उद्धव ठाकरे का फडणवीस को खुला चैलेंज: 'साहस है तो लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती से खींच लाओ'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 20 अक्टूबर 2026 को दादर के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में पार्टी की वार्षिक दशहरा रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें सच्ची राजनीतिक इच्छाशक्ति है, तो वे साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को दिल्ली के संरक्षण से बाहर खींचकर लाएँ। विजयादशमी के अवसर पर समर्थकों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए ठाकरे ने राज्य की कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और युवा विरोध प्रदर्शनों पर सत्ताधारी गठबंधन को घेरा।
लॉरेंस बिश्नोई पर सीधी चुनौती
ठाकरे ने कहा, 'साबरमती जेल में बैठा लॉरेंस बिश्नोई है, जिसके गुर्गों का दावा है कि उनके पास 70 हज़ार शूटर हैं। देवेंद्र फडणवीस जी, आपमें सच में हिम्मत है तो साबरमती जाइए, दिल्ली में बैठे अपने 'बॉस' के सामने से लॉरेंस बिश्नोई को खींचकर बाहर निकालिए — फिर बड़ी-बड़ी बातें कीजिए।' यह बयान उस राजनीतिक संदर्भ में आया है जब बिश्नोई गैंग के नाम पर महाराष्ट्र में कई धमकी भरे पत्र और हमले की घटनाएँ सामने आई हैं।
टाइगर श्रॉफ हमले पर तीखा तंज
अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हालिया हमले को लेकर ठाकरे ने मुख्यमंत्री फडणवीस की आलोचना करते हुए उन्हें 'चमको' यानी दिखावा करने वाला करार दिया। उन्होंने कहा, 'टाइगर श्रॉफ पर हमला हुआ और ये तुरंत उनसे मिलने पहुँच गए। यह उनकी किस्मत अच्छी थी कि वे बच गए। अगर गोली जानलेवा साबित होती और पुलिस बाद में बदमाशों को पकड़ती, तो उसका क्या फायदा होता?' उन्होंने पूछा कि नाकेबंदी के बावजूद हमलावर किस तरह अंदर घुस पाए।
'अर्बन नक्सल' बनाम असली घुसपैठ
राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे पर निशाना साधते हुए — जिसमें कथित तौर पर महाराष्ट्र को 'अर्बन नक्सलियों' का गढ़ बताया गया है — ठाकरे ने सवाल उठाया कि शहरों में यह 'अर्बन नक्सलवाद' आखिर है कहाँ? उनका कहना था कि असल में उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से अपराधी महाराष्ट्र में घुसपैठ कर रहे हैं, और सरकार उसे रोकने में नाकाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सड़कों और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवा क्रांतिकारी हैं, नक्सली नहीं।
युवा प्रदर्शनकारियों और सीजेपी को समर्थन
ठाकरे ने अपने संबोधन में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं पहले विरोध प्रदर्शन स्थल पर जाकर घायल युवाओं से मिले थे। उन्होंने कहा, 'किसी के सिर पर चोट थी, एक लड़की के कपड़े फटे हुए थे। मैंने उनसे घर जाने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने जवाब दिया — भले ही हम मर जाएँ, पर अब हम पीछे नहीं हटेंगे।' उन्होंने इसे '12 सालों का जमा हुआ गुस्सा' बताया और कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों में मध्यमवर्गीय परिवारों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
सत्ता पर राजनीतिक खामियाजे की चेतावनी
ठाकरे ने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए सत्ताधारी दल को जल्द ही राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी निशाना साधा। यह रैली ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है और शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी गठबंधन को मज़बूत करने में लगी है। आने वाले हफ्तों में सत्ताधारी गठबंधन की इन आरोपों पर प्रतिक्रिया राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।