17 अगस्त 2026
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यूजीसी-नेट पुनर्परीक्षा पर राहुल गांधी का हमला: 'एनटीए की गलती की कीमत छात्र क्यों चुकाएं, जवाबदेही तय हो'

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यूजीसी-नेट पुनर्परीक्षा पर राहुल गांधी का हमला: 'एनटीए की गलती की कीमत छात्र क्यों चुकाएं, जवाबदेही तय हो'

सारांश

एनटीए ने प्रश्नपत्र त्रुटियों के चलते समाजशास्त्र, अंग्रेज़ी और वाणिज्य की यूजीसी-नेट परीक्षाएँ रद्द कर सितंबर में पुनर्परीक्षा का ऐलान किया। राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए एनटीए नेतृत्व की जवाबदेही और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'पहला कदम' बताया — छात्रों के वर्षों की मेहनत पर यह संकट प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

एनटीए ने प्रश्नपत्रों में त्रुटियाँ पाए जाने के बाद समाजशास्त्र, अंग्रेज़ी और वाणिज्य की यूजीसी-नेट परीक्षाएँ रद्द कर सितंबर 2026 में पुनर्परीक्षा की घोषणा की।
मूल परीक्षाएँ 22 से 30 जून के बीच आयोजित हुई थीं; करीब दो महीने बाद रद्द की गईं।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि गलती एनटीए की है, लेकिन कीमत छात्रों को चुकानी पड़ रही है।
राहुल गांधी ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'पहला कदम, आखिरी नहीं' बताया और एनटीए नेतृत्व की जवाबदेही माँगी।
उन्होंने मौजूदा परीक्षा व्यवस्था को 'एक्सट्रैक्शन मशीन' कहा जो छात्रों का समय, पैसा और मानसिक स्वास्थ्य छीनती है।
राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुए थे।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार, 17 अगस्त को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की लापरवाही की सज़ा लाखों छात्रों को भुगतनी पड़ रही है। यह प्रतिक्रिया उस घोषणा के बाद आई जिसमें एनटीए ने प्रश्नपत्रों में कई त्रुटियाँ पाए जाने के बाद अंग्रेज़ी, समाजशास्त्र और वाणिज्य विषयों की यूजीसी-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) का पुनः आयोजन करने का निर्णय लिया।

क्या है पूरा मामला

समाजशास्त्र, अंग्रेज़ी और वाणिज्य विषयों की यूजीसी-नेट परीक्षाएँ 22 से 30 जून के बीच आयोजित की गई थीं। करीब दो महीने बाद एनटीए ने इन परीक्षाओं को रद्द कर दिया, क्योंकि कथित तौर पर गलत प्रश्नपत्र सेट किए गए थे और पुराने प्रश्न दोहराए गए थे। अब इन विषयों की पुनर्परीक्षा सितंबर में कराई जाएगी।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में एजेंसी की विफलता को लेकर आलोचनाएँ पहले से बढ़ रही थीं और इस ताज़ा विवाद ने उन्हें और तेज़ कर दिया है।

राहुल गांधी की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'मोदी जी, देखिए आपकी एनटीए ने अभी क्या किया है।' उन्होंने कहा कि हज़ारों अभ्यर्थियों ने वर्षों तक तैयारी की, परीक्षा फॉर्म भरे, शुल्क जमा किया और दूर-दराज़ के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा की — और अब उन्हें सितंबर में दोबारा परीक्षा देनी होगी।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया, 'गलती एनटीए की है, लेकिन इसकी कीमत छात्रों को क्यों चुकानी पड़ रही है?' उन्होंने यह भी पूछा कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुए थे और सरकार एवं एनटीए पर आरोप लगाया कि वे अपनी गलतियों की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं करते।

शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा आरोप

राहुल गांधी ने मौजूदा परीक्षा व्यवस्था को 'एक्सट्रैक्शन मशीन' करार दिया, जो छात्रों का पैसा, समय, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास छीन लेती है और बदले में पर्याप्त अवसर नहीं देती। उन्होंने कहा कि वह कोटा, देहरादून और प्रयागराज में पहले भी यह मुद्दा उठा चुके हैं और आगे भी उठाते रहेंगे।

जवाबदेही की माँग

राहुल गांधी ने कहा कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 'पहला कदम था, आखिरी नहीं।' उन्होंने एनटीए के नेतृत्व की भी जवाबदेही तय करने की माँग की। दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समस्या वे नहीं हैं और विपक्ष उनके अधिकारों के लिए सरकार से जवाब माँगता रहेगा।

आगे क्या होगा

एनटीए की घोषणा के अनुसार तीनों विषयों की पुनर्परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर राष्ट्रव्यापी बहस चल रही है और संसद में भी एनटीए के सुधार की माँगें उठ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक परीक्षा संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, छात्रों का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दो महीने बाद उन्हें बताया गया कि परीक्षा ही गलत थी — यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी है। राहुल गांधी की 'एक्सट्रैक्शन मशीन' वाली टिप्पणी राजनीतिक है, लेकिन उसमें एक असुविधाजनक सच्चाई है — परीक्षा सुधार की माँग सिर्फ विपक्ष की नहीं, लाखों छात्रों की है। असली सवाल यह है कि एनटीए के ढाँचे में जवाबदेही का कोई तंत्र क्यों नहीं है जो गड़बड़ी होने पर स्वतः सक्रिय हो।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूजीसी-नेट परीक्षाएँ क्यों रद्द की गईं?
एनटीए ने समाजशास्त्र, अंग्रेज़ी और वाणिज्य विषयों की यूजीसी-नेट परीक्षाएँ इसलिए रद्द कीं क्योंकि प्रश्नपत्रों में कई त्रुटियाँ पाई गईं और कथित तौर पर पुराने प्रश्न दोहराए गए थे। ये परीक्षाएँ 22 से 30 जून के बीच आयोजित हुई थीं और करीब दो महीने बाद रद्द की गईं।
यूजीसी-नेट की पुनर्परीक्षा कब होगी?
एनटीए की घोषणा के अनुसार तीनों विषयों — समाजशास्त्र, अंग्रेज़ी और वाणिज्य — की पुनर्परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा केंद्रों तक यात्रा करनी होगी।
राहुल गांधी ने एनटीए पर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एनटीए और सरकार अपनी गलतियों की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं करते और गड़बड़ी वाले मामलों में जवाबदेही तय नहीं होती। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुए थे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का इस मामले से क्या संबंध है?
राहुल गांधी ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'पहला कदम, आखिरी नहीं' बताया। उनका आशय था कि सिर्फ मंत्री के जाने से जवाबदेही पूरी नहीं होती — एनटीए नेतृत्व पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
इस विवाद से कौन से छात्र प्रभावित हैं?
वे हज़ारों अभ्यर्थी प्रभावित हैं जिन्होंने समाजशास्त्र, अंग्रेज़ी और वाणिज्य विषयों की यूजीसी-नेट परीक्षा 22 से 30 जून के बीच दी थी। उन्हें अब सितंबर में दोबारा परीक्षा देनी होगी, जिसके लिए उन्हें फिर से तैयारी, यात्रा और समय का बोझ उठाना पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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