20 अक्टूबर 2026
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उद्धव ठाकरे का फडणवीस को खुला चैलेंज: 'साहस है तो लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती से खींच लाओ'

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उद्धव ठाकरे का फडणवीस को खुला चैलेंज: 'साहस है तो लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती से खींच लाओ'

सारांश

दादर के शिवाजी पार्क से उद्धव ठाकरे ने फडणवीस को सीधी चुनौती दी — लॉरेंस बिश्नोई को दिल्ली के संरक्षण से बाहर निकालो, तब बात करो। टाइगर श्रॉफ हमले, अर्बन नक्सल के दावों और युवा प्रदर्शनकारियों पर बयान के साथ यह रैली महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़ बन गई।

मुख्य बातें

उद्धव ठाकरे ने 20 अक्टूबर 2026 को शिवाजी पार्क, दादर में दशहरा रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लॉरेंस बिश्नोई मुद्दे पर खुली चुनौती दी।
ठाकरे ने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों का दावा है कि उनके पास 70 हज़ार शूटर हैं — फडणवीस में दम है तो उसे साबरमती से खींचकर लाएँ।
टाइगर श्रॉफ पर हमले का हवाला देते हुए फडणवीस को 'चमको' कहा और राज्य की कानून-व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए।
राज्य सरकार के 'अर्बन नक्सल' दावे को खारिज करते हुए कहा कि असली घुसपैठ उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से हो रही है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और युवा प्रदर्शनकारियों को क्रांतिकारी बताया, नक्सली नहीं।
सत्ताधारी दल को आर्थिक नीतियों पर जल्द राजनीतिक खामियाजा भुगतने की चेतावनी दी।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 20 अक्टूबर 2026 को दादर के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में पार्टी की वार्षिक दशहरा रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें सच्ची राजनीतिक इच्छाशक्ति है, तो वे साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को दिल्ली के संरक्षण से बाहर खींचकर लाएँ। विजयादशमी के अवसर पर समर्थकों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए ठाकरे ने राज्य की कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और युवा विरोध प्रदर्शनों पर सत्ताधारी गठबंधन को घेरा।

लॉरेंस बिश्नोई पर सीधी चुनौती

ठाकरे ने कहा, 'साबरमती जेल में बैठा लॉरेंस बिश्नोई है, जिसके गुर्गों का दावा है कि उनके पास 70 हज़ार शूटर हैं। देवेंद्र फडणवीस जी, आपमें सच में हिम्मत है तो साबरमती जाइए, दिल्ली में बैठे अपने 'बॉस' के सामने से लॉरेंस बिश्नोई को खींचकर बाहर निकालिए — फिर बड़ी-बड़ी बातें कीजिए।' यह बयान उस राजनीतिक संदर्भ में आया है जब बिश्नोई गैंग के नाम पर महाराष्ट्र में कई धमकी भरे पत्र और हमले की घटनाएँ सामने आई हैं।

टाइगर श्रॉफ हमले पर तीखा तंज

अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हालिया हमले को लेकर ठाकरे ने मुख्यमंत्री फडणवीस की आलोचना करते हुए उन्हें 'चमको' यानी दिखावा करने वाला करार दिया। उन्होंने कहा, 'टाइगर श्रॉफ पर हमला हुआ और ये तुरंत उनसे मिलने पहुँच गए। यह उनकी किस्मत अच्छी थी कि वे बच गए। अगर गोली जानलेवा साबित होती और पुलिस बाद में बदमाशों को पकड़ती, तो उसका क्या फायदा होता?' उन्होंने पूछा कि नाकेबंदी के बावजूद हमलावर किस तरह अंदर घुस पाए।

