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव-राज पुनर्मिलन की अटकलें अभी कयासों तक ही सीमित हैं। यह देखना बाकी है कि क्या दोनों नेता औपचारिक रूप से एकजुट होते हैं और इंडी गठबंधन के साथ उनका समीकरण कैसा बनता है। सिद्दीकी के बयान राज्य में विपक्षी एकता की जटिलताओं को उजागर करते हैं — जहाँ रणनीतिक ज़रूरत और वैचारिक मतभेद एक साथ चलते हैं।