यूजीसी-नेट पुनर्परीक्षा पर राहुल गांधी का हमला: 'एनटीए की गलती की कीमत छात्र क्यों चुकाएं, जवाबदेही तय हो'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार, 17 अगस्त को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की लापरवाही की सज़ा लाखों छात्रों को भुगतनी पड़ रही है। यह प्रतिक्रिया उस घोषणा के बाद आई जिसमें एनटीए ने प्रश्नपत्रों में कई त्रुटियाँ पाए जाने के बाद अंग्रेज़ी, समाजशास्त्र और वाणिज्य विषयों की यूजीसी-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) का पुनः आयोजन करने का निर्णय लिया।
क्या है पूरा मामला
समाजशास्त्र, अंग्रेज़ी और वाणिज्य विषयों की यूजीसी-नेट परीक्षाएँ 22 से 30 जून के बीच आयोजित की गई थीं। करीब दो महीने बाद एनटीए ने इन परीक्षाओं को रद्द कर दिया, क्योंकि कथित तौर पर गलत प्रश्नपत्र सेट किए गए थे और पुराने प्रश्न दोहराए गए थे। अब इन विषयों की पुनर्परीक्षा सितंबर में कराई जाएगी।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में एजेंसी की विफलता को लेकर आलोचनाएँ पहले से बढ़ रही थीं और इस ताज़ा विवाद ने उन्हें और तेज़ कर दिया है।
राहुल गांधी की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'मोदी जी, देखिए आपकी एनटीए ने अभी क्या किया है।' उन्होंने कहा कि हज़ारों अभ्यर्थियों ने वर्षों तक तैयारी की, परीक्षा फॉर्म भरे, शुल्क जमा किया और दूर-दराज़ के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा की — और अब उन्हें सितंबर में दोबारा परीक्षा देनी होगी।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया, 'गलती एनटीए की है, लेकिन इसकी कीमत छात्रों को क्यों चुकानी पड़ रही है?' उन्होंने यह भी पूछा कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुए थे और सरकार एवं एनटीए पर आरोप लगाया कि वे अपनी गलतियों की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं करते।
शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा आरोप
राहुल गांधी ने मौजूदा परीक्षा व्यवस्था को 'एक्सट्रैक्शन मशीन' करार दिया, जो छात्रों का पैसा, समय, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास छीन लेती है और बदले में पर्याप्त अवसर नहीं देती। उन्होंने कहा कि वह कोटा, देहरादून और प्रयागराज में पहले भी यह मुद्दा उठा चुके हैं और आगे भी उठाते रहेंगे।
जवाबदेही की माँग
राहुल गांधी ने कहा कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 'पहला कदम था, आखिरी नहीं।' उन्होंने एनटीए के नेतृत्व की भी जवाबदेही तय करने की माँग की। दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समस्या वे नहीं हैं और विपक्ष उनके अधिकारों के लिए सरकार से जवाब माँगता रहेगा।
आगे क्या होगा
एनटीए की घोषणा के अनुसार तीनों विषयों की पुनर्परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर राष्ट्रव्यापी बहस चल रही है और संसद में भी एनटीए के सुधार की माँगें उठ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक परीक्षा संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, छात्रों का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।