DRDO-वायुसेना ने 'टारा' ग्लाइड वेपन सिस्टम का पहला सफल परीक्षण किया, साधारण बम बनेंगे प्रिसिजन हथियार

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DRDO-वायुसेना ने 'टारा' ग्लाइड वेपन सिस्टम का पहला सफल परीक्षण किया, साधारण बम बनेंगे प्रिसिजन हथियार

सारांश

भारत ने 7 मई को ओडिशा तट के पास 'टारा' ग्लाइड वेपन सिस्टम का पहला सफल परीक्षण कर एक अहम रक्षा मील का पत्थर हासिल किया। यह स्वदेशी प्रणाली साधारण बमों को सटीक प्रिसिजन हथियारों में बदल देती है — कम लागत में ज़्यादा मारक क्षमता। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह DRDO की बड़ी छलांग है।

मुख्य बातें

DRDO और भारतीय वायुसेना ने 7 मई 2025 को ओडिशा तट के पास टारा ग्लाइड वेपन सिस्टम का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया।
टारा सामान्य बिना-मार्गदर्शन वाले बमों को प्रिसिजन गाइडेड हथियारों में परिवर्तित करता है, जिससे सटीकता और मारक क्षमता दोनों बढ़ती हैं।
प्रणाली को DRDO के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने विकसित किया; DCPP और भारतीय उद्योगों की भागीदारी से उत्पादन शुरू।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और DRDO अध्यक्ष डॉ.
कामत ने टीम को बधाई दी।
इससे पहले DRDO व भारतीय नौसेना ने NASM-SR का सफल सल्वो लॉन्च किया — पहली बार एक हेलिकॉप्टर से दो मिसाइलें एक साथ दागी गईं।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना ने 7 मई 2025 को ओडिशा तट के पास स्वदेशी 'टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन' (टारा) ग्लाइड वेपन सिस्टम का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह प्रणाली सामान्य बिना-मार्गदर्शन वाले बमों और वारहेड को अत्याधुनिक प्रिसिजन गाइडेड हथियारों में बदलने में सक्षम है, जिससे भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

टारा प्रणाली क्या है और कैसे काम करती है

टारा एक विशेष ग्लाइड वेपन सिस्टम है जो कम लागत वाली अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करता है। यह प्रणाली पारंपरिक हथियारों को प्रिसिजन गाइडेड मुनिशन में परिवर्तित कर देती है, जिससे निशाने की सटीकता और मारक क्षमता — दोनों में एक साथ सुधार होता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस नई प्रणाली के जरिए काफी कम लागत में दुश्मन के जमीनी ठिकानों को अधिक प्रभावी तरीके से नष्ट किया जा सकेगा।

इस परियोजना को DRDO के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर विकसित किया है। 'डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर्स' (DCPP) और अन्य भारतीय कंपनियों ने भी इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उल्लेखनीय है कि इस प्रणाली का उत्पादन कार्य भी अब शुरू हो चुका है।

सरकार और वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टारा के सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय वायुसेना और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और सभी टीमों को शुभकामनाएँ दीं।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों के अनुसार, टारा जैसी स्वदेशी प्रणाली भारतीय वायुसेना को भविष्य के युद्ध अभियानों में अधिक सटीक और कम लागत वाला विकल्प देगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत विदेशी रक्षा तकनीक पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है। इससे 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी ठोस बल मिलेगा।

NASAM-SR का सल्वो परीक्षण भी सफल

गौरतलब है कि इससे कुछ दिन पहले ही DRDO और भारतीय नौसेना ने मिलकर नेवल एंटी-शिप मिसाइल, शॉर्ट रेंज (NASM-SR) का सफल सल्वो लॉन्च किया था। यह परीक्षण बंगाल की खाड़ी में ओडिशा के तट के पास संपन्न हुआ और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पहली बार एक ही हेलिकॉप्टर से बेहद कम समय में दो एंटी-शिप मिसाइलें दागी गईं, जिन्होंने सभी तय उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल किया।

परीक्षण की निगरानी के लिए विशेष रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया, जिन्हें चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज ने तैनात किया था। मिसाइलों ने अपनी वॉटरलाइन हिट क्षमता भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित की, यानी वे दुश्मन के जहाज को पानी की सतह के निकट निशाना बनाकर अधिकतम क्षति पहुँचाने में सक्षम हैं। इन दोनों परीक्षणों की सफलता भारत के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक पड़ाव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि यह प्रणाली परिचालन तैनाती तक कितनी तेज़ी से पहुँचती है — भारत के कई स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम परीक्षण से उत्पादन तक की राह में वर्षों खो देते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव का माहौल है, जो इस उपलब्धि की रणनीतिक प्रासंगिकता को और बढ़ा देता है। कम लागत में प्रिसिजन क्षमता का विचार सही दिशा में है, पर विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने का दावा तब सार्थक होगा जब बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन और वायुसेना में एकीकरण सिद्ध हो।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टारा (TARA) ग्लाइड वेपन सिस्टम क्या है?
टारा यानी 'टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन' एक स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है जो सामान्य बिना-मार्गदर्शन वाले बमों और वारहेड को प्रिसिजन गाइडेड हथियारों में बदल देता है। इसे DRDO के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने विकसित किया है।
टारा का परीक्षण कब और कहाँ हुआ?
टारा का पहला सफल उड़ान परीक्षण 7 मई 2025 को ओडिशा तट के पास DRDO और भारतीय वायुसेना ने संयुक्त रूप से किया। परीक्षण में सभी तय उद्देश्य हासिल किए गए।
टारा प्रणाली से भारतीय वायुसेना को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, टारा भारतीय वायुसेना को भविष्य के युद्ध अभियानों में कम लागत में अधिक सटीक हमले की क्षमता देगा। इससे महँगे विदेशी प्रिसिजन हथियारों पर निर्भरता घटेगी और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बल मिलेगा।
NASM-SR मिसाइल परीक्षण क्या था और यह क्यों खास है?
नेवल एंटी-शिप मिसाइल शॉर्ट रेंज (NASM-SR) का सल्वो लॉन्च DRDO और भारतीय नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में ओडिशा तट के पास किया। पहली बार एक ही हेलिकॉप्टर से बेहद कम समय में दो मिसाइलें दागी गईं और दोनों ने अपनी वॉटरलाइन हिट क्षमता सफलतापूर्वक प्रदर्शित की।
टारा के उत्पादन में कौन-सी भारतीय कंपनियाँ शामिल हैं?
टारा के विकास और उत्पादन में 'डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर्स' (DCPP) और अन्य भारतीय कंपनियाँ शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार प्रणाली का उत्पादन कार्य शुरू हो चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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