21 अक्टूबर 2026
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वसई-विरार: 'ध्रुवी हाइट्स-2' के 113 फ्लैट फर्जी दस्तावेजों पर बेचे, क्राइम ब्रांच ने 2 बिल्डर गिरफ्तार किए

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वसई-विरार: 'ध्रुवी हाइट्स-2' के 113 फ्लैट फर्जी दस्तावेजों पर बेचे, क्राइम ब्रांच ने 2 बिल्डर गिरफ्तार किए

सारांश

विरार पूर्व में फर्जी निर्माण अनुमति और जाली सीसी के आधार पर खड़ी 8 मंजिला 'ध्रुवी हाइट्स-2' के 113 फ्लैट खरीदारों के साथ धोखाधड़ी का बड़ा मामला। क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने 2 बिल्डर गिरफ्तार किए; दोनों 29 अक्टूबर तक हिरासत में, जाँच जारी।

मुख्य बातें

क्राइम ब्रांच यूनिट-2 वसई ने 21 अक्टूबर 2026 को कमलेश महादेव पाटिल (40) और विशाल विनायक पाटिल (38) को गिरफ्तार किया।
विरार पूर्व के नारिंगी गाँव में स्थित आठ मंजिला 'ध्रुवी हाइट्स-2' के 113 फ्लैटों की बिक्री में कथित धोखाधड़ी का आरोप।
कथित तौर पर फर्जी निर्माण अनुमति और जाली प्रारंभ प्रमाणपत्र (सीसी) के ज़रिये उप-पंजीयक कार्यालय में दस्तावेज़ पंजीकृत कराए गए।
मामला 19 अक्टूबर 2026 को विरार पुलिस स्टेशन में कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया।
दोनों आरोपी 29 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में; पीड़ित फ्लैट खरीदारों से जाँच अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराने की अपील।

वसई-विरार क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने 21 अक्टूबर 2026 को विरार पूर्व के नारिंगी गाँव में कथित तौर पर फर्जी निर्माण अनुमति और जाली प्रारंभ प्रमाणपत्र (सीसी) के आधार पर अवैध रूप से खड़ी की गई आठ मंजिला इमारत 'ध्रुवी हाइट्स-2' के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इमारत के 113 फ्लैटों की बिक्री में बड़े पैमाने पर आर्थिक धोखाधड़ी का आरोप है, जिसकी जाँच अब तेज़ हो गई है।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

नालासोपारा पूर्व के आचोले क्रॉसरोड स्थित जय साईराज संयुक्त नगर निवासी शिकायतकर्ता मुकेश शिवसागर उपाध्याय ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विरार पूर्व के मौजे नारिंगी गाँव में सर्वे नंबर 232, हिस्सा नंबर 5 स्थित भूखंड पर व्हीव्ही कंस्ट्रक्शन के मालिक ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के बल पर आठ मंजिला इमारत खड़ी की और फर्जी सीसी के ज़रिये फ्लैटों का पंजीकरण उप-पंजीयक कार्यालय क्रमांक-6 में कराया गया।

शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच यूनिट-2 वसई ने जाँच शुरू की और वसई-विरार शहर महानगरपालिका से भी संबंधित दस्तावेज़ी जानकारी प्राप्त की। जाँच में दूसरे आरोपी की संलिप्तता सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति से 19 अक्टूबर 2026 को विरार पुलिस स्टेशन में कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

पुलिस ने व्हीव्ही कंस्ट्रक्शन के कमलेश महादेव पाटिल (40) और विशाल विनायक पाटिल (38) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों ने कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से फर्जी निर्माण अनुमति के आधार पर 'ध्रुवी हाइट्स-2' का निर्माण किया और फ्लैटों को वैध बताकर खरीदारों व सरकार दोनों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी की। दोनों आरोपियों को 29 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में रखा गया है ताकि मामले में अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जा सके।

जाँच का केंद्र-बिंदु

अब जाँच मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित है — कथित फर्जी निर्माण अनुमति कैसे और किसकी मदद से तैयार हुई; 113 फ्लैटों की बिक्री प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही; और क्या इस मामले में और भी आरोपी शामिल हैं। गौरतलब है कि फर्जी सीसी के ज़रिये सरकारी रजिस्ट्री दफ्तर में दस्तावेज़ दाखिल किए जाने का आरोप इस मामले को महज़ निर्माण अनियमितता से आगे ले जाता है और इसमें सरकारी तंत्र के साथ संभावित मिलीभगत की जाँच ज़रूरी बनाता है।

पीड़ित फ्लैट खरीदारों से अपील

पुलिस ने 'ध्रुवी हाइट्स-2' में फ्लैट खरीदने वाले उन सभी नागरिकों से आगे आने की अपील की है, जिनके साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी हुई है। ऐसे खरीदारों से मामले के जाँच अधिकारी से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है, जिससे उनकी शिकायतें जाँच में शामिल हो सकें।

नेतृत्व और टीम

यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर निकेत कौशिक और पुलिस उपायुक्त (अपराध) संदीप डोईफोडे के मार्गदर्शन में की गई। सहायक पुलिस आयुक्त (प्रकटीकरण) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नितीन पाटील के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच यूनिट-2, वसई की टीम ने यह कार्रवाई अंजाम दी। जाँच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी ऐसी इमारतें बिकती रहती हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या जाँच केवल दो गिरफ्तारियों पर रुकेगी या दस्तावेज़ तैयार करने में सहायक सरकारी कड़ियों तक पहुँचेगी। 113 परिवारों की जमा-पूँजी दाँव पर लगी है — यह जवाबदेही की नहीं, सिस्टम सुधार की माँग है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ध्रुवी हाइट्स-2' धोखाधड़ी मामला क्या है?
यह वसई-विरार के विरार पूर्व में स्थित आठ मंजिला इमारत 'ध्रुवी हाइट्स-2' से जुड़ा मामला है, जिसमें आरोप है कि कथित तौर पर फर्जी निर्माण अनुमति और जाली प्रारंभ प्रमाणपत्र के आधार पर इमारत बनाई गई और 113 फ्लैट खरीदारों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी की गई। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
व्हीव्ही कंस्ट्रक्शन के कमलेश महादेव पाटिल (40) और विशाल विनायक पाटिल (38) को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को 29 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में रखा गया है।
फर्जी सीसी (प्रारंभ प्रमाणपत्र) का फ्लैट खरीदारों पर क्या असर हुआ?
फर्जी सीसी के ज़रिये फ्लैटों को वैध बताकर उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत कराया गया, जिससे खरीदारों ने अनजाने में एक कथित अवैध इमारत में निवेश किया। ऐसे फ्लैटों पर कानूनी अधिकार अनिश्चित हो जाता है और खरीदारों को आर्थिक व कानूनी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पीड़ित फ्लैट खरीदार अब क्या करें?
'ध्रुवी हाइट्स-2' में फ्लैट खरीदने वाले जिन नागरिकों के साथ कथित धोखाधड़ी हुई है, उनसे पुलिस ने मामले के जाँच अधिकारी से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराने की अपील की है, ताकि उनकी शिकायतें जाँच में शामिल हो सकें।
जाँच आगे किस दिशा में जाएगी?
क्राइम ब्रांच यूनिट-2 वसई अब यह पता लगा रही है कि फर्जी निर्माण अनुमति और सीसी कैसे तैयार हुए, 113 फ्लैटों की बिक्री में कौन-कौन से अन्य लोग शामिल थे और क्या इस षड्यंत्र में और भी आरोपी हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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