उदित राज: मैंने मुद्दों की बात की, तख्तापलट का नहीं किया जिक्र
सारांश
Key Takeaways
- उदित राज का बयान युवाओं की जिम्मेदारी पर केंद्रित है।
- भाजपा ने उनके बयानों की आलोचना की है।
- नेपाल और भारत की स्थिति में अंतर है।
- युवाओं को मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता उदित राज अपने बयानों के लिए हमेशा चर्चाओं में रहते हैं। हाल ही में, उन्होंने नेपाल के जेन-जी और भारत के जेन-जी की तुलना करते हुए प्रश्न उठाया कि भारत का जेन-जी क्यों उपेक्षित है, जबकि नेपाल में युवाओं ने सत्ता में बदलाव किया। भाजपा इस बयान पर आक्रामक प्रतिक्रिया दे रही है, भाजपा नेताओं का कहना है कि उदित राज के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है।
कांग्रेस नेता उदित राज ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में स्पष्ट किया कि मैंने तख्तापलट का जिक्र नहीं किया, बल्कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की है। वे मुझे मुद्दों से भटकाना चाहते हैं, जबकि मेरा प्रयास इन्हें मुद्दों पर केंद्रित करना है। मेरा एक्स पोस्ट युवाओं को मुद्दों पर लाने के लिए प्रेरित करने वाला है।
उन्होंने आगे कहा कि क्या जेन-जी पहले कभी आंदोलन नहीं करते थे? कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जेन-जी ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। जब मैं छात्र था, तब भी मैंने आंदोलन किए। 1983 में, जेएनयू से 300-400 लोग जेल गए थे, और मैं भी उनमें शामिल था।
उदित राज ने कहा कि कितनी बार पेपर लीक हुए हैं, जैसे कि नीट का पेपर। न्याय नहीं मिला। निजीकरण और आउटसोर्सिंग के कारण नौकरियों में कमी आई है। भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। स्कूल-कॉलेज की फीस बहुत अधिक हो गई है। महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर युवाओं की कोई जिम्मेदारी नहीं है? युवा इस देश में लड़ाई लड़ते थे, सरकारों को झुका देते थे। जहां लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हैं, वहां का युवा उठ खड़ा हुआ। हमारे युवाओं को न्याय के लिए आगे आना चाहिए। यदि लोकतंत्र में धरना-प्रदर्शन नहीं होगा तो फिर क्या होगा? उन्हें ऐसे मुद्दे चाहिए जिनसे लोगों का ध्यान भटक सके। इस मामले का गलत अर्थ न निकाला जाए। नेपाल और हमारी स्थिति में अंतर है।
उन्होंने कहा कि युवा शक्ति का उपयोग राष्ट्र निर्माण में होना चाहिए। भारत का लोकतंत्र पुराना है और युवाओं ने पहले बड़ी लड़ाइयां लड़ी हैं, लेकिन आज उनकी भूमिका चिंताजनक लगती है।