'अर्बन नक्सल' बनाम असली घुसपैठ

राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे पर निशाना साधते हुए — जिसमें कथित तौर पर महाराष्ट्र को 'अर्बन नक्सलियों' का गढ़ बताया गया है — ठाकरे ने सवाल उठाया कि शहरों में यह 'अर्बन नक्सलवाद' आखिर है कहाँ? उनका कहना था कि असल में उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से अपराधी महाराष्ट्र में घुसपैठ कर रहे हैं, और सरकार उसे रोकने में नाकाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सड़कों और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवा क्रांतिकारी हैं, नक्सली नहीं।

युवा प्रदर्शनकारियों और सीजेपी को समर्थन

ठाकरे ने अपने संबोधन में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं पहले विरोध प्रदर्शन स्थल पर जाकर घायल युवाओं से मिले थे। उन्होंने कहा, 'किसी के सिर पर चोट थी, एक लड़की के कपड़े फटे हुए थे। मैंने उनसे घर जाने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने जवाब दिया — भले ही हम मर जाएँ, पर अब हम पीछे नहीं हटेंगे।' उन्होंने इसे '12 सालों का जमा हुआ गुस्सा' बताया और कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों में मध्यमवर्गीय परिवारों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

सत्ता पर राजनीतिक खामियाजे की चेतावनी

ठाकरे ने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए सत्ताधारी दल को जल्द ही राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी निशाना साधा। यह रैली ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है और शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी गठबंधन को मज़बूत करने में लगी है। आने वाले हफ्तों में सत्ताधारी गठबंधन की इन आरोपों पर प्रतिक्रिया राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अभी भी इस रैली को महज़ जुमलेबाज़ी तक सीमित कर रही है — जबकि असली सवाल यह है कि महाराष्ट्र में संगठित अपराध और राजनीतिक संरक्षण का रिश्ता कब और कैसे टूटेगा।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उद्धव ठाकरे ने देवेंद्र फडणवीस को क्या चुनौती दी?
ठाकरे ने दशहरा रैली में फडणवीस से कहा कि अगर उनमें सच्ची राजनीतिक इच्छाशक्ति है, तो वे साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को दिल्ली के संरक्षण से बाहर निकालें और फिर बड़ी बातें करें। यह बयान महाराष्ट्र में बिश्नोई गैंग से जुड़ी बढ़ती धमकियों और हमलों की पृष्ठभूमि में आया।
टाइगर श्रॉफ हमले पर ठाकरे ने क्या कहा?
ठाकरे ने कहा कि अभिनेता टाइगर श्रॉफ की किस्मत अच्छी थी कि वे बच गए और मुख्यमंत्री का तुरंत उनसे मिलने जाना महज दिखावा था। उन्होंने सवाल उठाया कि नाकेबंदी के दौरान हमलावर पुलिस की नज़र से कैसे बच निकले।
ठाकरे ने 'अर्बन नक्सल' के दावे पर क्या कहा?
ठाकरे ने राज्य सरकार के उस हलफनामे को चुनौती दी जिसमें कथित तौर पर महाराष्ट्र को 'अर्बन नक्सलियों' का गढ़ बताया गया। उनका कहना था कि असली समस्या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से आने वाले अपराधियों की है, और सड़कों पर प्रदर्शन करने वाले युवा क्रांतिकारी हैं, नक्सली नहीं।
ठाकरे ने अभिजीत दिपके और सीजेपी का ज़िक्र क्यों किया?
ठाकरे ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का नाम लेते हुए युवा प्रदर्शनकारियों से अपनी एकजुटता जताई। उन्होंने बताया कि वे स्वयं पहले विरोध स्थल पर घायल प्रदर्शनकारियों से मिले थे और इन विरोधों को '12 सालों के जमा गुस्से' की अभिव्यक्ति बताया।
इस रैली का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह रैली ऐसे समय में हुई जब शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी गठबंधन को मज़बूत करने की कोशिश में है। ठाकरे की लॉरेंस बिश्नोई, कानून-व्यवस्था और युवा आंदोलन पर टिप्पणियाँ सत्ताधारी गठबंधन के लिए जवाब देना ज़रूरी बनाती हैं, जो आने वाले हफ्तों में राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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