विश्व सर्प दिवस 2026: दिल्ली चिड़ियाघर में 900 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा, भारतीय कोबरा के तीन शावकों का सफल जन्म
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) ने 16 जुलाई 2026 को विश्व सर्प दिवस के अवसर पर सांपों के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और जन-जागरूकता को समर्पित एक विस्तृत कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन में लगभग 900 आगंतुकों सहित कुल 970 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रति बढ़ती सार्वजनिक रुचि का प्रमाण है।
कार्यक्रम का विवरण
दिवस की शुरुआत चिड़ियाघर के स्थायी कर्मचारियों के लिए आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान से हुई, जिसमें सांपों की जीवविज्ञान, संरक्षण और सुरक्षित तरीके से उन्हें संभालने की तकनीकों पर जानकारी दी गई। इसके साथ ही सहायक कीपर, मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) और सरीसृप देखभाल कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित हुए।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम वाइल्डलाइफ एसओएस, नई दिल्ली के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने सरीसृप देखभाल की आधुनिक पद्धतियों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। कुल 50 चिड़ियाघर कर्मियों, 20 इंटर्न और 2 स्वयंसेवकों ने इन प्रशिक्षण सत्रों में भाग लिया।
बच्चों के लिए विशेष गतिविधियाँ
आगंतुक बच्चों के लिए स्नेक-थीम डूडल गतिविधि और क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से सांपों के पारिस्थितिक महत्व, पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका और संरक्षण की आवश्यकता को सरल और रोचक तरीके से समझाया गया।
चिड़ियाघर में सांपों की वर्तमान स्थिति
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में वर्तमान में सांपों की 6 प्रजातियों के 26 वयस्क और 3 नवजात सर्प मौजूद हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले एक वर्ष में चिड़ियाघर के संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं — भारतीय कोबरा (Indian Cobra) के तीन शावकों का सफल जन्म हुआ है, जबकि रैट स्नेक के अंडों का वर्तमान में कृत्रिम ऊष्मायन (artificial incubation) किया जा रहा है।
बुनियादी ढाँचे में सुधार
पिछले एक वर्ष में चिड़ियाघर प्रशासन ने सरीसृप देखभाल को उन्नत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें UV लाइटिंग सिस्टम की स्थापना, तापमान और आर्द्रता निगरानी उपकरण, रेप्टाइल हाउस में पर्यावरणीय समृद्धि उपाय, कोको पीट बिछाना और वैज्ञानिक पद्धति से अंडों का कृत्रिम ऊष्मायन शामिल हैं।
चिड़ियाघर की आगामी आधुनिकीकरण योजना के तहत मौजूदा रेप्टाइल हाउस को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें उन्नत तापमान नियंत्रण, बेहतर पर्यावरण प्रबंधन और आगंतुकों के लिए आधुनिक व्याख्या सुविधाएँ शामिल होंगी। भविष्य में और अधिक सरीसृप प्रजातियों को शामिल करने, संरक्षण प्रजनन और अनुसंधान को प्राथमिकता देने की भी योजना है।
निदेशक का संदेश
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के निदेशक ने इस अवसर पर कहा कि सांप प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं और कृंतकों की आबादी नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सरीसृपों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा वैज्ञानिक पशु प्रबंधन को आगे बढ़ाने की चिड़ियाघर की प्रतिबद्धता दोहराई। यह आयोजन इस बात का संकेत है कि भारत में सरीसृप संरक्षण को लेकर संस्थागत दृष्टिकोण अधिक वैज्ञानिक और समुदाय-केंद्रित होता जा रहा है।