17 अगस्त 2026
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यूजीसी-नेट परीक्षा में अनियमितताओं पर एनएसयूआई का एनटीए कार्यालय के बाहर विरोध, एनटीए बैन की मांग

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यूजीसी-नेट परीक्षा में अनियमितताओं पर एनएसयूआई का एनटीए कार्यालय के बाहर विरोध, एनटीए बैन की मांग

सारांश

यूजीसी-नेट में कथित गड़बड़ियों और परीक्षा रद्द होने के बाद एनएसयूआई ने एनटीए कार्यालय को घेरा। राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कॉमर्स पेपर में अनियमितता और 2024 के प्रश्न दोबारा पूछे जाने का आरोप लगाया। संगठन ने एनटीए पर प्रतिबंध तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

एनएसयूआई ने 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित एनटीए कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कॉमर्स, सोशियोलॉजी और इंग्लिश के प्रश्नपत्रों में अनियमितता का आरोप लगाया।
आरोप है कि कुछ प्रश्न वर्ष 2024 के पुराने प्रश्नपत्रों से दोबारा पूछे गए।
यूजीसी-नेट परीक्षा आयोजन के करीब दो महीने बाद रद्द की गई थी, जिसे छात्रों के साथ अन्याय बताया गया।
एनएसयूआई ने एनटीए पर प्रतिबंध लगाए जाने तक संघर्ष जारी रखने की घोषणा की।

नई दिल्ली में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने 17 अगस्त 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यूजीसी-नेट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के बीच यह प्रदर्शन हुआ, जिसमें एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता शामिल रहे।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

विनोद जाखड़ ने परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स सहित कई विषयों की परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉमर्स के प्रश्नपत्र में गड़बड़ी पाई गई है और कुछ प्रश्न वर्ष 2024 के पुराने प्रश्नपत्रों से दोबारा पूछे गए।

जाखड़ ने कहा कि पहले नीट के छात्र परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे, और अब यूजीसी-नेट के अभ्यर्थी भी एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उनके अनुसार, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

पूर्व में परीक्षा रद्द होने का संदर्भ

एनएसयूआई ने याद दिलाया कि यूजीसी-नेट की परीक्षा आयोजित होने के करीब दो महीने बाद रद्द कर दी गई थी। संगठन का कहना है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी और उसके बाद रद्दीकरण का सबसे बड़ा खामियाजा उन छात्रों को भुगतना पड़ता है जो वर्षों की मेहनत के बाद इन परीक्षाओं में बैठते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है।

महिला प्रदर्शनकारियों की आवाज़

प्रदर्शन में शामिल एक महिला कार्यकर्ता ने कहा, हमें अपने अधिकारों की जानकारी है। हम किसी से डरने वाले नहीं हैं। नारी शक्ति पीछे नहीं हटेगी और हम आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे। यह बयान उस व्यापक भावना को दर्शाता है जो प्रदर्शनकारियों में देखी गई।

राजनीतिक आयाम

जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार छात्रों की आवाज़ उठाते रहे हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार नहीं दिखती। एनएसयूआई ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे 'नाकाम' करार दिया।

आगे की माँगें और रणनीति

एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि जब तक एनटीए पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। संगठन ने एनटीए की जवाबदेही तय कराने और छात्रों को न्याय दिलाने को अपनी प्राथमिकता बताया है। गौरतलब है कि यह मुद्दा केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रहा — देशभर के युवा परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लाखों छात्रों के एक वर्ष की मेहनत को शून्य करना है। असली सवाल यह है कि क्या एनटीए के ढाँचे में संरचनात्मक सुधार होगा या केवल राजनीतिक बयानबाज़ी से काम चलाया जाएगा। जब तक प्रश्नपत्र निर्माण, लीक-रोधी तंत्र और स्वतंत्र ऑडिट की व्यवस्था नहीं होती, ऐसे आंदोलन बार-बार उठते रहेंगे।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएसयूआई ने एनटीए कार्यालय के बाहर प्रदर्शन क्यों किया?
एनएसयूआई ने यूजीसी-नेट परीक्षा में कथित अनियमितताओं — विशेषकर कॉमर्स पेपर में गड़बड़ी और 2024 के प्रश्न दोबारा पूछे जाने के आरोपों — के विरोध में 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित एनटीए कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। संगठन एनटीए की जवाबदेही और उस पर प्रतिबंध की माँग कर रहा है।
यूजीसी-नेट परीक्षा में क्या गड़बड़ी के आरोप हैं?
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के अनुसार, कॉमर्स के प्रश्नपत्र में अनियमितताएं पाई गई हैं और कुछ प्रश्न वर्ष 2024 के पुराने प्रश्नपत्रों से दोबारा पूछे गए। सोशियोलॉजी और इंग्लिश विषयों की परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
यूजीसी-नेट परीक्षा पहले कब रद्द की गई थी?
एनएसयूआई के बयान के अनुसार, यूजीसी-नेट परीक्षा आयोजित होने के करीब दो महीने बाद रद्द कर दी गई थी। संगठन का कहना है कि यह छात्रों की वर्षों की मेहनत और भविष्य के साथ अन्याय है।
एनएसयूआई की प्रमुख माँगें क्या हैं?
एनएसयूआई की प्रमुख माँग है कि एनटीए पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। संगठन ने यह भी माँग की है कि सरकार संसद में इन मुद्दों पर चर्चा करे और छात्रों को न्याय दिलाया जाए।
इस विरोध प्रदर्शन में कौन शामिल था?
प्रदर्शन में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र, कार्यकर्ता और महिला प्रदर्शनकारी शामिल हुए। महिला प्रदर्शनकारियों ने भी छात्र अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
राष्ट्र प्रेस
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