गिरिराज सिंह का कांग्रेस पर हमला: 'वंदे मातरम' विवाद में मुस्लिम लीग के दबाव का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 20 अगस्त को कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी 'वंदे मातरम' के केवल दो पद गाने के अपने रुख के ज़रिये मुस्लिम लीग के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर सीधे निशाना साधा। यह विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए 'वंदे मातरम' गायन के एक वायरल वीडियो के बाद भड़का।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए 'वंदे मातरम' गायन के वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा, 'कांग्रेस दफ्तर में 'वंदे मातरम' के पूरे गायन के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के चेहरे देखिए — ऐसा लग रहा था जैसे कोई उन्हें ज़हर पिला रहा हो।' यह बयान राष्ट्रीय गान की प्रासंगिकता और राजनीतिक दलों के रुख पर एक नई बहस छेड़ने वाला रहा।
कांग्रेस पर गंभीर आरोप
गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब अपने मूल राष्ट्रवादी सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने कहा, 'यह गांधी की कांग्रेस नहीं है — यह सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कांग्रेस है।' उन्होंने पार्टी को 'मुस्लिम लीग वाली कांग्रेस' करार देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में राहुल गांधी के बयान कभी भारत के पक्ष में नहीं रहे। गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को लेकर राजनीतिक विवाद नया नहीं है — आज़ादी के समय से ही इस गीत को लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद रहे हैं।
सोनिया और राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमला
गिरिराज सिंह ने सोनिया गांधी की नागरिकता का मुद्दा भी उठाया और कहा, 'सोनिया गांधी ने शादी के 15 साल तक भारतीय नागरिकता नहीं ली, तो उनको भारत से प्यार कैसे हो सकता है?' उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी अभी भी दोहरी नागरिकता के मामले में अदालत में उलझे हुए हैं। ये आरोप BJP की ओर से पहले भी लगाए जाते रहे हैं, हालाँकि कांग्रेस इन्हें राजनीति से प्रेरित बताती है।
मणिशंकर अय्यर के बयान पर पलटवार
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कथित तौर पर कहा था कि सरकार ने मुसलमानों के प्रति नफरत के चलते 'वंदे मातरम' का पूरा पाठ अनिवार्य किया है। इस पर गिरिराज सिंह ने करारा जवाब दिया और कहा, 'वह एक कठपुतली हैं — राहुल गांधी उन्हें जो सिखाते हैं, वह वही कहते हैं।' आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं।
आगे क्या
'वंदे मातरम' को लेकर यह राजनीतिक विवाद संसद के आगामी सत्र तक और गहरा हो सकता है। BJP और कांग्रेस दोनों ही इस मुद्दे को राष्ट्रवाद की परिभाषा से जोड़कर अपने-अपने मतदाता आधार को साधने की कोशिश में हैं। इस पूरी बहस का असर आगामी राज्य चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।