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यूपी मदरसों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य, धार्मिक नेताओं ने बताया सकारात्मक कदम

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यूपी मदरसों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य, धार्मिक नेताओं ने बताया सकारात्मक कदम

सारांश

उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा में बड़ा बदलाव — आधार-आधारित बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य होने से शिक्षकों और छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली समेत धार्मिक नेताओं ने इसे अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में ज़रूरी कदम बताया।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने 16 जून 2026 को सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य की।
सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इसे आवश्यक और सकारात्मक कदम बताया।
जमीयत हिमायतुल इस्लाम के अध्यक्ष मौलाना कारी अबरार जमाल ने मदरसों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की वकालत की।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर के अनुसार, मदरसों से लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह निर्णय लिया गया।

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने 16 जून 2026 को राज्य के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य कर दी है। परिषद ने इस आशय के निर्देश राज्यभर के सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को जारी कर दिए हैं, जिससे मदरसा शिक्षा में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके।

नई व्यवस्था में क्या बदलेगा

नई प्रणाली के तहत मदरसों में प्रत्येक शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी की दैनिक उपस्थिति बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से दर्ज की जाएगी, जो सीधे आधार कार्ड से जुड़ी होगी। यह व्यवस्था मैन्युअल उपस्थिति रजिस्टर की जगह लेगी, जिससे अनुपस्थिति और फर्जी हाजिरी की शिकायतों पर अंकुश लगने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया कि मदरसों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है और विभाग की ओर से आवश्यक आदेश जारी कर दिए गए हैं।

धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया

लखनऊ स्थित इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आवश्यक और सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू होने से शिक्षकों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित होगी, कक्षाएं समय पर संचालित होंगी और शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन बढ़ेगा। उनके अनुसार, मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है।

जमीयत हिमायतुल इस्लाम के अध्यक्ष मौलाना कारी अबरार जमाल ने भी इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती है कि मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाएं, तो यह स्वागतयोग्य पहल है। उन्होंने यह भी कहा कि मदरसों में देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के विचार का संदर्भ

मौलाना अबरार जमाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में लैपटॉप और दूसरे हाथ में कुरान होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि इस सोच को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि धार्मिक नेतृत्व का एक वर्ग मदरसा शिक्षा को आधुनिक और राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने के पक्ष में है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा सुधार की दिशा में यह कदम ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। बायोमेट्रिक प्रणाली के सफल क्रियान्वयन के लिए मदरसों में तकनीकी अवसंरचना और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी। आने वाले महीनों में इस व्यवस्था का ज़मीनी स्तर पर अनुपालन ही इसकी वास्तविक सफलता का पैमाना बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — ग्रामीण और अर्ध-शहरी मदरसों में तकनीकी अवसंरचना और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी एक बड़ी बाधा बन सकती है। धार्मिक नेताओं का स्वागत उत्साहजनक है, लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि अनुपालन की ज़िम्मेदारी किस पर होगी और उल्लंघन पर क्या दंड का प्रावधान है — इन बिंदुओं पर स्पष्टता अभी नहीं आई है। मदरसा सुधार की यह पहल तब तक अधूरी रहेगी जब तक इसके साथ शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण की ठोस योजना न हो।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी मदरसों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक हाजिरी क्या है?
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा लागू की गई यह व्यवस्था है जिसमें मदरसों के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं की दैनिक उपस्थिति आधार कार्ड से जुड़ी बायोमेट्रिक मशीन के ज़रिए दर्ज की जाएगी। इससे मैन्युअल उपस्थिति रजिस्टर की जगह डिजिटल प्रणाली लागू होगी।
यह आदेश कब और किसने जारी किया?
16 जून 2026 को उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने यह आदेश जारी किया और सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए। राज्य सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मदरसों से लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह फैसला लिया गया।
धार्मिक नेताओं ने इस फैसले पर क्या कहा?
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इसे आवश्यक और सकारात्मक कदम बताया। जमीयत हिमायतुल इस्लाम के अध्यक्ष मौलाना कारी अबरार जमाल ने भी स्वागत करते हुए कहा कि मदरसों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इस व्यवस्था से मदरसा शिक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
बायोमेट्रिक प्रणाली से शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी, कक्षाएं समय पर संचालित होंगी और अनुशासन बढ़ेगा। धार्मिक नेताओं के अनुसार इससे मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में सुधार होगा।
क्या सभी मदरसों पर यह नियम लागू होगा?
यह आदेश उत्तर प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों पर लागू होगा। परिषद ने जिला स्तर पर अधिकारियों को इसके क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी सौंपी है।
राष्ट्र प्रेस
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