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यूपी चुनाव 2027 से पहले श्रावस्ती का लेखा-जोखा: 2022 में भिनगा पर सपा, श्रावस्ती सीट पर भाजपा की जीत

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यूपी चुनाव 2027 से पहले श्रावस्ती का लेखा-जोखा: 2022 में भिनगा पर सपा, श्रावस्ती सीट पर भाजपा की जीत

सारांश

2022 में श्रावस्ती जिले की दोनों सीटों पर अलग-अलग नतीजे आए — भिनगा में सपा की इंद्राणी देवी ने 13,574 वोटों की बड़ी जीत दर्ज की, तो श्रावस्ती सीट पर भाजपा के राम फेरन ने महज 1,457 मतों से बाज़ी मारी। 2027 से पहले यह सीट-दर-सीट समीकरण दोनों दलों की रणनीति का केंद्र बनेगा।

मुख्य बातें

भिनगा सीट पर सपा की इंद्राणी देवी ने 1,03,661 मत पाकर भाजपा के पदमसेन चौधरी को 13,574 वोटों से हराया।
श्रावस्ती सीट पर भाजपा के राम फेरन ने 98,640 मत पाकर सपा के मोहम्मद असलम को महज 1,457 वोटों के अंतर से पराजित किया।
बसपा ने भिनगा में 21,547 और श्रावस्ती में 41,026 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रहते हुए दोनों सीटों पर अपना प्रभाव बनाए रखा।
श्रावस्ती जिले में 289-भिनगा और 290-श्रावस्ती — कुल दो विधानसभा क्षेत्र हैं; जिले का गठन 22 मई 1997 को हुआ था।
2027 के चुनाव में बसपा के मतों का झुकाव और स्थानीय मुद्दे दोनों सीटों पर परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, सियासी दल श्रावस्ती जिले की दोनों विधानसभा सीटों के 2022 के नतीजों का गहन विश्लेषण कर रहे हैं। 289-भिनगा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) की उम्मीदवार इंद्राणी देवी ने 13,574 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जबकि 290-श्रावस्ती विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राम फेरन ने सपा को महज 1,457 वोटों के अत्यंत कड़े मुकाबले में पराजित किया। इस तरह एक ही जिले की दो सीटों पर दो अलग-अलग दलों को जीत मिली, जो 2027 के लिए दोनों पार्टियों के समक्ष अलग-अलग चुनौतियाँ और अवसर दोनों पेश करती है।

भिनगा विधानसभा सीट: सपा की निर्णायक बढ़त

भिनगा सीट पर 2022 के चुनाव में सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला हुआ। सपा की उम्मीदवार इंद्राणी देवी ने कुल 1,03,661 मत हासिल किए, जबकि भाजपा के पदमसेन चौधरी को 90,087 वोट मिले। 13,574 मतों के अंतर से मिली यह जीत जिले में सपा की सबसे मज़बूत उपस्थिति का प्रतीक बनी।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार अलीमुद्दीन 21,547 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रत्याशी हम्मद रमजान को 4,073 वोट प्राप्त हुए। इस सीट पर सम्यक पार्टी के रामरूप समेत अन्य उम्मीदवार भी मैदान में थे।

चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय विकास, रोज़गार, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएँ और जातीय समीकरण प्रमुख मुद्दे बने रहे। इन मुद्दों पर इंद्राणी देवी की पकड़ ने उन्हें निर्णायक बढ़त दिलाई।

श्रावस्ती विधानसभा सीट: भाजपा की कड़े संघर्ष के बाद जीत

290-श्रावस्ती सीट का मुकाबला 2022 में अत्यंत रोमांचक रहा। भाजपा के उम्मीदवार राम फेरन को कुल 98,640 मत मिले, जबकि सपा के मोहम्मद असलम ने 97,183 वोट हासिल किए। दोनों प्रत्याशियों के बीच केवल 1,457 मतों का फ़र्क रहा, जो इस सीट की विजय को अत्यधिक संवेदनशील बना देता है।

बसपा की उम्मीदवार नीतू मिश्रा 41,026 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। कांग्रेस के उम्मीदवार मुहम्मद रमजान को 4,655 मत मिले। जन अधिकार पार्टी के मोल्हू राम समेत अन्य प्रत्याशी भी इस सीट पर मैदान में थे।

रोज़गार, विकास कार्य, किसानों की दिक्कतें, कानून-व्यवस्था और स्थानीय राजनीतिक समीकरण यहाँ के चुनाव के अहम मुद्दे रहे। बसपा के 41,026 वोट यह भी बताते हैं कि तीसरे मोर्चे की भूमिका इस सीट पर निर्णायक हो सकती है।

