26 जुलाई 2026
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वेंकैया नायडू बोले — मोदी हैं 'भारत के भाग्य विधाता', नेहरू का 4,399 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ा

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वेंकैया नायडू बोले — मोदी हैं 'भारत के भाग्य विधाता', नेहरू का 4,399 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ा

सारांश

पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मोदी को 'भारत का भाग्य विधाता' की संज्ञा दी — वडनगर की चाय की दुकान से साउथ ब्लॉक तक की यात्रा, नेहरू का 4,399 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ना और 12 वर्षों की उपलब्धियों को एक लेख में समेटा।

मुख्य बातें

पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने 10 जून 2026 को PM नरेंद्र मोदी को 'भारत का भाग्य विधाता' कहते हुए विस्तृत लेख लिखा।
मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू का 4,399 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ा; उनके कार्यकाल में अभी तीन साल शेष हैं।
12 करोड़ शौचालय, 4 करोड़ आवास, 57 करोड़ बैंक खाते और ₹45 लाख करोड़ DBT ट्रांसफर — नायडू ने प्रमुख उपलब्धियाँ गिनाईं।
ऑपरेशन सिंदूर , अनुच्छेद 370 हटाना, तीन तलाक उन्मूलन और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को साहसिक निर्णयों में शामिल किया।
आयुष्मान भारत को दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी-वित्तपोषित स्वास्थ्य कार्यक्रम बताया; UPI से 24,000 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन।

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने 10 जून 2026 को एक विस्तृत लेख लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'मैन ऑफ डेस्टिनी फॉर इंडिया' — यानी भारत का भाग्य विधाता — की संज्ञा दी। नायडू ने कहा कि मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू का 4,399 दिनों का रिकॉर्ड तोड़कर स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार पद पर रहने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया है।

एक असाधारण राजनीतिक यात्रा

नायडू ने अपने लेख में लिखा कि आज़ाद भारत ने नेहरू से लेकर मोदी तक कुल 15 प्रधानमंत्री देखे हैं, परंतु मोदी की कहानी सबसे अनूठी है। गुजरात के वडनगर में एक साधारण परिवार में जन्मे मोदी ने बचपन में चाय बेचकर अपने पिता का हाथ बंटाया और वहाँ से देश की राजधानी नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय तक की यात्रा तय की।

नायडू के अनुसार, यह उपलब्धि इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस दौर में हासिल हुई जब जबरदस्त राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, गठबंधन की राजनीति, चौबीसों घंटे मीडिया की नज़र और सोशल मीडिया-संचालित जन-चर्चा का माहौल है।

आरएसएस से प्रधानमंत्री तक — विचारधारा की छाप

पूर्व उपराष्ट्रपति ने लिखा कि मोदी की सोच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ उनके प्रारंभिक जुड़ाव का गहरा प्रभाव रहा। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय आरएसएस, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा सौंपे गए दायित्वों को चुपचाप निभाते हुए बिताया। इस प्रक्रिया में उन्होंने संगठनात्मक कुशलता, स्पष्ट विचारदृष्टि और भारत के भविष्य की कल्पना करने का साहस अर्जित किया।

51 वर्ष की आयु में गुजरात के मुख्यमंत्री बने मोदी ने 13 वर्षों के निर्बाध कार्यकाल में 'गुजरात मॉडल' को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। नायडू के अनुसार, भारत की जनता एक ऐसे नेता की तलाश में थी जो परिणाम दे सके और उन्हें मोदी में वह नेता मिला। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया।

12 वर्षों की उपलब्धियाँ — आँकड़ों की ज़बान में

नायडू ने प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की विस्तृत समीक्षा करते हुए कई प्रमुख आँकड़े गिनाए:

12 करोड़ से अधिक घरों में शौचालय निर्माण कर 'स्वच्छ भारत' को जन-आंदोलन बनाया गया। गरीबों के लिए 4 करोड़ से ज़्यादा आवास बनाए गए। 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को ₹45 लाख करोड़ ट्रांसफर किए गए।

10 करोड़ से अधिक महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन दिए गए। UPI के ज़रिए 24,000 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन ने भारत को रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में वैश्विक अग्रणी बनाया। कोविड-19 महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता प्रदान की गई।

