अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026: डेमोक्रेट्स ने दोनों सदन जीते, ट्रंप ने कम मतदान को बताया हार का कारण
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 नवंबर 2026 को डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट — कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने पर बधाई दी। साथ ही उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए रिपब्लिकन समर्थकों के कम मतदान और कुछ उम्मीदवारों को लेकर मतदाताओं की नाराज़गी को ज़िम्मेदार ठहराया। 3 नवंबर को हुए इन चुनावों ने वॉशिंगटन की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और रिपब्लिकन हार का विश्लेषण
चुनावी रात सीबीएस न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'मेरा संदेश है कि डेमोक्रेट्स को बधाई। मैं देश के हित में उनके साथ काम करने के लिए तैयार हूं।' हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह खुद चुनावी बैलेट पर होते, तो रिपब्लिकन पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहता।
ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए काफी मेहनत की, लेकिन उसका चुनावी फायदा नहीं मिल पाया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राष्ट्रपति के तौर पर उनके पास वीटो की संवैधानिक शक्ति बरकरार है और डेमोक्रेट्स को कोई भी कानून पास कराने के लिए व्हाइट हाउस के साथ बातचीत करनी होगी।
गौरतलब है कि मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी का नुकसान उठाना ऐतिहासिक रूप से सामान्य रहा है — हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने भी इसी ऐतिहासिक प्रवृत्ति का हवाला दिया। लेकिन इस बार दोनों सदनों का नियंत्रण एक साथ खोना रिपब्लिकन नेतृत्व के लिए बड़ा झटका है।
डेमोक्रेट्स की जीत और आगे के वादे
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने वॉशिंगटन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस जीत को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा, 'सभी मुश्किलों के बावजूद हमने सीनेट जीत ली है। राहत अब आने वाली है।' शूमर के अनुसार बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च और सरकार के प्रति लोगों की नाराज़गी ने डेमोक्रेट्स की जीत में बड़ी भूमिका निभाई।
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफरीज — जो सदन के पहले अश्वेत स्पीकर बनने की स्थिति में हैं — ने समर्थकों से कहा, 'यह बदलाव का चुनाव है।' जेफरीज ने आवास, किराना और ईंधन की कीमतें कम करने, स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा बहाल करने और प्रशासन से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का वादा किया।
डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी (DNC) के अध्यक्ष केन मार्टिन ने चुनाव नतीजों को जनता का स्पष्ट संदेश बताया। उन्होंने कहा कि लोग महंगाई, स्वास्थ्य सेवा, आव्रजन और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं। मार्टिन ने यह भी कहा कि डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और ईरान से जुड़े फैसलों को चुनौती देंगे।
रिपब्लिकन पार्टी में आत्ममंथन और नेतृत्व पर सवाल
हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने बहुमत खोने को स्वीकार किया, लेकिन चेतावनी दी कि कांग्रेस की निगरानी शक्तियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से नहीं होना चाहिए। सीनेट में रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून ने अपनी पार्टी की कर नीतियों, सीमा सुरक्षा, न्यायिक नियुक्तियों और आर्थिक कदमों का बचाव किया।
रिपब्लिकन सांसद राल्फ नॉर्मन ने इस नतीजे को पार्टी के लिए 'चेतावनी की घंटी' बताया। अगले सप्ताह होने वाले पार्टी नेतृत्व चुनाव में जॉनसन की भूमिका और आगे की रणनीति पर गंभीर चर्चा की संभावना है।
आम जनता पर असर और 'विभाजित सरकार' की स्थिति
इन चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास व्हाइट हाउस और कांग्रेस के दोनों सदनों का एकछत्र नियंत्रण था। अब जनवरी 2027 से अमेरिका में 'विभाजित सरकार' की स्थिति बन जाएगी। कांग्रेस की समितियों, जांच प्रक्रियाओं और विधायी कार्यक्रमों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण रहेगा, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप के पास कार्यकारी शक्तियाँ और वीटो का अधिकार बना रहेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर जनता में व्यापक असंतोष है। डेमोक्रेट्स के सत्ता में आने के बाद सरकारी खर्च, स्वास्थ्य नीति और विदेश नीति के मोर्चे पर तीखी खींचतान की उम्मीद है।