श्रावस्ती जिले का भौगोलिक और ऐतिहासिक परिचय

श्रावस्ती उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिला है, जो भारत-नेपाल सीमा से सटा हुआ है और पड़ोसी जिले बहराइच से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बौद्ध तीर्थस्थली के रूप में विश्वविख्यात यह जिला भगवान बुद्ध से जुड़े अनेक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का केंद्र है।

जिले का गठन 22 मई 1997 को हुआ था। हालाँकि 13 जनवरी 2004 को शासन ने इसका अस्तित्व समाप्त कर दिया था, लेकिन जून 2004 में इसे पुनः जिले के रूप में स्थापित किया गया। राजनीतिक दृष्टि से इस जिले में 289-भिनगा और 290-श्रावस्ती — कुल दो विधानसभा क्षेत्र हैं।

2027 के लिए क्या है संकेत

गौरतलब है कि 2022 में एक ही जिले की दो सीटों पर दो अलग-अलग दलों का जीतना यह दर्शाता है कि श्रावस्ती में मतदाताओं ने स्थानीय उम्मीदवार और मुद्दों को राष्ट्रीय लहर से ऊपर रखा। भिनगा में सपा की 13,574 मतों की बढ़त जहाँ पार्टी को आत्मविश्वास देती है, वहीं श्रावस्ती सीट पर भाजपा की 1,457 मतों की महीन जीत उसे 2027 में कोई भी ढील बरतने से रोकती है।

यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब दोनों प्रमुख दल अपने-अपने जातीय और सामाजिक गठबंधन को पुनर्गठित करने में लगे हैं। बसपा के मतों का भविष्य में झुकाव — जो भिनगा में 21,547 और श्रावस्ती में 41,026 रहे — अगले चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश की उस बहुस्तरीय राजनीति का प्रतिबिंब है जहाँ जातीय समीकरण, स्थानीय उम्मीदवार की साख और बसपा के 'वोट ट्रांसफर' की दिशा एक ही जिले में दो विपरीत नतीजे दे सकती है। भाजपा के लिए श्रावस्ती सीट पर 1,457 मतों की जीत एक खतरे की घंटी है — यह अंतर बसपा के मात्र 3.5% वोट शिफ्ट होने से पलट सकता है। सपा के लिए भिनगा की मज़बूत पकड़ उत्साहजनक है, लेकिन 2027 में ओबीसी और मुस्लिम वोटों के समेकन पर उसकी पूरी रणनीति टिकी होगी। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इस जिले में बसपा की 'वोट बैंक' भूमिका अभी भी निर्णायक है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2022 में भिनगा विधानसभा सीट पर किसने जीत दर्ज की?
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भिनगा सीट पर सपा की इंद्राणी देवी ने 1,03,661 मत पाकर भाजपा के पदमसेन चौधरी को 13,574 वोटों के अंतर से हराया। यह जिले में सपा की सबसे निर्णायक जीत रही।
श्रावस्ती विधानसभा सीट पर 2022 में कितने मतों के अंतर से जीत हुई?
श्रावस्ती सीट पर भाजपा के राम फेरन ने 98,640 मत पाकर सपा के मोहम्मद असलम (97,183 मत) को केवल 1,457 वोटों के बेहद कड़े मुकाबले में हराया। यह जिले के दोनों सीटों में सबसे नज़दीकी परिणाम था।
2027 के यूपी चुनाव में श्रावस्ती का जातीय-राजनीतिक समीकरण क्या होगा?
2022 के नतीजों के आधार पर बसपा के मत — भिनगा में 21,547 और श्रावस्ती में 41,026 — किसी भी दल की जीत-हार तय कर सकते हैं। जिस दिशा में ये मत जाएँगे, वह 2027 में दोनों सीटों का परिणाम बदल सकता है।
श्रावस्ती जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं और कौन-कौन सी हैं?
श्रावस्ती जिले में कुल दो विधानसभा सीटें हैं — 289-भिनगा और 290-श्रावस्ती। जिले का गठन 22 मई 1997 को हुआ था और जून 2004 में इसे पुनः स्थापित किया गया।
श्रावस्ती जिला भौगोलिक रूप से कहाँ स्थित है?
श्रावस्ती उत्तर प्रदेश का सीमावर्ती जिला है जो भारत-नेपाल सीमा से सटा हुआ है और बहराइच जिले से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों के कारण भी प्रसिद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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