सुधार, सुरक्षा और विदेश नीति

नायडू ने रेखांकित किया कि मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाना, तीन तलाक को समाप्त करना, जीएसटी सुधार लागू करना और संसद व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण जैसे कठिन निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद लगभग समाप्त हो चुका है और सर्जिकल स्ट्राइक तथा ऑपरेशन सिंदूर ने देश की सैन्य दृढ़ता का संदेश दिया।

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ — देशभर में IIT, IIM और AIIMS की संख्या कई गुना बढ़ी। आयुष्मान भारत को दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी-वित्तपोषित स्वास्थ्य कार्यक्रम बताया गया।

नायडू का अंतिम संदेश

लेख के समापन में पूर्व उपराष्ट्रपति ने लिखा, 'इन 12 साल के बाद मुझे पीएम मोदी को 'मैन ऑफ डेस्टिनी फॉर इंडिया' — भारत का भाग्य विधाता — का नाम देने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। भारत उनके हाथों में सुरक्षित है।' नायडू ने मोदी को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ देते हुए 'स्वर्णिम भारत' की परिकल्पना को उनके नेतृत्व से जोड़ा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मोदी के तीसरे कार्यकाल में अभी तीन वर्ष और शेष हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इसे महज़ राजनीतिक प्रशंसा कहकर खारिज नहीं किया जा सकता — लेकिन इसमें आलोचनात्मक परिप्रेक्ष्य का सर्वथा अभाव है। 4,399 दिनों का रिकॉर्ड निर्विवाद तथ्य है, किंतु दीर्घकालिक सत्ता और शासन की गुणवत्ता हमेशा समानांतर नहीं चलती। ₹45 लाख करोड़ DBT और 80 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता जैसे आँकड़े प्रभावशाली हैं, पर स्वतंत्र सत्यापन और रोज़गार सृजन के आँकड़ों के बिना ये एकांगी चित्र प्रस्तुत करते हैं। 'भाग्य विधाता' जैसी उपाधि राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करती है — विशेषकर जब तीसरा कार्यकाल अभी मध्य में है और कई नीतिगत परिणाम अभी आकार ले रहे हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वेंकैया नायडू ने PM मोदी को 'भारत का भाग्य विधाता' क्यों कहा?
पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने 10 जून 2026 को लिखे एक लेख में मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल, नेहरू का 4,399 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ने और स्वच्छ भारत से ऑपरेशन सिंदूर तक की उपलब्धियों के आधार पर उन्हें 'मैन ऑफ डेस्टिनी फॉर इंडिया' की संज्ञा दी।
मोदी ने नेहरू का कौन-सा रिकॉर्ड तोड़ा?
नरेंद्र मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू का लगातार सबसे अधिक दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ा। नायडू के अनुसार यह आँकड़ा 4,399 दिनों का है और मोदी के कार्यकाल में अभी तीन वर्ष और शेष हैं।
नायडू ने मोदी के किन प्रमुख कार्यों की सराहना की?
नायडू ने 12 करोड़ शौचालय, 4 करोड़ आवास, 57 करोड़ बैंक खाते, ₹45 लाख करोड़ DBT ट्रांसफर, 10 करोड़ महिलाओं को LPG कनेक्शन, आयुष्मान भारत, अनुच्छेद 370 हटाना, तीन तलाक उन्मूलन और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया।
मोदी की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या रही है?
नायडू के लेख के अनुसार, मोदी गुजरात के वडनगर में जन्मे, बचपन में चाय बेची और RSS, जनसंघ तथा BJP में विभिन्न स्तरों पर काम किया। 51 वर्ष की आयु में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और 13 वर्षों के निर्बाध कार्यकाल के बाद 2014 में प्रधानमंत्री।
वेंकैया नायडू कौन हैं और उनकी यह टिप्पणी क्यों अहम है?
वेंकैया नायडू भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हैं और BJP के वरिष्ठ नेता रहे हैं। एक संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति द्वारा सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री की इस प्रकार की सार्वजनिक प्रशंसा राजनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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