यूपी के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह, 1.42 करोड़ छात्र जुड़े
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों में 1 नवंबर से 7 नवंबर 2026 तक ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह मनाया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर के लगभग 1.42 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने और टिकाऊ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ जिम्मेदार पर्यावरण नागरिक बनाना है।
मिशन लाइफ के सात विषयों पर केंद्रित कार्यक्रम
इस सप्ताह की संरचना मिशन लाइफ के सात विषयों पर आधारित है, जिसमें प्रत्येक दिन एक अलग पर्यावरणीय थीम पर गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। 1 नवंबर को स्वस्थ जीवनशैली, 2 नवंबर को ऊर्जा बचत और 3 नवंबर को जल संरक्षण पर गतिविधियाँ आयोजित की जा चुकी हैं। 4 नवंबर को टिकाऊ खाद्य प्रणालियों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए।
आगामी दिनों में 5 नवंबर को एकल उपयोग प्लास्टिक से दूरी, 6 नवंबर को ई-कचरा कम करने और 7 नवंबर को कचरा प्रबंधन पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ईको क्लबों की भूमिका इस पूरे आयोजन में केंद्रीय बताई जा रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया और उद्देश्य
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा, 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह के माध्यम से विद्यार्थियों को ऊर्जा और जल संरक्षण, प्लास्टिक के कम उपयोग तथा कचरा प्रबंधन जैसी आदतों से जोड़ा जा रहा है। बच्चों में आज विकसित होने वाली ये आदतें भविष्य में पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बनेंगी।'
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, मोनिका रानी ने बताया कि ईको क्लबों और विद्यार्थियों की सहभागिता से पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यार्थियों को यह संदेश अपने परिवार और समुदाय तक पहुँचाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
गतिविधियाँ और क्रियान्वयन
विद्यालयों में मिशन लाइफ की शपथ, पोस्टर निर्माण, रचनात्मक गतिविधियाँ, कार्यशालाएँ और जागरूकता अभियान आयोजित किए जा रहे हैं। सप्ताह की गतिविधियों से संबंधित सूचना-शिक्षा-संचार सामग्री निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। विद्यार्थियों और शिक्षकों की संयुक्त सहभागिता से ऊर्जा बचत, जल संरक्षण, प्लास्टिक के विकल्पों और कचरे के पृथक्करण जैसे विषयों पर संदेश प्रसारित किया जा रहा है।
आम जनता पर असर
यह कार्यक्रम केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं है — विद्यार्थियों को इन पर्यावरण-अनुकूल आदतों को अपने घर और आसपास के समुदाय में भी फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। गौरतलब है कि 1.42 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी से यह कार्यक्रम परिवार और समाज के व्यापक स्तर पर पर्यावरण जागरूकता का माध्यम बन सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई राज्य वायु प्रदूषण और जल संकट जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रहे हैं।