वरुड में 16 साल की बेटी पर शक: मां और सौतेले पिता ने बेल्ट से पीटा, बाल काटे — दोनों गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- 16 वर्षीय नाबालिग को उसकी मां और सौतेले पिता ने शक के आधार पर बेल्ट से पीटा और ट्रिमर से बाल काटे।
- घटना मिर्ची प्लॉट, वरुड, अमरावती की है; 21 अप्रैल 2025 को पीड़िता के बयान पर FIR दर्ज हुई।
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 245/26, 118(1), 115(2), 351(2), 352 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट धारा 75 के तहत मामला दर्ज।
- दोनों आरोपियों को 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया; जांच महिला SI पूजा माली को सौंपी गई।
- पीड़िता अब अमरावती चाइल्ड प्रोटेक्शन होम में सुरक्षित है, जहां काउंसलिंग जारी है।
- पुलिस ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अन्य व्यक्ति इस क्रूरता में संलिप्त पाया गया तो उसके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
अमरावती, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमरावती जिले के वरुड इलाके में एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ उसकी सगी मां और सौतेले पिता ने बेहद क्रूर और अमानवीय व्यवहार किया। महज शक के आधार पर दोनों ने बच्ची को बेल्ट से बुरी तरह पीटा और इलेक्ट्रॉनिक ट्रिमर मशीन से उसके बाल काट दिए। पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर टीम की त्वरित कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्या हुआ वरुड में — पूरा घटनाक्रम
पीड़िता मिर्ची प्लॉट, वरुड में अपनी मां और सौतेले पिता के साथ रहती थी। परिवार के दोनों सदस्य लड़की पर बिना किसी ठोस कारण के शक करते थे और उसे जान से मारने की धमकियां देते थे। इस दौरान उसके साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का सिलसिला जारी था।
21 अप्रैल 2025 को पीड़िता के बयान के आधार पर वरुड पुलिस स्टेशन में उसकी मां और सौतेले पिता के विरुद्ध औपचारिक मामला दर्ज किया गया। पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
दर्ज धाराएं और कानूनी कार्रवाई
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 245/26, 118(1), 115(2), 351(2) और 352 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के अंतर्गत भी आरोप लगाए गए हैं, जो बच्चों के प्रति क्रूरता से संबंधित है।
मामले की जांच महिला सब-इंस्पेक्टर पूजा माली को सौंपी गई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों को 24 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया और भविष्य में किसी भी घटना को रोकने के लिए प्रिवेंटिव एक्शन भी लिया गया है।
पीड़िता की वर्तमान स्थिति
नाबालिग लड़की को फिलहाल अमरावती के चाइल्ड प्रोटेक्शन होम में रखा गया है, जहां उसकी देखभाल और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्चों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पुलिस के अनुसार, यदि जांच में कोई अन्य व्यक्ति इस क्रूरता में संलिप्त पाया गया तो उसके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
व्यापक संदर्भ — बाल संरक्षण की चुनौतियां
यह घटना उस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाती है जहां घर की चारदीवारी के भीतर ही बच्चे सबसे असुरक्षित होते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, बच्चों के विरुद्ध अपराधों में परिवार के सदस्यों की संलिप्तता के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं।
महाराष्ट्र में पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मामले अभी भी रिपोर्ट नहीं होते क्योंकि पीड़ित बच्चे डर या जागरूकता की कमी के कारण आवाज नहीं उठा पाते।
इस मामले में सौतेले पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है — सामाजिक शोध बताते हैं कि मिश्रित परिवारों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होते हैं, जिसके लिए काउंसलिंग और सामाजिक निगरानी की आवश्यकता है।
आगे की राह
वरुड पुलिस मामले की गहन जांच जारी रखेगी। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी पीड़िता के पुनर्वास की प्रक्रिया पर नजर रखेगी। अदालत में आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्याय प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है — क्योंकि बाल संरक्षण मामलों में त्वरित न्याय ही सबसे बड़ा निवारक होता है।