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भगवान राम टिप्पणी: वाराणसी अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया

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भगवान राम टिप्पणी: वाराणसी अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया

सारांश

वाराणसी की विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ भगवान राम को 'काल्पनिक पात्र' बताने की कथित टिप्पणी पर शिकायत को पुनर्जीवित किया। रिविजन कोर्ट ने एसीजेएम का पूर्व आदेश रद्द कर मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए भेजा — सांसदों के संसद से बाहर के बयानों पर विशेषाधिकार की सीमा अब केंद्रीय सवाल है।

मुख्य बातें

वाराणसी की विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने 10 जून 2026 को राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया।
शिकायत 21 अप्रैल 2025 को ब्राउन यूनिवर्सिटी, बोस्टन में भगवान राम को कथित तौर पर 'काल्पनिक पात्र' बताने वाले बयान से संबंधित है।
एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने एसीजेएम का 27 मई का वह आदेश रद्द किया जिसमें शिकायत खारिज की गई थी।
अदालत ने माना कि बयान संसदीय कार्यवाही के बाहर दिया गया था, इसलिए लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार आवश्यक है।
शिकायत में बीएनएस की धारा 196, 351 और 353 के तहत कार्रवाई की माँग की गई है।

वाराणसी की विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने बुधवार, 10 जून 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को पुनर्जीवित कर दिया। यह शिकायत अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी, बोस्टन में 21 अप्रैल 2025 को हुई एक परिचर्चा के दौरान भगवान राम को कथित तौर पर 'पौराणिक और काल्पनिक पात्र' बताने वाले उनके बयान से जुड़ी है।

मुख्य घटनाक्रम

एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (एमपी/एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने वकील हरिशंकर पांडे की क्रिमिनल रिविजन याचिका स्वीकार करते हुए एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के उस पूर्व आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिकायत को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया गया था।

रिविजन कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना जल्दबाजी में शिकायत निरस्त की थी। अदालत ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस भेजते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत उचित न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाए।

स्पीकर की मंजूरी का विवाद

27 मई को एसीजेएम ने यह कहते हुए शिकायत खारिज की थी कि मौजूदा सांसद के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पूर्वानुमति आवश्यक है। शिकायतकर्ता पांडे ने इसी निष्कर्ष को रिविजन याचिका में चुनौती दी थी।

स्पेशल जज ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि राहुल गांधी का कथित बयान संसदीय कार्यवाही के दौरान नहीं, बल्कि अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में एक सार्वजनिक परिचर्चा के दौरान दिया गया था — इसलिए संसदीय विशेषाधिकार और स्पीकर की मंजूरी की अनिवार्यता का प्रश्न इस संदर्भ में अलग ढंग से विचारणीय है।

शिकायत में क्या आरोप हैं

वकील पांडे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि राहुल गांधी की उक्त टिप्पणियाँ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196, 351 और 353 के तहत दंडनीय अपराध हैं। उनका तर्क है कि इस बयान से सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं और सामाजिक अशांति फैली।

गौरतलब है कि राहुल गांधी रायबरेली से लोकसभा सदस्य हैं और वर्तमान में विपक्ष के नेता के रूप में कार्यरत हैं। यह शिकायत उनके खिलाफ दर्ज उन कई कानूनी मामलों में से एक है जो हाल के वर्षों में उनके सार्वजनिक बयानों को लेकर विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।

आगे क्या होगा

रिविजन कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामला एसीजेएम के समक्ष पुनः विचार के लिए भेजा गया है। मजिस्ट्रेट को अब बीएनएसएस के प्रावधानों के अनुसार शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई करनी होगी और शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा। इस प्रकरण से जुड़े कानूनी और संवैधानिक प्रश्न — विशेषतः सांसदों के संसद से बाहर के बयानों पर विशेषाधिकार की सीमा — आगे की सुनवाई में केंद्रीय मुद्दे बनेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

विदेश में दिए गए बयान पर भारतीय दंड विधान लागू होता है और क्या उस पर मुकदमा चलाने के लिए स्पीकर की मंजूरी जरूरी है? रिविजन कोर्ट ने इस बिंदु को अनुत्तरित छोड़ते हुए केवल प्रक्रियागत खामी को आधार बनाया है, जो दर्शाता है कि असली कानूनी लड़ाई अभी शुरू होनी है। विपक्ष के नेता के खिलाफ इस प्रकार की शिकायतें राजनीतिक ध्रुवीकरण के उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं जिसमें अदालतों को राजनीतिक विमर्श के मैदान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है — एक प्रवृत्ति जिस पर न्यायपालिका ने स्वयं कई बार चिंता जताई है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ क्या मामला है?
वाराणसी की विशेष एमपी/एमएलए अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने 21 अप्रैल 2025 को अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान राम को 'पौराणिक और काल्पनिक पात्र' बताया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं।
रिविजन कोर्ट ने एसीजेएम का आदेश क्यों रद्द किया?
रिविजन कोर्ट ने पाया कि एसीजेएम ने शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना जल्दबाजी में शिकायत खारिज कर दी थी। अदालत ने यह भी माना कि बयान संसदीय कार्यवाही के बाहर दिया गया था, इसलिए लोकसभा स्पीकर की मंजूरी की अनिवार्यता का प्रश्न नए सिरे से विचारणीय है।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
शिकायतकर्ता हरिशंकर पांडे ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196, 351 और 353 के तहत कार्रवाई की माँग की है। ये धाराएँ धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सामाजिक अशांति फैलाने से संबंधित अपराधों को कवर करती हैं।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
रिविजन कोर्ट के आदेश के बाद मामला एसीजेएम के समक्ष पुनः विचार के लिए भेजा गया है। मजिस्ट्रेट को अब बीएनएसएस के प्रावधानों के तहत शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई करनी होगी और शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने का मौका देना होगा।
क्या सांसद के खिलाफ मुकदमे के लिए लोकसभा स्पीकर की मंजूरी जरूरी है?
एसीजेएम ने पहले यह माना था कि मौजूदा सांसद के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी आवश्यक है। हालाँकि रिविजन कोर्ट ने इस बिंदु पर पुनर्विचार का निर्देश दिया है, क्योंकि कथित बयान संसदीय कार्यवाही के दौरान नहीं, बल्कि विदेश में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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